बारिश में पशुओं की बढ़ी मुसीबत! बुखार से मुंह खोलकर सांस लेने तक ये संकेत खतरनाक

बारिश और मौसम में बदलाव के बीच गाय-भैंस की सेहत को लेकर पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत है. सर्दी-जुकाम, बुखार, नाक से स्राव और तेज सांस जैसे लक्षण निमोनिया के संकेत हो सकते हैं. समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है.

नोएडा | Updated On: 15 Aug, 2026 | 07:29 PM

Animal Husbandry: बारिश के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव और लगातार नमी के कारण गाय-भैंस समेत अन्य पशुओं की सेहत पर असर पड़ सकता है. इस मौसम में पशुओं में सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. पशु चिकित्सक घनश्याम कुंवर के अनुसार, शुरुआत में दिखाई देने वाले सामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करना पशुपालकों के लिए भारी पड़ सकता है. समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर सांस से जुड़ी बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. इसलिए बारिश के दिनों में पशुओं की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है.

सर्दी-जुकाम से शुरू होती है परेशानी

पशु चिकित्सक घनश्याम कुंवर के अनुसार, बारिश और मौसम  में अचानक बदलाव के दौरान पशुओं में सबसे पहले सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. पशु को बुखार आना, नाक से पानी निकलना या चिपचिपा स्राव आना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं. कई बार पशु सुस्त रहने लगता है और उसके चारे की खपत भी कम हो जाती है. ऐसे लक्षण दिखने पर पशुपालकों को इसे सामान्य समस्या मानकर छोड़ना नहीं चाहिए. शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से उपचार आसान रहता है. वहीं, लापरवाही बरतने पर संक्रमण बढ़ सकता है और पशु की सांस लेने की क्षमता प्रभावित होने लगती है.

मुंह खोलकर सांस लेना गंभीर संकेत

अगर पशु को सांस लेने में परेशानी हो रही है, वह सामान्य से तेज सांस ले रहा है या बार-बार मुंह खोलकर सांस  ले रहा है तो इसे गंभीर संकेत माना जाना चाहिए. ऐसे लक्षण निमोनिया या अन्य गंभीर श्वसन संबंधी संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं. पशु चिकित्सक के अनुसार, ऐसी स्थिति में पशुपालकों को घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं रहना चाहिए. बीमारी की गंभीरता को देखते हुए पशु चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

समय पर इलाज नहीं मिला तो बढ़ सकता है खतरा

बारिश के मौसम में पशुओं को ठंड, नमी और गीली जमीन से बचाना बेहद जरूरी है. श्वसन संबंधी संक्रमण बढ़ने पर पशु की हालत तेजी से बिगड़ सकती है. गंभीर संक्रमण की स्थिति में जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए पशु में बुखार, नाक से स्राव, तेज सांस या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें. पशुपालकों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के दवाइयां देने से भी बचना चाहिए. गलत दवा या गलत मात्रा पशु की सेहत को और नुकसान पहुंचा सकती है.

सूखी जगह रखें, गलघोंटू का टीका भी जरूरी

पशु चिकित्सक घनश्याम कुंवर के अनुसार, बारिश के दौरान पशुओं  को भीगने से बचाना चाहिए. पशुओं को साफ और सूखी जगह पर रखें तथा ठंडी हवा से बचाव की व्यवस्था करें. पशुओं के बैठने की जगह पर पानी जमा न होने दें और नियमित रूप से साफ-सफाई करते रहें. इसके साथ ही पशुओं के जरूरी टीकाकरण को समय पर करवाना बेहद महत्वपूर्ण है. विशेष रूप से गलघोंटू जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीका लगवाएं. यदि पशु में बीमारी के गंभीर लक्षण दिखाई दें तो पशु चिकित्सा सहायता प्राप्त कर सकते हैं. समय पर सावधानी और उपचार से पशुओं को गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है.

Published: 15 Aug, 2026 | 11:29 PM

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