अप्रैल में तालाब की यह तैयारी भूल गए तो मछली पालन में हो सकता है बड़ा नुकसान, बिहार सरकार ने दी अहम सलाह

अप्रैल का महीना मछली पालकों के लिए सबसे अहम माना जाता है. बिहार सरकार ने सलाह दी है कि इस समय तालाब की सही जगह चुनें, पुराने तालाब की मरम्मत करें और नए तालाब का निर्माण शुरू करें. अभी की गई तैयारी से मछलियों की बेहतर बढ़वार होगी और सालभर किसानों को ज्यादा मुनाफा मिल सकता है.

नोएडा | Published: 4 Apr, 2026 | 11:39 AM

Fish Farming: बिहार में मछली पालन करने वाले किसानों और मत्स्य पालकों के लिए अप्रैल का महीना बेहद अहम माना जाता है. यही वह समय होता है जब पूरे साल की अच्छी पैदावार और कमाई की मजबूत नींव रखी जाती है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के तहत मत्स्य निदेशालय ने अप्रैल माह के लिए खास सलाह जारी की है. विभाग ने कहा है कि इस समय तालाब की सही तैयारी, जगह का चुनाव और पुराने तालाबों की मरम्मत पर ध्यान देना सबसे जरूरी है. अगर किसान अभी थोड़ी सावधानी और सही योजना के साथ काम करें, तो आने वाले महीनों में मछली उत्पादन बेहतर होगा और लागत भी कम लगेगी. यही वजह है कि विभाग ने मत्स्य पालकों से इस महीने जरूरी काम समय पर पूरा करने की अपील की है.

तालाब के लिए सही जगह चुनना सबसे जरूरी

मत्स्य निदेशालय के अनुसार मछली पालन  शुरू करने से पहले तालाब के लिए सही स्थान का चुनाव करना सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम है. ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां सालभर पानी की उपलब्धता बनी रहे. तालाब ऐसी जमीन पर होना चाहिए जहां पानी ज्यादा रिसे नहीं और मिट्टी मजबूत हो. साथ ही जगह ऐसी हो जहां तालाब तक आसानी से पहुंचा जा सके, ताकि दाना, दवा और दूसरी जरूरी चीजें ले जाने में परेशानी न हो. ऐसे में अगर तालाब की नींव सही जगह पर रखी गई, तो आगे मछलियों की बढ़वार भी अच्छी होगी. गलत जगह पर तालाब बनने से पानी की कमी, रिसाव और रखरखाव की दिक्कतें बढ़ सकती हैं. इसलिए विभाग ने साफ कहा है कि जल्दबाजी में जगह न चुनें, बल्कि सोच-समझकर फैसला लें.

पुराने तालाबों की मरम्मत से बढ़ेगा उत्पादन

विभाग ने पुराने तालाबों के सुधार  और मरम्मत पर भी खास जोर दिया है. कई बार किसान पुराने तालाब में ही नई मछली डाल देते हैं, लेकिन तालाब की टूट-फूट, गाद, रिसाव और किनारों की कमजोरी पर ध्यान नहीं देते. इससे मछलियों की बढ़त प्रभावित होती है. अप्रैल का महीना पुराने तालाबों की सफाई और मरम्मत के लिए सबसे बेहतर माना गया है. तालाब की मेड़ मजबूत करनी चाहिए, नीचे जमा गाद निकालनी चाहिए और जहां से पानी निकल रहा हो वहां तुरंत मरम्मत करनी चाहिए. इससे पानी लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और मछलियों के लिए अच्छा वातावरण बनता है. सरकार का मानना है कि पुराने तालाब को नया जैसा तैयार कर देने से उत्पादन में साफ बढ़ोतरी देखी जा सकती है. इससे किसान को नई खुदाई की तुलना में कम खर्च में ज्यादा फायदा मिलता है.

नए तालाब का निर्माण अभी शुरू करें

मत्स्य निदेशालय  ने यह भी सलाह दी है कि जो किसान इस साल मछली पालन का दायरा बढ़ाना चाहते हैं, वे अप्रैल में ही नए तालाब का निर्माण शुरू कर दें. इस समय मौसम और जमीन की स्थिति तालाब निर्माण के लिए अनुकूल रहती है. अगर किसान अभी निर्माण शुरू करते हैं तो बारिश आने तक तालाब पूरी तरह तैयार हो जाएगा. इससे बरसात का पानी तालाब में आसानी से जमा किया जा सकता है और आगे बीज डालने का काम समय पर शुरू हो सकेगा. नए तालाब बनाते समय उसकी गहराई, चौड़ाई और पानी निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है. विभाग की सलाह है कि वैज्ञानिक तरीके से तालाब बनवाने पर भविष्य में रखरखाव आसान होता है और उत्पादन बेहतर मिलता है.

अभी की तैयारी से सालभर होगी बेहतर कमाई

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य  एवं पशु संसाधन विभाग का कहना है कि अप्रैल में की गई तैयारी ही पूरे साल की कमाई तय करती है. तालाब की सही तैयारी, समय पर मरम्मत और नए निर्माण से मछलियों की अच्छी वृद्धि होती है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिलता है. यह महीना तैयारी का महीना है. किसान अगर अभी थोड़ी मेहनत कर लें, तो आगे उन्हें बार-बार परेशानी नहीं होगी. कम बीमारी, साफ पानी और बेहतर तालाब व्यवस्था से मछलियां तेजी से बढ़ती हैं. बिहार सरकार लगातार मत्स्य पालकों को जागरूक कर रही है ताकि राज्य में मछली उत्पादन बढ़े और किसानों की आमदनी मजबूत हो. विभाग की यह अप्रैल एडवाइजरी किसानों के लिए एक आसान गाइड की तरह है, जिसे अपनाकर वे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.

Topics: