16 जिलों में गौशालाएं बनाने के लिए राशि मंजूर, भूसा-चारा साईलेज के टेंडर फरवरी तक पूरे करने के निर्देश
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि तहसीलों की बंजर भूमि को चिन्हित कर नए गो आश्रय स्थलों को बनाया जाए. गोचर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए. इच्छुक पशुपालकों को क्षमता से अधिक गोवंश सुपुर्द करने एवं चारा-भूसा-साईलेज के टेंडर फरवरी तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.
योगी सरकार ने गौवंश संरक्षण के कार्यों में तेजी लाने के लिए जिला स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है. उत्तर प्रदेश सरकार ने छुट्टा गौवंश के संरक्षण के लिए 16 जिलों में नई गौशाला बनाने के लिए राशि को मंजूरी दे दी है. वहीं, पशुओं के लिए भसा, चारा और साइलेज समेत अन्य पशु कार्यों के टेंडर फरवरी तक पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं. सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों और जिलाधिकारियों के साथ ही कृषि विभाग को निर्देशित किया गया है कि समीक्षा कार्य पूरे कर रिपोर्ट शासन को सौंपी जाए.
7 हजार गौ संरक्षण केंद्रों में रह रहे 12 लाख पशु
उत्तर प्रदेश सरकार की पहल से राज्य में 7 हजार से अधिक गौ संरक्षण केंद्र संचालित हैं. इन केंद्रों पर पशुओं के लिए भूसा-चारा की व्यवस्था की गई है. ठंड से बचाने के लिए खास तौर पर पशुओं के लिए पौष्टिक चारा देने के निर्देश दिए गए हैं. इन संरक्षण केंद्रों में 12 लाख से ज्यादा पशुओं को रखकर उनकी देखरेख की जा रही है.
संरक्षण केंद्रों के लिए 56 करोड़ मंजूर, एक केंद्र में 400 पशु रहेंगे
उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ सप्ताह पहले राज्यभर में जिलावार नए गौ संरक्षण केंद्रों की स्थापना के निर्देश दिए थे, जिसके तहत अब फंड को मंजूरी दे दी गई है. शासन ने पहले चरण के तहत 56 करोड़ से अधिक की राशि को स्वीकृति दी है. इस राशि को नए गौ संरक्षण केंद्रों को स्थापित करने पर खर्च किया जाएगा. नए केंद्रों में कम से 400 मवेशियों को रखने की व्यवस्था की जाएगी.
इन जिलों में बनेंगे नए गौ संरक्षण केंद्र, चिकित्सा सुविधा भी होगी
नए गौ संरक्षण केंद्रों की स्थापना शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, अमेठी, देवरिया, गोरखपुर, रायबरेली, मथुरा, ललितपुर, अयोध्या, बाराबंकी, हापुड़, बुलंदशहर, झांसी और जालौन में की जाएगी. इन केंद्रों पर पशुओं के लिए चारी, पानी और टीनशेड के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं की की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार के इस फैसले से छुट्टा गायों की संख्या में कमी और किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद है.
गो आश्रय स्थलों में पशुओं के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त
वहीं, जिन जिलों में पहले संरक्षण केंद्र बने हुए हैं वहां के प्रशासनिक अधिकारियों को समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं. इसी क्रम में गाजियाबाद प्रशासन ने गौसंरक्षण की दिशा में तेज प्रयास शुरू कर दिए हैं. मुख्य विकास अधिकारी गाजियाबाद अभिनव गोपाल ने समीक्षा बैठक में कहा कि जनपद के समस्त गो आश्रय स्थलों में गोवंश को शीत से सुरक्षित रखने, नियमित हरा चारा, भूसा व दाना उपलब्ध कराने की समुचित व्यवस्था की जाए. सड़कों और खेतों में छुट्टा घूम रहे निराश्रित गोवंश को गो आश्रय स्थलों में संरक्षित किया जाए.
सीडीओ ने कहा कि तहसीलों की बंजर भूमि को चिन्हित कर नए गो आश्रय स्थलों को बनाया जाए.
गाय पालन, भूसा-चारा साइलेज के टेंडर फरवरी में होंगे
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि तहसीलों की बंजर भूमि को चिन्हत कर नए गो आश्रय स्थलों को बनाया जाए. गोचर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए. इच्छुक पशुपालकों को क्षमता से अधिक गोवंश सुपुर्द करने एवं चारा-भूसा-साईलेज के टेंडर फरवरी तक पूरा करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं. उन्होंने कहा कि गाय पालने वाले पशुपालकों को शासन स्तर से 1500 प्रति माह की सहायता दी जा रही है.