बरसात में पशुओं पर मौत का खतरा! गलघोंटू या लंगड़ी बुखार, जानें कौन है ज्यादा खतरनाक
बरसात में पशुओं में गलघोंटू और लंगड़ी बुखार जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ये बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारियां कुछ ही समय में पशु की जान ले सकती हैं. समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और सही देखभाल से पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है.
Animal Husbandry: बरसात का मौसम जहां हरियाली और चारे की उपलब्धता लेकर आता है, वहीं पशुपालकों के लिए कई चुनौतियां भी खड़ी कर देता है. इस मौसम में नमी और गंदगी बढ़ने के कारण पशुओं में बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. इनमें गलघोंटू (HS) और लंगड़ी बुखार (BQ) प्रमुख हैं. दोनों ही रोग तेजी से फैल सकते हैं और समय पर उपचार नहीं मिलने पर पशु की जान तक जा सकती है. पशु विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी, समय पर टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन से इन गंभीर बीमारियों से पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है.
गलघोंटू रोग में गले की सूजन से बढ़ता है खतरा
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार, गलघोंटू पशुओं में होने वाली एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है, जो मुख्य रूप से पास्चुरेला मल्टोसिडा नामक जीवाणु के कारण होती है. बरसात के मौसम में इसके मामले अधिक देखने को मिलते हैं. इस बीमारी में पशु को तेज बुखार आता है और गले के आसपास तेजी से सूजन होने लगती है. सूजन बढ़ने पर पशु को सांस लेने में परेशानी होती है और सांस लेते समय घुर-घुर जैसी आवाज सुनाई दे सकती है. कई बार पशु के मुंह से लार भी गिरने लगती है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी बेहद घातक साबित हो सकती है.
लंगड़ी बुखार में पैरों की मांसपेशियों पर पड़ता है असर
कुंवर घनश्याम के अनुसार, लंगड़ी बुखार या ब्लैक क्वार्टर (BQ) भी पशुओं में तेजी से फैलने वाली बीमारी है. यह क्लॉस्ट्रिडियम चावोई नामक बैक्टीरिया से होती है. इस रोग में पशु के आगे या पीछे के पैरों के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है. प्रभावित स्थान को दबाने पर चर-चर जैसी आवाज महसूस हो सकती है. बीमारी बढ़ने पर पशु चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है और गंभीर स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती है. खासतौर पर युवा पशुओं में इस बीमारी का खतरा अधिक रहता है.
दोनों बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे जरूरी
पशु चिकित्सक के अनुसार, गलघोंटू और लंगड़ी बुखार दोनों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है. मॉनसून शुरू होने से पहले पशुओं को कंबाइंड वैक्सीन लगवाना काफी फायदेमंद रहता है. इसके अलावा पशुओं के रहने वाले स्थान की साफ-सफाई बनाए रखना, गीले और कीचड़ वाले स्थान से बचाना तथा संतुलित आहार देना जरूरी है. बरसात में पशुओं के बाड़े में नमी अधिक होने से बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, इसलिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
लक्षण दिखते ही पशु को करें अलग, तुरंत लें विशेषज्ञ सलाह
कुंवर घनश्याम का कहना है कि यदि किसी पशु में तेज बुखार, सूजन, सांस लेने में परेशानी, लंगड़ापन या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए. संक्रमित पशु को अलग रखने से बीमारी के फैलाव को रोका जा सकता है. पशुपालकों को खुद से दवा देने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. बरसात के मौसम में थोड़ी सी सावधानी और समय पर टीकाकरण अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को गलघोंटू और लंगड़ी बुखार जैसी खतरनाक बीमारियों से बचा सकते हैं.