हरे चारे की टेंशन खत्म, इस आसान तकनीक से गाय-भैंस को सालभर मिलता रहेगा पौष्टिक आहार

पशुपालकों के लिए साइलेंज और हे तकनीक हरे चारे की कमी दूर करने का आसान उपाय बन रही है. इससे गाय-भैंस को सालभर पौष्टिक आहार मिलता है, दूध उत्पादन बेहतर रहता है और डेयरी की लागत भी नियंत्रित होती है. सही स्टोरेज तकनीक अपनाकर कम खर्च में ज्यादा मुनाफा पाया जा सकता है.

नई दिल्ली | Updated On: 15 Apr, 2026 | 08:53 PM

Silage Making: डेयरी कारोबार में सबसे बड़ी चिंता रहती है कि गाय-भैंस के लिए सालभर हरा और पौष्टिक चारा कैसे मिले? बारिश, गर्मी या सूखे के मौसम में यही समस्या पशुपालकों की लागत बढ़ा देती है और दूध उत्पादन पर भी सीधा असर डालती है. लेकिन अब इसका आसान और असरदार हल है साइलेंज (Silage) और हे (Hay). पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, अगर पशुपालक सही समय पर हरे चारे को स्टोर कर लें, तो पूरे साल पशुओं को पौष्टिक आहार मिलता रहेगा. इससे न सिर्फ चारे की कमी दूर होगी, बल्कि दूध उत्पादन, पशुओं का स्वास्थ्य और डेयरी से होने वाली कमाई भी बेहतर होगी.

साइलेंज क्या है और क्यों है डेयरी के लिए जरूरी?

कुंवर घनश्याम के अनुसार साइलेंज हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे  भरोसेमंद तरीका है. इसमें मक्का, ज्वार, बाजरा या नेपियर जैसे हरे चारे को फर्मेंटेशन प्रक्रिया से स्टोर किया जाता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि चारे की पौष्टिकता काफी हद तक बनी रहती है. ऑफ-सीजन, गर्मी या सूखे के समय भी पशुओं को हरा चारा जैसा पोषण मिलता रहता है. डेयरी में यह तकनीक खास इसलिए जरूरी है क्योंकि संतुलित पोषण मिलने से गाय-भैंस स्वस्थ रहती हैं और दूध उत्पादन लगातार अच्छा बना रहता है.

साइलेंज बनाने का आसान तरीका

विशेषज्ञ के अनुसार साइलेंज बनाने के लिए चारे  की कटाई सही समय पर करनी चाहिए. चारा न बहुत कच्चा हो और न बहुत ज्यादा पका. मध्यम अवस्था में कटाई सबसे बेहतर रहती है. कटाई के बाद चारे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. फिर इसे साइलो पिट, टैंक या प्लास्टिक बैग में परत-दर-परत भरें और हर परत को अच्छी तरह दबाएं, ताकि हवा अंदर न रहे. अंत में इसे प्लास्टिक शीट या मिट्टी से पूरी तरह ढक दें. लगभग 40 से 50 दिन बाद साइलेंज तैयार हो जाता है. इसका रंग हल्का हरा या पीला और खुशबू हल्की खट्टी होती है, जो इसकी अच्छी क्वालिटी का संकेत है.

हे (Hay) बनाने की आसान तकनीक

हे बनाने की प्रक्रिया साइलेंज से अलग है. इसमें हरे चारे को पूरी तरह सुखाकर  लंबे समय तक स्टोर किया जाता है. पतले तने वाली घास, बरसीम या सूखी फसलें इसके लिए बेहतर मानी जाती हैं. कुंवर घनश्याम के अनुसार कटाई के बाद चारे को जमीन पर सीधे फैलाने के बजाय ऊंची जाली, तिरपाल या साफ फर्श पर सुखाना चाहिए. इससे मिट्टी और फंगस का खतरा कम रहता है. जब चारे में नमी 15-18 प्रतिशत तक रह जाए, तब इसे बंडल बनाकर सूखी और हवादार जगह पर रख दें. यह तरीका छोटे पशुपालकों के लिए काफी आसान और कम खर्च वाला है.

सालभर चारा, ज्यादा दूध और कम लागत

साइलेंज और हे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पशुपालकों को सालभर हरे चारे की चिंता नहीं रहती. सूखे मौसम में भी पशुओं को पौष्टिक आहार मिलता  है, जिससे दूध उत्पादन में गिरावट नहीं आती. विशेषज्ञ बताते हैं कि सही तरीके से तैयार किया गया चारा पशुओं को कमजोर होने, पाचन खराब होने और कई बीमारियों से भी बचाता है. इसके साथ ही बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत कम हो जाती है, जिससे डेयरी की लागत नियंत्रित रहती है.

Published: 15 Apr, 2026 | 11:30 PM

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