पशुओं को भूलकर भी न खिलाएं बचा खाना, अफरा से हो सकती है मौत.. हार्ट-लंग्स फेल होने का भी खतरा

पशुओं को बचा हुआ भोजन देना उनकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. गलत आहार से अफरा (ब्लोटिंग) जैसी गंभीर समस्या पैदा होती है, जिसमें पेट फूलने के साथ सांस और हृदय पर असर पड़ता है. समय पर ध्यान न देने पर पशुओं की जान भी जा सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है.

नोएडा | Published: 5 Jul, 2026 | 12:00 PM

Cattle Care Tips: पशुपालकों की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि वे घर में बचा हुआ खाना सोच-समझकर नहीं बल्कि आदत में पशुओं को खिला देते हैं. शादी-ब्याह या बड़े आयोजनों के बाद बचा हुआ मीठा सिरप, मैदा या अन्य भारी खाद्य पदार्थ गाय और भैंस जैसे पशुओं को देना आम बात बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही कई बार पशुओं की जान पर भारी पड़ जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी गलतियां पशुओं में गंभीर पेट संबंधी बीमारी पैदा कर सकती हैं, जो सीधे उनके दिल और फेफड़ों को प्रभावित करती है.

क्या है अफरा (ब्लोटिंग) की समस्या?

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, जब पशुओं को भारी, मीठा या अनपचने वाला भोजन दिया जाता है, तो उनके पेट में गैस बननी  शुरू हो जाती है. इस स्थिति को अफरा या ब्लोटिंग कहा जाता है. इसमें पशु का पेट तेजी से फूलने लगता है और अंदरूनी दबाव बढ़ जाता है. यह दबाव धीरे-धीरे सांस लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है और पशु को गंभीर तकलीफ होने लगती है. यह स्थिति इतनी खतरनाक होती है कि समय पर इलाज न मिलने पर पशु की हालत तेजी से बिगड़ सकती है. कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होती है.

बचा हुआ खाना क्यों बनता है खतरा?

विशेषज्ञ बताते हैं कि शादी-ब्याह या अन्य कार्यक्रमों के बाद बचा हुआ मीठा सिरप, रसगुल्ले का शरबत, मैदा या भारी भोजन पशुओं के लिए बिल्कुल सही  नहीं होता. ये पदार्थ उनके पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं और पेट में जाकर गैस बनने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं. इसके कारण नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे सांस नली, दिल और फेफड़ों पर असर पड़ता है. पशु ठीक से सांस नहीं ले पाते और उनकी हालत गंभीर हो जाती है. कई बार यह स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ती है कि इलाज के बावजूद पशु को बचाना मुश्किल हो जाता है.

इलाज से ज्यादा जरूरी है बचाव

पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस बीमारी में इलाज अक्सर जटिल और जोखिम  भरा होता है. पेट में जमा गैस को निकालने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो पशु के लिए भी तनावपूर्ण होती है. कई बार पशु इस प्रक्रिया को सहन नहीं कर पाते और स्थिति गंभीर हो जाती है. इसलिए सबसे जरूरी है कि पशुपालक ऐसी स्थिति बनने ही न दें. बचा हुआ खाना, खासकर मीठा और मैदे से जुड़ा भोजन पशुओं को न दिया जाए. इसके बजाय उन्हें हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित आहार ही दिया जाए.

सही देखभाल से बच सकती है पशुओं की जान

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पशुपालक थोड़ी सावधानी बरतें तो ऐसी खतरनाक बीमारियों  से आसानी से बचा जा सकता है. पशुओं को समय पर संतुलित आहार देना, साफ पानी उपलब्ध कराना और अनचाहा भोजन न देना उनकी सेहत के लिए बेहद जरूरी है. इसके साथ ही, अगर पशु में पेट दर्द, सूजन या बेचैनी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. छोटी सी लापरवाही बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए सही जानकारी और सावधानी ही पशुओं को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है.

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