IVF का कमाल- हिमाचल में तकनीक की मदद से जर्सी गाय से तीन उन्नत नस्ल के बछड़ों का जन्म

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित बनूरी IVF लैब ने एक जर्सी गाय से एक साल में तीन उच्च जेनेटिक बछड़े पैदा कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस तकनीक से दूध उत्पादन, नस्ल सुधार और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

नोएडा | Updated On: 25 Feb, 2026 | 05:50 PM

Himachal Pradesh Animal Husbandry: हिमाचल प्रदेश ने पशुपालन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पालमपुर के बनूरी स्थित राज्य की पहली IVF लैब ने एक साल में एक उत्कृष्ट जर्सी गाय से उच्च नस्ल के तीन बछड़ों को जन्म दिलाया है. पशुपालन विभाग को उम्मीद है कि IVF लैब की इस सफलता से प्रदेश में पशुपालन सेक्टर में क्रांति आएगी. इससे ज्यादा दूध देने वाली नस्लों की संख्या में बढ़ोतरी होगी. इससे हिमाचल में दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की कमाई में बढ़ोतरी होगी. खास बात यह है कि यह लैब पशुपालन विभाग के तहत खोला गया है और इसे केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा हिमाचल प्रदेश लाइवस्टॉक एंड पोल्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है. इस सुविधा का उद्घाटन जनवरी 2025 में कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने किया था.

आईवीएफ प्रक्रिया में उच्च नस्ल की MSP (मिनिमम स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल) जर्सी गायों से अल्ट्रासाउंड  की मदद से अंडाणु (एग सेल) निकाले जाते हैं. फिर इन अंडाणुओं को प्रयोगशाला में परिपक्व किया जाता है और बेहतर नस्ल के सांडों के वीर्य से निषेचित (फर्टिलाइज) किया जाता है. इसके बाद तैयार भ्रूण को नियंत्रित लैब वातावरण में विकसित किया जाता है और फिर स्वस्थ सरोगेट गायों में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है.

दूध उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

आईवीएफ तकनीक से पैदा होने वाले बछड़े अपनी उत्कृष्ट डोनर गाय के बेहतर जेनेटिक गुणों को विरासत में लेते हैं. इससे अच्छी नस्ल के डेयरी पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ाई जा सकती है. इस तकनीक के फायदे हैं. उत्तम नस्ल का तेजी से विस्तार, श्रेष्ठ नस्लों का संरक्षण, जेनेटिक सुधार में तेजी,  दूध उत्पादन में बढ़ोतरी और पशुपालकों की आय में इजाफा.

पालमपुर के संयुक्त निदेशक (पशुपालन) डॉ. अजय चौधरी के मुताबिक, लैब की स्थापना के बाद से उल्लेखनीय प्रगति हुई है. अब तक करीब 45 जर्सी और जर्सी-क्रॉसब्रेड भ्रूणों को जर्सी कैटल ब्रीडिंग फार्म और किसानों के यहां सरोगेट पशुओं में ट्रांसफर किया जा चुका है. अब तक के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं. फील्ड के पशुओं में 10 गर्भधारण की पुष्टि हुई है, जबकि फार्म में जर्सी भ्रूण से छह और जर्सी क्रॉसब्रेड भ्रूण से दो गर्भधारण सफल रहे हैं.

उच्च जेनेटिक गुणवत्ता वाले बछड़े पैदा हुए हैं

आईवीएफ और सरोगेसी तकनीक के जरिए एक ही उत्कृष्ट जर्सी गाय से एक साल के भीतर तीन उच्च जेनेटिक गुणवत्ता वाले बछड़े पैदा हुए हैं. राजपुर में डॉ. राजीव फुल के फार्म पर एक जर्सी MSP नर बछड़ा जन्मा. उसी डोनर गाय से एक मादा बछड़ी जर्सी कैटल ब्रीडिंग फार्म, पालमपुर में पैदा हुई, जबकि एक और नर बछड़ा कंदबाड़ी में सरदार सिंह की सरोगेट गाय से जन्मा. यह उपलब्धि दिखाती है कि आईवीएफ तकनीक से कम समय में एक श्रेष्ठ गाय से कई संतानें प्राप्त की जा सकती हैं, जिससे डेयरी पशुओं में तेजी से जेनेटिक सुधार संभव है.

सरकार देती है 60 फीसदी सब्सिडी

हिमाचल प्रदेश में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है. यहां मवेशी, भेड़ और बकरी पालन  लोगों का प्रमुख व्यवसाय है. सरकार 60 फीसदी सब्सिडी वाली बकरी पालन योजना, हिम कुक्कुट पालन और पशु मित्र जैसी योजनाओं के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है. इन योजनाओं से दूध और मांस उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो रही है. राज्य में गद्दी और कश्मीरी नस्ल की भेड़-बकरियां विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं.

पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए चल रहीं कई योजनाएं

बता दें कि हिमाचल प्रदेश सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. कृषक बकरी पालन योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 11 बकरियों (10 मादा और 1 नर) की इकाई पर 60 फीसदी सब्सिडी दी जाती है. पशुधन जनगणना 2019 के अनुसार राज्य में करीब 44.13 लाख पशुधन हैं, जिनमें 18.28 लाख मवेशी और 6.47 लाख भैंसें शामिल हैं. पशु मित्र योजना के तहत 500 पशु मित्रों की भर्ती की गई है, जो गांवों में पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान की सेवाएं देंगे.

Published: 25 Feb, 2026 | 04:51 PM

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