तालाब की हर मछली होगी मोटी-तगड़ी, बस बदल दें ये आदतें और देखें कमाई में जबरदस्त उछाल

अगर आप चाहते हैं कि मछलियों का वजन जल्दी बढ़े और आकार अच्छा बने, तो सबसे पहले प्रजाति के चुनाव पर ध्यान देना जरूरी है. कुछ मछलियां स्वाभाविक रूप से तेजी से बढ़ती हैं. जैसे कैटफिश, तिलापिया और रोहू-कटला जैसी प्रजातियां कम समय में अच्छा वजन पकड़ लेती हैं.

नई दिल्ली | Published: 30 Jan, 2026 | 08:07 AM

Fish farming: यह बात अब किसी से छिपी नहीं है कि मछली पालन आज के समय में किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनता जा रहा है. पहले जहां इसे एक सीमित काम माना जाता था, वहीं अब आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और बाजार की बढ़ती मांग ने मछली पालन को फायदे का व्यवसाय बना दिया है. अगर मछलियों का वजन और आकार तेजी से बढ़े, तो कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है. लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. थोड़ी सी लापरवाही मछलियों की बढ़त रोक सकती है और नुकसान भी करा सकती है.

मछली पालन क्यों बन रहा है कमाई का भरोसेमंद जरिया

देश में प्रोटीन की मांग लगातार बढ़ रही है और मछली को सेहत के लिहाज से बेहद फायदेमंद माना जाता है. यही वजह है कि बाजार में मछली की कीमतें अच्छी मिलती हैं. खास बात यह है कि मछली पालन के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती. छोटे तालाब, खेत के कोने या सामूहिक तालाब में भी यह काम किया जा सकता है. सरकार भी तालाब खुदवाने, बीज डालने और चारा खरीदने पर सब्सिडी दे रही है, जिससे शुरुआती लागत कम हो जाती है. लेकिन मुनाफा तभी बढ़ता है जब मछलियों की सही देखभाल की जाए.

सही प्रजाति का चुनाव सबसे पहली शर्त

अगर आप चाहते हैं कि मछलियों का वजन जल्दी बढ़े और आकार अच्छा बने, तो सबसे पहले प्रजाति के चुनाव पर ध्यान देना जरूरी है. कुछ मछलियां स्वाभाविक रूप से तेजी से बढ़ती हैं. जैसे कैटफिश, तिलापिया और रोहू-कटला जैसी प्रजातियां कम समय में अच्छा वजन पकड़ लेती हैं. ये मछलियां बाजार में आसानी से बिक जाती हैं और इनकी मांग भी लगातार बनी रहती है. गलत प्रजाति चुनने पर चाहे आप कितना भी खर्च कर लें, फायदा सीमित ही रहेगा.

साफ पानी और सही माहौल है बेहद जरूरी

मछलियों के अच्छे विकास के लिए पानी की गुणवत्ता सबसे अहम होती है. गंदा या बदबूदार पानी मछलियों को बीमार कर देता है, जिससे उनका वजन बढ़ने की बजाय घटने लगता है. तालाब का पानी साफ, ऑक्सीजन युक्त और ज्यादा गर्म या ठंडा नहीं होना चाहिए. समय-समय पर पानी की जांच और जरूरत पड़ने पर आंशिक पानी बदलना फायदेमंद रहता है. साथ ही, तालाब के आसपास शांति भी जरूरी है. ज्यादा शोर, कंपन या लगातार हलचल से मछलियां तनाव में आ जाती हैं और ठीक से खाना नहीं खा पातीं.

चारे की गुणवत्ता से तय होता है मुनाफा

मछली का वजन बढ़ाने में चारे की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है. हर प्रजाति की मछली का खान-पान अलग होता है. अगर मछलियों को उनकी जरूरत के मुताबिक पौष्टिक चारा दिया जाए, तो उनका विकास तेजी से होता है. सस्ता लेकिन कमजोर चारा देने से मछलियां पेट तो भर लेती हैं, लेकिन वजन नहीं बढ़ता. संतुलित प्रोटीन, मिनरल और ऊर्जा वाला चारा मछलियों को मजबूत बनाता है और बीमारियों से भी बचाता है.

शिकारियों से सुरक्षा भी है जरूरी

तालाब में पाली जा रही मछलियों के दुश्मन भी होते हैं. पक्षी, सांप या अन्य जंगली जानवर मछलियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे मछलियां डर जाती हैं और लगातार तनाव में रहती हैं. डर की वजह से उनका खाना कम हो जाता है और वजन बढ़ना रुक जाता है. इसलिए तालाब के चारों ओर जाल, बाड़ या अन्य सुरक्षा उपाय करना जरूरी होता है, ताकि मछलियां सुरक्षित माहौल में बढ़ सकें.

समय पर हार्वेस्टिंग से बढ़ता है उत्पादन

मछली पालन में समय पर हार्वेस्टिंग यानी तैयार मछलियों को निकालना भी बेहद जरूरी है. अगर बड़ी मछलियां ज्यादा समय तक तालाब में रहती हैं, तो छोटी मछलियों को जगह और भोजन कम मिलने लगता है. इससे उनका विकास धीमा पड़ जाता है. सही समय पर बड़ी मछलियों को निकाल लेने से छोटी मछलियों को बेहतर माहौल मिलता है और उनका वजन तेजी से बढ़ता है. साथ ही, तालाब में मछलियों की संख्या संतुलित बनी रहती है.

थोड़ी समझदारी से बन सकते हैं मालामाल

कुल मिलाकर मछली पालन में सफलता किसी एक चीज पर नहीं, बल्कि कई छोटे-छोटे फैसलों पर निर्भर करती है. सही प्रजाति, साफ पानी, अच्छा चारा, सुरक्षित माहौल और समय पर हार्वेस्टिंग, ये सभी मिलकर मछलियों का वजन और आकार बढ़ाते हैं. अगर मछली पालक इन बातों को गंभीरता से अपनाएं, तो कम समय में अच्छी आमदनी हो सकती है और मछली पालन सच में मालामाल करने वाला व्यवसाय बन सकता है.

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