बारिश और ओलावृष्टि का नहीं हुआ असर.. देश में पिछले साल से ज्यादा गेहूं उत्पादन की उम्मीद
इस सीजन में करीब 6 लाख हेक्टेयर ज्यादा क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई, जिससे नुकसान कुछ हद तक पूरा हो सकता है. समय पर और जल्दी बुवाई होने से फसल को दाने भरने के समय तेज गर्मी के असर से भी बचाव मिला.
Wheat Production: इस साल देश में बंपर गेहूं उत्पादन की उम्मीद है. बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद पैदावार स्थिर बनी हुई है. रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (RFFI) ने अनुमान लगाया है कि 2025-26 में गेहूं उत्पादन करीब 1106.5 लाख टन रहेगा, जो 2024-25 के 1096.3 लाख टन से थोड़ा ज्यादा है, हालांकि इसमें हाल की मौसम से हुई क्षति को भी शामिल किया गया है.
सरकार के पहले अनुमान के मुताबिक, गेहूं उत्पादन 1202.1 लाख टन रहने की उम्मीद थी, जो पिछले साल के 1179.4 लाख टन से ज्यादा था. लेकिन उद्योग संगठन ने इसे करीब 1100 लाख टन बताया है. इस अंतर पर खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि असली उत्पादन 1100 से 1200 लाख टन के बीच रहने की संभावना है. कृषि मंत्रालय ने इस सीजन को ‘मिश्रित लेकिन मजबूत’ बताया है, जहां मौसम की चुनौतियों के बावजूद किसानों ने स्थिति संभाली. इस बार करीब 334 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई और किसी कीट या बीमारी की समस्या नहीं आई. समय पर बुवाई से रकबा भी बढ़ा.
फसल की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित हुई
हालांकि फरवरी में ज्यादा गर्मी पड़ने से फसल पर असर पड़ा, जिससे दाने भरने की प्रक्रिया कम समय में पूरी हुई और उत्पादन घटा. इसके अलावा पकने के समय बारिश और ओलावृष्टि से कुछ इलाकों में फसल की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित हुई. कृषि मंत्रालय ने कहा कि मौसम से हुए नुकसान की भरपाई कुछ सकारात्मक कारणों से हो सकती है. इस सीजन में करीब 6 लाख हेक्टेयर ज्यादा क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई, जिससे नुकसान कुछ हद तक पूरा हो सकता है. समय पर और जल्दी बुवाई होने से फसल को दाने भरने के समय तेज गर्मी के असर से भी बचाव मिला.
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किसान नई किस्मों के बीज अपना रहे हैं
मंत्रालय ने यह भी कहा कि अब किसान ज्यादा उपज देने वाली, मौसम के अनुकूल और बीमारियों से बचने वाली नई किस्मों के बीज अपना रहे हैं, जिससे उत्पादन को सहारा मिला है. इसके अलावा फसल के दौरान खरपतवार (घास-फूस) की समस्या भी कम रही. मंत्रालय का कहना है कि ज्यादा रकबा, समय पर बुवाई और बेहतर किस्मों के इस्तेमाल से मौसम की मार का असर काफी हद तक कम हो जाएगा और देश में गेहूं उत्पादन 2024-25 के मुकाबले स्थिर बना रहेगा.
हरियाणा में 56.13 लाख टन गेहूं की खरीद
गेहूं उत्पादक राज्यों के आंकड़े बताते हैं कि जमीन पर उत्पादन की स्थिति अच्छी बनी हुई है. हरियाणा में मंडियों में गेहूं की आवक सरकार के 75 लाख टन के लक्ष्य से आगे निकल चुकी है और अब तक 56.13 लाख टन खरीद हो चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 9 लाख टन ज्यादा है. मध्य प्रदेश ने भी ज्यादा उत्पादन को देखते हुए अपना खरीद लक्ष्य 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया है. वहीं महाराष्ट्र में 2025-26 के लिए गेहूं उत्पादन करीब 22.90 लाख टन रहने का अनुमान है और मराठवाड़ा व विदर्भ से लगातार आवक हो रही है. कृषि मंत्रालय ने फिर दोहराया कि कुछ जगहों पर मौसम का असर जरूर पड़ा है, लेकिन कुल मिलाकर ज्यादा बुवाई, बेहतर खेती के तरीके और उन्नत किस्मों के कारण देश में गेहूं उत्पादन स्थिर और मजबूत बना हुआ है.