किसानों की मांगों को पूरा करेगी सरकार? किसानों के मुद्दों पर सहमति बनी पर अभी और बैठकें होंगी
Manohar Lal Khattar meet SKM-NP Leaders: किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि केंद्रीय मंत्री के साथ वार्ता सकारात्मक माहौल में हुई और उन्होंने सभी मांगों को संबंधित मंत्रालयों तक पहुंचाने और पूरा कराने का भरोसा दिया है.
संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की गुरुवार देर शाम केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ करीब 2.30 घंटे तक मीटिंग चली. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने किसानों की 10 सूत्रीय मांगों को सुना और दोनों पक्षों में उन्हें पूरा कराने पर सहमति बनी. किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि केंद्रीय मंत्री के साथ वार्ता सकारात्मक माहौल में हुई और उन्होंने सभी मांगों को संबंधित मंत्रालयों तक पहुंचाने और पूरा कराने का भरोसा दिया है. किसानों की मांगों पर खुली चर्चा के लिए अगली बैठक मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ कराने का भी भरोसा दिया गया है.
किसान मोर्चा ने पीएम के नाम चिट्ठी मंत्री को सौंपी
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रतिनिधिमंडल के बीच गुरुग्राम के PWD रेस्ट हाउस में करीब बैठक हुई. किसान नेताओं ने MSP की कानूनी गारंटी, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र को बाहर रखने और खेतों से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनों के लिए उचित मुआवजे समेत कई मांगें सरकार के सामने रखीं. किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र भी सौंपा. बता दें कि पहले यह बैठक 4 सितंबर को होनी थी पर मंत्री आग्रह पर 3 सितंबर को बैठक हुई.
केंद्रीय मंत्री ने मांगों पर विचार करने के बाद मानने का आश्वासन दिया
संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के नेता अभिमन्यू कोहाड़ ने बताया कि बैठक में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों और मजदूरों की चिंताएं केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी गईं. इस दौरान ने कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मछली पालन क्षेत्रों को प्रस्तावित समझौते से बाहर रखने की मांग की. कोहाड़ ने बताया कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आश्वासन दिया है कि इन क्षेत्रों के हितों को सुरक्षित रखा जाएगा और केंद्र सरकार जल्द ही इस विषय पर सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करेगी.
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किसानों के साथ मंत्रियों की और बैठकें संभव
अभिमन्यू कोहाड़ ने कहा कि मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किसानों की सभी मांगों को संबंधित मंत्रालयों तक पहुंचाने और पूरा कराने का भरोसा दिया है. इसके साथ ही मांगों से संबंधित मंत्रालयों के मंत्रियों से विचार विमर्श के साथ ही किसानों की मांगों पर खुली चर्चा के लिए अगली बैठक कराने पर जोर रहेगा. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को भी किसानों की मांगों के बारे में अवगत कराया जाएगा.
बैठक के बाद क्या बोले केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारी किसान प्रतिनिधियों से बहुत अच्छी और सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई. उन्होंने अपनी मांगें रखीं और हम भविष्य में उन मांगों को संबंधित विभागों तक पहुंचाएंगे. हमने बिजली विभाग से जुड़ी उनकी चिंताओं को निश्चित रूप से सुना है और वे इससे बहुत संतुष्ट हैं.
Gurugram, Haryana: A meeting between the Samyukta Kisan Morcha (SKM) and Union Minister Manohar Lal Khattar concluded after discussions on nine demands. The farmer representatives submitted their charter of demands
Union Minister Manohar Lal Khattar says, “We had a very good and… pic.twitter.com/DsuEScyxzm
— IANS (@ians_india) September 3, 2026
किसानों की 10 प्रमुख मांगें
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि को बाहर रखा जाए – कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मछली पालन को व्यापार समझौते में शामिल नहीं करने की मांग,
- सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी- किसानों ने MSP गारंटी कानून बनाने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार C2 लागत पर 50 फीसदी जोड़कर MSP तय करने की मांग की.
- किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए – किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ करने की मांग रखी गई.
- भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव- 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को फिर से लागू करने की मांग। इसमें 75 फीसदी किसानों की लिखित सहमति और बाजार भाव का चार गुना मुआवजा शामिल है.
- हाईटेंशन बिजली लाइनों का उचित मुआवजा- किसानों ने बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा और ग्रामीण इलाकों में Right of Way के लिए बाजार मूल्य का 60 फीसदी मुआवजा देने की मांग की.
- गन्ने का FRP 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए- साथ ही गन्ने का भुगतान 14 दिन में और देरी होने पर 12-15 फीसदी ब्याज देने की मांग.
- फसल नुकसान के लिए राष्ट्रीय नीति- बाढ़, सूखा और जलवायु परिवर्तन से होने वाले फसल नुकसान की भरपाई के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग.
- फसल बीमा योजना में बदलाव- मौजूदा फसल बीमा योजना को किसान हितैषी बनाने की मांग.
- बीज और बिजली बिल पर किसानों की सहमति- बीज बिल और विद्युत संशोधन बिल में किसानों से जुड़े प्रावधान व्यापक सहमति के बिना लागू नहीं करने की मांग.
- किसान आंदोलन से जुड़े मुकदमे वापस लिए जाएं- आंदोलनों के दौरान किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की गई.