कपास किसानों के लिए बड़ी खबर, कटाई के समय 75-80 रुपये किलो रह सकता है भाव, TNAU का अनुमान

Cotton Price 2026: कपास किसानों के लिए राहत की खबर है. तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) के अनुमान के मुताबिक, कटाई के समय कपास का भाव 75 से 80 रुपये प्रति किलो के आसपास रह सकता है. हालांकि, वास्तविक कीमत फसल की क्वालिटी, बाजार में आवक, मांग और उस समय की बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगी.

नोएडा | Published: 23 Aug, 2026 | 02:08 PM

Cotton Price Forecast TNAU: कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आई है. तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) के डोमेस्टिक एंड एक्सपोर्ट मार्केट इंटेलिजेंस सेल (DEMIC) ने आने वाले कपास सीजन के लिए कीमतों का अनुमान जारी किया है. इसके मुताबिक, अच्छी क्वालिटी की कपास का भाव कटाई के समय करीब 75 से 80 रुपये प्रति किलो रह सकता है. इस अनुमान को किसानों के लिए बुवाई से पहले जारी किया गया है, ताकि वे फसल लगाने से पहले बाजार की संभावित स्थिति को समझ सकें.

20 साल के बाजार भाव का किया गया अध्ययन

टीएनएयू ने यह अनुमान सिर्फ एक-दो साल के आंकड़ों को देखकर नहीं लगाया है. विश्वविद्यालय के डेमिक ने मोलनूर रेगुलेटेड मार्केट में पिछले 20 साल के कपास के भाव को देखा और उनमें आए बदलावों को समझा. इसी पुराने बाजार के रुझान के आधार पर अच्छी क्वालिटी की कपास का भाव 75-80 रुपये प्रति किलो रहने का अनुमान लगाया गया है. यह अनुमान किसानों के लिए इसलिए जरूरी है, क्योंकि बुवाई के समय ही उन्हें अंदाजा हो जाएगा कि फसल तैयार होने के आसपास कपास के भाव किस तरह रह सकते हैं. इससे किसान फसल की बुवाई को लेकर बेहतर फैसला ले सकेंगे.

बुवाई का फैसला सोच-समझकर लें किसान

TNAU ने किसानों को सलाह दी है कि, वे कपास की बुवाई का फैसला लेते समय अनुमानित कीमतों को भी ध्यान में रखें. हालांकि, 75-80 रुपये प्रति किलो का भाव एक अनुमान है, यह तय बाजार कीमत नहीं है. फसल तैयार होने के समय मांग, आवक, कपास की क्वालिटी और बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से वास्तविक भाव ऊपर-नीचे हो सकता है. किसानों के लिए यह भी जरूरी है कि वे सिर्फ संभावित कीमत देखकर ही बुवाई न करें, बल्कि अपने इलाके की मिट्टी, पानी की उपलब्धता, मौसम और लागत को ध्यान में रखकर फैसला लें.

भारत में बड़े पैमाने पर होती है कपास की खेती

कपास भारत की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है. देश दुनिया में कपास की खेती के रकबे के मामले में पहले स्थान पर है. वहीं, उत्पादन और खपत के मामले में भारत दूसरे स्थान पर आता है. इसलिए कपास की कीमत में बदलाव का असर देश के करोड़ों किसानों के साथ-साथ कपड़ा उद्योग पर भी पड़ता है. कपास की खेती किसानों के लिए आय का एक अहम जरिया है. ऐसे में बुवाई से पहले बाजार की संभावित कीमतों की जानकारी मिलना किसानों को अपनी फसल योजना बनाने में मदद कर सकता है.

2025-26 में 114.82 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, देश में कपास की खेती करीब 114.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई थी. इस दौरान कपास का उत्पादन करीब 49.455 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया. वहीं, कपास की औसत उत्पादकता करीब 431 किलो प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है. ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में कपास का खेती क्षेत्र कितना बड़ा है और देश की कृषि अर्थव्यवस्था में इसका कितना महत्व है.

अच्छी क्वालिटी पर मिल सकता है बेहतर भाव

TNAU का अनुमान खास तौर पर अच्छी क्वालिटी की कपास के लिए है. इसलिए किसानों के लिए फसल की क्वालिटी पर ध्यान देना भी जरूरी होगा. कटाई के बाद कपास में नमी, गंदगी या दूसरी अशुद्धियां होने पर उसकी कीमत प्रभावित हो सकती है. किसानों को फसल की कटाई, सुखाने और भंडारण के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि मंडी में अच्छी क्वालिटी की उपज पहुंचाई जा सके.

किसानों के लिए क्यों अहम है यह अनुमान?

कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव किसानों की कमाई पर सीधा असर डालता है. ऐसे में TNAU का 75-80 रुपये किलो का अनुमान किसानों को बुवाई से पहले बाजार की संभावित दिशा समझने में मदद कर सकता है. हालांकि, किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि अनुमान और वास्तविक बाजार भाव अलग हो सकते हैं.

Topics: