दूध निकालते समय रहें सावधान! ये छोटी गलती कर सकती है पूरे डेयरी को बर्बाद, जानें बचाव टिप्स
Animal Husbandry: थनैला (मास्टाइटिस) डेयरी पशुओं में होने वाली एक आम संक्रमणजनित बीमारी है, जो थनों में सूजन पैदा कर दूध की गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित करती है. इससे बचाव के लिए दूध निकालने के बाद थनों को एंटीसेप्टिक घोल से साफ करना, पशु को 20-30 मिनट तक खड़ा रखना और पशुशाला की पूरी सफाई बनाए रखना जरूरी है.
Dairy Farming: डेयरी पशुपालन में अच्छी कमाई का सबसे बड़ा आधार है स्वच्छ और गुणवत्ता वाला दूध उत्पादन. लेकिन कई बार पशुओं में होने वाली बीमारियां इस उत्पादन को प्रभावित कर देती हैं. ऐसी ही एक आम और खतरनाक समस्या है थनैला (मास्टाइटिस), जो न केवल दूध की गुणवत्ता घटाती है बल्कि पशु के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग बिहार के अनुसार, अगर समय रहते सही सावधानियां अपनाई जाएं, तो इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है.
क्या है थनैला और क्यों है खतरनाक?
थनैला एक संक्रमणजनित बीमारी है, जो पशु के थनों (उदर) में सूजन और संक्रमण पैदा करती है. इससे दूध में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, जिससे दूध की गुणवत्ता खराब हो जाती है और उत्पादन भी कम हो जाता है. लंबे समय तक इसका असर रहने पर पशु की दुग्ध क्षमता पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है. दूध निकालने के तुरंत बाद थनों की सफाई और सुरक्षा बेहद जरूरी होती है. इसके लिए थनों को एंटीसेप्टिक घोल जैसे आयोडीन या अन्य उपयुक्त दवा में डुबोना चाहिए. इससे थनों के खुले छिद्रों में बैक्टीरिया प्रवेश नहीं कर पाते और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.
दूध निकालने के बाद पशु को बैठने न दें
विभाग के अनुसार, एक और महत्वपूर्ण उपाय यह है कि दूध निकालने के तुरंत बाद पशु को 20-30 मिनट तक बैठने न दिया जाए. इस दौरान पशु को चारा देना चाहिए ताकि वह खड़ा रहे. ऐसा करने से थनों के छिद्र जल्दी बंद हो जाते हैं और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.
थनैला से बचाव में साफ-सफाई की बड़ी भूमिका होती है. पशुशाला को हमेशा साफ रखें, बिछावन सूखा रखें और दूध निकालने से पहले व बाद में हाथों और उपकरणों को अच्छी तरह साफ करें. गंदगी और नमी बैक्टीरिया के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण होती है.
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— Dairy, Fisheries and Animal Resources Dept., Bihar (@BiharAFRD) April 29, 2026
बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी है जागरूकता
अगर किसान इन छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी उपायों को अपनाते हैं, तो वे न केवल अपने पशुओं को स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार कर सकते हैं. यह सीधे तौर पर उनकी आय बढ़ाने में मदद करता है.
थनैला जैसी बीमारी से बचाव मुश्किल नहीं है, बस सही समय पर सही कदम उठाने की जरूरत होती है. दूध निकालने के बाद की सावधानियां, साफ-सफाई और पशु की देखभाल पर ध्यान देकर इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है. जागरूक किसान ही बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.