उड़द की खेती से होगा बंपर फायदा.. बस अपनाएं ये आसान कृषि टिप्स, फसल बनेगी सोना

उड़द की खेती में सही समय पर देखभाल और पोषक तत्वों का संतुलन बेहद जरूरी होता है. शुरुआती अवस्था में फसल की जांच और मिट्टी की स्थिति समझना उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. विशेषज्ञों के अनुसार सही प्रबंधन अपनाने से फसल स्वस्थ रहती है और किसानों को अधिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

नोएडा | Published: 19 Jun, 2026 | 12:30 PM

Urd Farming: उड़द की फसल कम समय में तैयार होने वाली दलहनी फसल है, लेकिन सही देखभाल न होने पर इसका उत्पादन काफी प्रभावित हो सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार यदि किसान शुरुआती अवस्था से ही खेत की निगरानी और पोषण प्रबंधन पर ध्यान दें, तो फसल से बेहतर पैदावार प्राप्त की जा सकती है. खासकर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलन फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को सीधे प्रभावित करता है.

फसल की शुरुआती जांच और पौधों का निरीक्षण जरूरी

जब उड़द की फसल  लगभग 25 से 30 दिन की हो जाती है, तब खेत का नियमित निरीक्षण करना बेहद जरूरी होता है. इस समय किसानों को कुछ पौधों को उखाड़कर उनकी जड़ों की स्थिति देखनी चाहिए. यदि जड़ों में सफेद रंग की गांठें पर्याप्त मात्रा में दिखाई देती हैं, तो यह संकेत है कि फसल में नाइट्रोजन का संतुलन सही है और पौधे स्वस्थ तरीके से बढ़ रहे हैं. लेकिन यदि गांठें कम या कमजोर हों, तो फसल को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है. इस अवस्था में किसान उर्वरकों का सही उपयोग करके फसल को मजबूत बना सकते हैं.

नाइट्रोजन संतुलन और उर्वरकों का सही उपयोग

उड़द की फसल में नाइट्रोजन की भूमिका  सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह प्रोटीन निर्माण में मदद करता है और पौधों की वृद्धि को तेज करता है. यदि नाइट्रोजन की कमी हो जाती है, तो पौधों की पत्तियां हल्की हरी या पीली दिखने लगती हैं और उत्पादन घटने लगता है. वहीं अधिक मात्रा भी नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में किसानों को संतुलित मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आवश्यकता होने पर नैनो डीएपी या एनपीके जैसे उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है, जिनमें नाइट्रोजन के साथ फास्फोरस और पोटाश भी मौजूद होते हैं.

फसल में पोषक तत्वों की कमी और समाधान

यदि उड़द की फसल में पत्तियों का रंग गहरा  हरा नहीं है, फूल झड़ रहे हैं या दानों की संख्या कम है, तो यह पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है. ऐसे में किसानों को कैल्शियम, बोरान और जिंक जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का उपयोग करना चाहिए. ये तत्व पौधों की वृद्धि को सुधारते हैं और दानों की गुणवत्ता बढ़ाते हैं. साथ ही मिट्टी की जांच कराना भी बहुत जरूरी माना जाता है, जिससे खेत की वास्तविक स्थिति का पता चल सके और सही समय पर सुधार किया जा सके.

बेहतर उत्पादन के लिए समग्र कृषि प्रबंधन

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, उड़द की खेती  में केवल खाद और उर्वरक ही नहीं, बल्कि पूरे खेत का संतुलित प्रबंधन जरूरी है. समय पर सिंचाई, रोग नियंत्रण और पोषक तत्वों का सही उपयोग फसल को मजबूत बनाता है. यदि किसान शुरुआती अवस्था से ही वैज्ञानिक तरीके अपनाएं और खेत की नियमित निगरानी करें, तो उड़द की फसल से अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है.

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