अचानक मरने लगें मुर्गियां तो तुरंत संभलें, बर्ड फ्लू से बचाव के जरूरी उपाय जान लें आज ही

बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मुर्गीपालकों को बर्ड फ्लू से बचाव के लिए जरूरी सलाह दी है. मुर्गियों के संपर्क के बाद हाथ धोना, बीमार मुर्गियों को अलग रखना और मरी हुई मुर्गियों को सही तरीके से दबाना जरूरी है. सावधानी अपनाने से मुर्गियों को सुरक्षित रखा जा सकता है और नुकसान कम होता है.

नोएडा | Published: 5 Mar, 2026 | 02:59 PM

Poultry Farming: मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए बर्ड फ्लू एक बड़ी चिंता बन सकता है. यह बीमारी तेजी से फैलती है और थोड़ी सी लापरवाही से भारी नुकसान हो सकता है. कई बार अचानक मुर्गियों की मौत होने लगती है और पूरा पोल्ट्री फार्म प्रभावित हो जाता है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार अगर मुर्गीपालक कुछ आसान सावधानियां अपनाएं तो बर्ड फ्लू के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. सही जानकारी और समय पर कदम उठाने से मुर्गियों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

सफाई रखना है सबसे जरूरी

पशुपालन निदेशालय के अनुसार मुर्गीपालन में साफ-सफाई बहुत जरूरी है. मुर्गियों के संपर्क  में आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए. मुर्गियों के पंख या बीट को छूने के बाद हाथ साफ करना जरूरी होता है क्योंकि संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. अगर सफाई का ध्यान नहीं रखा जाए तो बीमारी जल्दी फैल सकती है. मुर्गीपालकों को रोजाना अपने पोल्ट्री फार्म  की सफाई करनी चाहिए ताकि बीमारी का खतरा कम रहे.

बीमार मुर्गियों को अलग रखें

विभाग का कहना है कि अगर किसी मुर्गी में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अलग कर देना चाहिए. बीमार मुर्गियों को स्वस्थ मुर्गियों के साथ रखने से बीमारी तेजी से फैल सकती है. अगर मुर्गियां अचानक सुस्त हो जाएं, खाना कम खाएं या मरने लगें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे समय पर सावधानी बरतना बहुत जरूरी होता है. बीमार मुर्गियों को अलग रखने से बाकी मुर्गियों को बचाया जा सकता है.

मुर्गीपालक सावधानी से बर्ड फ्लू से बच सकते.

समय पर दें जानकारी

पशुपालन विभाग के अनुसार अगर मुर्गियों में असामान्य बीमारी या अचानक मौत होने लगे तो तुरंत पशु चिकित्सालय को जानकारी देनी चाहिए. कई बार किसान बीमारी को छिपा लेते हैं या देर से बताते हैं, जिससे नुकसान ज्यादा हो जाता है. समय पर सूचना देने से बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है. पशु चिकित्सक सही जांच करके इलाज की सलाह दे सकते हैं और जरूरी कदम उठा सकते हैं.

मरी हुई मुर्गियों को खुले में न फेंके

विभाग ने मुर्गीपालकों को खास चेतावनी दी है कि मरी हुई मुर्गियों को कभी भी खुले में नहीं फेंकना चाहिए. ऐसा करने से बीमारी फैलने का खतरा  बढ़ जाता है. मरी हुई मुर्गियों को गहरे गड्ढे में दबाना चाहिए और उसमें चूना डालकर मिट्टी से ढंक देना चाहिए. इससे संक्रमण फैलने की संभावना कम हो जाती है. सही तरीके से मुर्गियों को दबाने से आसपास के पशु और पक्षी भी सुरक्षित रहते हैं.

सावधानी से बच सकता है नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी से मुर्गीपालक बड़े नुकसान से बच सकते हैं. अगर किसान नियमित रूप से मुर्गियों की जांच करें और साफ-सफाई रखें तो बीमारी का खतरा कम हो सकता है. स्वस्थ मुर्गियां ही अच्छी कमाई का आधार बनती हैं. इसलिए मुर्गीपालकों को लापरवाही नहीं करनी चाहिए. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग का कहना है कि मुर्गीपालक अगर इन आसान उपायों को अपनाएं तो बर्ड फ्लू से बचाव किया जा सकता है. सही जानकारी और समय पर सावधानी ही मुर्गीपालन को सुरक्षित बना सकती है.

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