नया पशु खरीदते ही न करें यह गलती! 28 दिन का यह नियम अपनाया तो पूरे झुंड को बीमारी से बचा सकते हैं

Animal Husbandry Tips: पशुपालन में नया पशु खरीदते समय सावधानी बेहद जरूरी होती है. विशेषज्ञों के अनुसार नए पशु को सीधे झुंड में शामिल करने के बजाय कम से कम 28 दिनों तक क्वारंटीन में रखना चाहिए. इस दौरान पशु के स्वास्थ्य की जांच, टीकाकरण और उचित देखभाल करना जरूरी है. इससे संभावित बीमारियों को समय रहते पहचाना जा सकता है और पूरे झुंड को संक्रमण से बचाया जा सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 7 Mar, 2026 | 10:36 AM

Dairy Farming Tips: पशुपालन में मुनाफा तभी संभव है जब पशु स्वस्थ रहें. कई बार किसान नया पशु खरीदकर सीधे अपने पुराने झुंड में शामिल कर देते हैं, लेकिन यह एक बड़ी गलती साबित हो सकती है. नए पशु के साथ कई बार ऐसी बीमारियां भी आ सकती हैं जो पूरे झुंड में तेजी से फैल सकती हैं. पशुपालन विभाग (Department of Animal Husbandry) के अनुसार, नया पशु खरीदने के बाद उसे तुरंत झुंड में शामिल करने के बजाय कुछ समय तक अलग रखना चाहिए. पशुपालन में क्वारंटीन (संगरोध) की प्रक्रिया अपनाकर किसान अपने अन्य पशुओं को संक्रमण से बचा सकते हैं. यह एक छोटा लेकिन बेहद जरूरी कदम है, जो आपके पूरे पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करता है.

नया पशु खरीदते समय क्यों जरूरी है सावधानी

जब कोई किसान नया पशु खरीदता है, तो वह बाहर के वातावरण से आता है. ऐसे में उसके शरीर में कुछ संक्रमण या बीमारी हो सकती है, जो तुरंत दिखाई भी नहीं देती. अगर ऐसे पशु को सीधे अन्य पशुओं के साथ मिला दिया जाए, तो बीमारी तेजी से फैल सकती है. पशुपालन विभाग (Department of Animal Husbandry) की माने तो, नया पशु खरीदने के बाद उसे कम से कम 28 दिनों तक अलग जगह पर रखना चाहिए. इस दौरान पशु के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जानी चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत ध्यान देना चाहिए.

क्वारंटीन (संगरोध) क्षेत्र का महत्व

नए पशु के लिए अलग क्वारंटीन क्षेत्र या शेड बनाना बेहद जरूरी होता है. यह स्थान मुख्य झुंड से अलग होना चाहिए ताकि किसी संभावित संक्रमण का खतरा कम हो सके. क्वारंटीन के दौरान पशु के खान-पान, व्यवहार और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखनी चाहिए.

अगर इस दौरान में पशु पूरी तरह स्वस्थ रहता है, तभी उसे अन्य पशुओं के साथ शामिल करना सुरक्षित माना जाता है. यह व्यवस्था पशुपालकों को संभावित बीमारियों की पहचान करने और समय रहते उपचार कराने में मदद करती है.

बीमार पशु को अलग रखना है जरूरी

अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत झुंड से अलग कर देना चाहिए. इसके लिए आइसोलेशन क्षेत्र का इस्तेमाल किया जाता है. बीमार पशु को अलग रखने से संक्रमण अन्य पशुओं तक फैलने से रुक जाता है. साथ ही उस पशु का सही तरीके से इलाज भी किया जा सकता है. यह कदम पूरे पशुधन को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है.

पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी

पशुपालन में किसी भी प्रकार का उपचार या दवा देने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लेना बेहद जरूरी है. उपचार, टीकाकरण, कीटाणुशोधन और चारा-आहार से जुड़ी सही जानकारी विशेषज्ञ ही दे सकते हैं. कई बार किसान बिना सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कर लेते हैं, जो पशु के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. नया पशु खरीदते समय थोड़ी सी सावधानी अपनाकर किसान अपने पूरे झुंड को बीमारियों से बचा सकते हैं.

28 दिन का क्वारंटीन, नियमित स्वास्थ्य निरीक्षण और पशु चिकित्सक की सलाह से पशुधन स्वस्थ रहता है और पशुपालन अधिक सुरक्षित व लाभदायक बन सकता है.

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