मछली पालन से ज्यादा मुनाफा देगा केकड़ा पालन, कम खर्च में शुरू करें यह शानदार व्यवसाय
केकड़े मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं समुद्री और मीठे पानी के. यहां हम मीठे पानी के केकड़ा पालन की बात कर रहे हैं, क्योंकि यह गांवों और खेतों में आसानी से किया जा सकता है. मीठे पानी के केकड़ों की बाजार में कीमत अक्सर समुद्री केकड़ों से तीन से चार गुना तक ज्यादा होती है.
Crab farming: आज के समय में खेती और पशुपालन के साथ-साथ जलीय जीवों का व्यवसाय भी तेजी से बढ़ रहा है. मछली पालन के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा, लेकिन केकड़ा पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो कम निवेश में अधिक मुनाफा देने की क्षमता रखता है. खास बात यह है कि इसमें जोखिम भी अपेक्षाकृत कम होता है और बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. होटल, रेस्टोरेंट और निर्यात बाजार में केकड़ों की अच्छी कीमत मिलती है, जिससे यह व्यवसाय किसानों और युवाओं के लिए आकर्षक विकल्प बन गया है.
मीठे पानी के केकड़े
केकड़े मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं समुद्री और मीठे पानी के. यहां हम मीठे पानी के केकड़ा पालन की बात कर रहे हैं, क्योंकि यह गांवों और खेतों में आसानी से किया जा सकता है. मीठे पानी के केकड़ों की बाजार में कीमत अक्सर समुद्री केकड़ों से तीन से चार गुना तक ज्यादा होती है. यही वजह है कि किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ तालाब बनाकर केकड़ा पालन की ओर रुख कर रहे हैं.
केकड़ा पालन शुरू करने के लिए खेत के एक हिस्से को छोटे-छोटे कृत्रिम तालाबों में बदला जा सकता है. जिनके पास जमीन कम है, वे सीमेंट के टैंक या प्लास्टिक लाइनिंग वाले गड्ढों में भी पालन कर सकते हैं. शुरुआत में केकड़ा बीज (सीड) को छोटे कंटेनरों में कुछ समय रखा जाता है, फिर उन्हें तैयार तालाब में छोड़ दिया जाता है. लगभग 9 से 10 महीनों में केकड़े पूरी तरह बाजार योग्य हो जाते हैं. हर महीने उनका वजन औसतन 25 से 50 ग्राम तक बढ़ता है.
सही चारा ही सफलता की कुंजी
केकड़ा पालन में सबसे अहम भूमिका उनके आहार की होती है. अक्सर नए लोग यही गलती कर बैठते हैं कि वे केकड़ों को मछलियों वाला चारा देने लगते हैं. ऐसा करने से केकड़ों की ग्रोथ, स्वाद और गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है.
केकड़ों को रोजाना ट्रैश मछली, उबला हुआ चिकन वेस्ट, सीपियों के टुकड़े या शेलफिश पाउडर दिया जाता है. यह प्राकृतिक आहार उनके वजन को 5 से 8 प्रतिशत तक तेजी से बढ़ाने में मदद करता है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि वजन बढ़ाने के लिए किसी भी तरह के केमिकल या दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इससे केकड़ों की गुणवत्ता गिर जाती है और बाजार में उनकी कीमत कम हो सकती है.
पानी की गुणवत्ता और देखभाल
केकड़ा पालन में पानी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. पानी का पीएच स्तर संतुलित होना चाहिए और उसमें पर्याप्त ऑक्सीजन होनी चाहिए. समय-समय पर पानी बदलना भी जरूरी है. गंदा या दूषित पानी केकड़ों में बीमारी फैला सकता है और भारी नुकसान का कारण बन सकता है.
तालाब या टैंक में केकड़ों को अलग-अलग रखने के लिए बांस या जाली के डिवाइडर लगाए जाते हैं. इससे वे एक-दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचाते. केकड़े स्वभाव से थोड़े आक्रामक होते हैं, इसलिए जगह का सही प्रबंधन जरूरी है.
भारत में लोकप्रिय प्रजातियां
भारत में सबसे अधिक मड क्रैब यानी दलदली केकड़े का पालन किया जाता है. इसकी मांग देश और विदेश दोनों जगह है. इसके अलावा ब्लू स्विमिंग क्रैब और ग्रीन क्रैब की भी अच्छी मांग है. ग्रीन क्रैब का मांस नरम और स्वादिष्ट माना जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत ज्यादा मिलती है.
कम लागत, ज्यादा आमदनी
केकड़ा पालन की खास बात यह है कि इसमें बहुत ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती. तालाब या टैंक की व्यवस्था, बीज की खरीद और चारे की लागत मिलाकर भी यह व्यवसाय छोटे स्तर पर शुरू किया जा सकता है. बाजार में केकड़ों की कीमत उनके आकार के अनुसार 800 से 1500 रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है. यदि सही तकनीक, संतुलित आहार और पानी की देखभाल की जाए तो सालाना लाखों रुपये की कमाई संभव है.