Rose Cultivation: प्यार का गुलाब या किसानों का सोना? जानें खेत से बाजार तक की पूरी कहानी
Valentine’s Day: वेलेंटाइन डे पर मिलने वाले गुलाब सिर्फ विदेशों से नहीं आते, बल्कि भारत के किसान ही इसकी बड़ी सप्लाई तैयार करते हैं. उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर गुलाब की खेती होती है. खास तकनीक, पॉलीहाउस और पहले से की गई प्लानिंग के जरिए किसान फरवरी तक गुलाब तैयार करते हैं.
Rose Cultivation India: वेलेंटाइन डे नजदीक आते ही बाजारों में लाल गुलाबों की भरमार दिखाई देने लगती है. 14 फरवरी के आसपास गुलाब सिर्फ एक फूल नहीं, बल्कि प्यार का सबसे मजबूत प्रतीक बन जाता है. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अचानक इतने सारे गुलाब आते कहां से हैं. क्या ये सभी विदेशों से आयात किए जाते हैं या भारत खुद गुलाब उत्पादन में आत्मनिर्भर है?
हकीकत यह है कि भारत गुलाब उत्पादन के मामले में काफी मजबूत देश है. वेलेंटाइन सीजन को देखते हुए देश के कई राज्यों में किसान महीनों पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं. खेतों में उगाए गए गुलाब एक तय योजना के तहत फूल मंडियों तक पहुंचते हैं और वहां से शहरों के फ्लावर शॉप्स तक भेजे जाते हैं. यह पूरा प्रोसेस एक मजबूत सप्लाई चेन के जरिए संचालित होता है.
किन राज्यों में होता है सबसे ज्यादा गुलाब उत्पादन?
भारत में गुलाब की खेती मुख्य रूप से उन राज्यों में होती है, जहां की जलवायु और मिट्टी फूलों के लिए अनुकूल मानी जाती है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु गुलाब उत्पादन में सबसे आगे हैं. उत्तर प्रदेश में हर साल 66 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गुलाब उगाए जाते हैं. कानपुर, लखनऊ, बागपत और आसपास के इलाके फ्लोरीकल्चर के बड़े केंद्र माने जाते हैं.
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वहीं तमिलनाडु में भी लगभग इतनी ही मात्रा में गुलाब का उत्पादन होता है. नीलगिरी और होसुर बेल्ट यहां फूलों की खेती के लिए खास तौर पर मशहूर हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात भी गुलाब उत्पादन में अहम भूमिका निभाते हैं. मध्य प्रदेश में करीब 43 हजार मीट्रिक टन, छत्तीसगढ़ में 42 हजार मीट्रिक टन और गुजरात में लगभग 41 हजार मीट्रिक टन गुलाब का उत्पादन दर्ज किया गया है.
दक्षिण और पहाड़ी राज्यों का भी योगदान
दक्षिण भारत में कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य भी गुलाब उत्पादन में योगदान देते हैं. कर्नाटक में लगभग 10 हजार मीट्रिक टन और तेलंगाना में 3 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गुलाब उगाए जाते हैं. वहीं उत्तराखंड और त्रिपुरा जैसे पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में छोटे स्तर पर गुलाब की खेती होती है, जो स्थानीय बाजारों की जरूरतें पूरी करती है.
वेलेंटाइन पर क्यों बढ़ जाती हैं गुलाब की कीमतें?
वेलेंटाइन डे के आसपास गुलाब की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिलता है. आम दिनों में जो गुलाब 5 से 10 रुपये में मिल जाता है, वही इस सीजन में 20 से 50 रुपये तक बिकता है. इसकी वजह सिर्फ बढ़ी हुई मांग नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स भी है. गुलाब बेहद नाजुक फूल होता है, जिसे सही तापमान और नमी में रखना जरूरी होता है.
पहले से होती है खास तैयारी
वेलेंटाइन सीजन को ध्यान में रखते हुए किसान पहले से प्लानिंग करते हैं. कुछ खास किस्म के गुलाब इस तरह उगाए जाते हैं कि फरवरी के पहले हफ्ते में वे पूरी तरह खिल जाएं. इसके लिए पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे तापमान को नियंत्रित किया जा सके.
आज गुलाब सिर्फ प्यार का प्रतीक नहीं, बल्कि किसानों के लिए एक बड़ा बिजनेस बन चुका है. शादी, पूजा, होटल और इवेंट इंडस्ट्री में भी इसकी भारी मांग रहती है. ऐसे में जब आप वेलेंटाइन डे पर गुलाब खरीदते हैं, तो उसके पीछे देश के हजारों किसानों की मेहनत और एक पूरी सप्लाई चेन छिपी होती है.