बरसात में पशुओं पर मौत का खतरा! घुर-घुर और चर-चर की आवाज सुनते ही हो जाएं सतर्क

बरसात के मौसम में गलघोंटू और लंगड़ी बुखार जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई, संतुलित आहार और शुरुआती लक्षणों की पहचान से मवेशियों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

नोएडा | Published: 18 Jul, 2026 | 05:34 PM

Monsoon Livestock Care: बरसात का मौसम जहां खेतों में हरियाली और किसानों के चेहरों पर मुस्कान लेकर आता है, वहीं पशुपालकों के लिए कई गंभीर चुनौतियां भी साथ लाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, इस मौसम में नमी, कीचड़ और दूषित पानी के कारण मवेशियों में गलघोंटू (हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया) और लंगड़ी बुखार (ब्लैक क्वार्टर) जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. यदि समय पर पहचान, इलाज और टीकाकरण नहीं कराया जाए तो ये संक्रमण 24 से 48 घंटे के भीतर पशु की जान भी ले सकते हैं. इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान के साथ दूध उत्पादन में भी भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है.

घुर-घुर और चर-चर की आवाज को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) बताते हैं कि गलघोंटू रोग  में पशु को तेज बुखार आता है, मुंह से लगातार लार गिरती है और गले में सूजन के कारण सांस लेने में परेशानी होती है. इस दौरान पशु के गले से ‘घुर-घुर’ जैसी आवाज सुनाई देना गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है. वहीं लंगड़ी बुखार में पशु के पैरों या पुट्ठों में दर्दनाक सूजन आ जाती है. सूजन वाली जगह दबाने पर ‘चर-चर’ जैसी आवाज सुनाई देती है और पशु लंगड़ाकर चलने लगता है. यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए पशु को अन्य मवेशियों से अलग करें और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

टीकाकरण और साफ-सफाई ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात शुरू होने से पहले  गलघोंटू और लंगड़ी बुखार की कंबाइंड वैक्सीन लगवाना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है. इसके अलावा पशुओं के बाड़े को हमेशा साफ, सूखा और हवादार रखना चाहिए ताकि बैक्टीरिया पनपने का मौका न मिले. पशुओं को केवल स्वच्छ और ताजा पानी ही पिलाएं तथा गड्ढों या दूषित जल स्रोतों का पानी पीने से बचाएं. मक्खियों और मच्छरों से बचाव के लिए नियमित रूप से कीट नियंत्रण के उपाय अपनाएं. यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखें तो उसे तुरंत अलग रखें, ताकि संक्रमण दूसरे पशुओं में न फैले.

संतुलित आहार से रहेगा दूध उत्पादन बेहतर

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) का कहना है कि बरसात के मौसम में केवल हरा चारा खिलाना  पर्याप्त नहीं होता. पशुओं को हरे और सूखे चारे का संतुलित मिश्रण, संतुलित पशु आहार और प्रतिदिन आवश्यक मात्रा में मिनरल मिक्सचर देना चाहिए. दूध निकालने के बाद थनों की अच्छी तरह सफाई करना भी जरूरी है, ताकि संक्रमण से बचाव हो सके. विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर टीकाकरण, संतुलित पोषण, साफ-सफाई और नियमित स्वास्थ्य जांच अपनाकर पशुपालक मॉनसून में अपने मवेशियों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं. इससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि दूध उत्पादन और पशुपालन से होने वाली आय भी प्रभावित नहीं होगी.

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