गन्ने की पैदावार में पश्चिमी यूपी का दबदबा, शामली नंबर-1..कुशीनगर का उत्पादन औसत से कम

उत्तर प्रदेश में गन्ने की औसत पैदावार 825 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. पश्चिमी यूपी के जिले उत्पादकता में आगे हैं. शामली में सबसे ज्यादा 969 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार है. कुशीनगर में यह 793.68 क्विंटल है. विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक खेती, बेहतर सिंचाई, पेड़ी प्रबंधन और इंटरक्रॉपिंग से उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी है. मजदूरों की कमी किसानों की बड़ी चुनौती है.

नोएडा | Published: 13 Aug, 2026 | 11:16 AM

Sugarcane Cultivation: उत्तर प्रदेश में गन्ने की औसत पैदावार करीब 825 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. राज्य के पश्चिमी जिलों में गन्ने की उत्पादकता पूर्वी यूपी के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों के मुकाबले ज्यादा बनी हुई है. गन्ना किसान प्रशिक्षण केंद्र, पिपराइच (गोरखपुर) के पूर्व सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता के मुताबिक, राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में शामिल कुशीनगर में औसत पैदावार 793.68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही है. हालांकि, शामली जिला गन्ना पैदावार के मामले में पहले स्थान पर है.

उत्तर प्रदेश के 45 जिलों में गन्ने की खेती होती है. इनमें शामली सबसे ज्यादा 969 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत पैदावार के साथ पहले स्थान पर है. इसके बाद बागपत में 914 क्विंटल और मुजफ्फरनगर में 900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन है. आंकड़ों से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश की गन्ना उत्पादकता में बड़ा अंतर सामने आता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिमी यूपी में बेहतर सिंचाई व्यवस्था, कृषि मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल और खेती में किसानों की सीधी भागीदारी से पैदावार अधिक है.

प्रति एकड़ सिर्फ 200 क्विंटल पैदावार

गन्ना क्षेत्र में करीब 40 साल का अनुभव रखने वाले और गन्ना किसान प्रशिक्षण केंद्र, पिपराइच (गोरखपुर) के पूर्व सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने न्यूज बेवसाइट चीनी मंडी से कहा कि किसानों को पैदावार और मुनाफा बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती पर ध्यान देना चाहिए. उनके मुताबिक, अगर किसान प्रति एकड़ सिर्फ 200 क्विंटल गन्ना पैदा करता है तो अच्छा मुनाफा कमाना मुश्किल हो सकता है. खेती और परिवहन पर प्रति एकड़ करीब 70-80 हजार रुपये तक खर्च आता है.

कुशीनगर में 2.15 लाख किसानों ने बेचा गन्ना

उन्होंने किसानों को प्रति एकड़ करीब 400 क्विंटल पैदावार का लक्ष्य रखने की सलाह दी. साथ ही, गन्ने के साथ दूसरी फसलों की खेती (इंटरक्रॉपिंग) और पेड़ी फसल के बेहतर प्रबंधन पर भी जोर दिया. कुशीनगर में गन्ने की औसत पैदावार भले ही राज्य के औसत से कम है, लेकिन यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से बेहतर है. 2025-26 सीजन में जिले के करीब 2.15 लाख किसानों ने चीनी मिलों को गन्ना बेचा. इसके बदले किसानों को करीब 1,081 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान मिला.

मजदूरों की कमी से बढ़ रही किसानों की परेशानी

हालांकि, जिले में अब मजदूरों की कमी गन्ना किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है. खासकर गन्ने की कटाई के सीजन में खेतों से गन्ना काटने, पत्तियां हटाने और गन्ना लोड करने के लिए मजदूर आसानी से नहीं मिल रहे हैं. इससे किसानों की लागत बढ़ने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. गन्ना क्षेत्र के विशेषज्ञ ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि राज्य में पश्चिमी और पूर्वी यूपी की उत्पादकता के अंतर को कम करने के लिए वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना जरूरी है. इसके साथ संतुलित सिंचाई, पेड़ी फसल का बेहतर प्रबंधन और गन्ने के साथ दूसरी फसलों की खेती पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए गन्ने की प्रति एकड़ पैदावार बढ़ाना जरूरी है.

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