Sheep Farming: किसानों के लिए नोट छापने की मशीन है भेड़ की 2 नस्लें! ऊन, मीट और दूध तीनों से मिलेगा फायदा
Rural Business Ideas: आज के समय में भेड़ पालन किसानों के बीच काफी ज्यादा लोकप्रिय हो रही है. मुजफ्फरनगरी और गद्दी नस्ल की भेड़ों का पालन किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया बन रहा है. ये नस्लें तेजी से वजन बढ़ाती हैं, कम बीमार पड़ती हैं और मांस, ऊन व दूध से अच्छी आमदनी देती हैं. कम लागत में शुरू होने वाला यह व्यवसाय छोटे किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है.
Rural Business Ideas: उत्तर प्रदेश में इन दिनों पशुपालन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यहां के किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ भेड़ पालन को भी आय का मजबूत जरिया बना रहे हैं. कम जमीन और सीमित संसाधनों में शुरू होने वाला यह व्यवसाय अब अच्छी आमदनी दे रहा है. पशु चिकित्सकों का कहना है कि यदि सही नस्ल का चुनाव किया जाए तो भेड़ पालन छोटे और मध्यम किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है.
मुजफ्फरनगरी नस्ल: तेज बढ़त और ज्यादा मुनाफा
किसानों के बीच मुजफ्फरनगरी नस्ल की भेड़ें तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. यह नस्ल अपने भारी वजन और तेजी से बढ़ने की क्षमता के लिए जानी जाती है. एक स्वस्थ भेड़ का वजन 40 किलो से लेकर 100 किलो या उससे अधिक तक पहुंच सकता है. अच्छी देखभाल और संतुलित आहार मिलने पर यह नस्ल मात्र छह महीने में 25 से 30 किलो तक वजन बढ़ा लेती है.
दिखने में ये भेड़ें सफेद रंग की होती हैं, इनके कान लंबे होते हैं और नाक हल्की मुड़ी हुई होती है. मुख्य रूप से इन्हें मांस उत्पादन के लिए पाला जाता है. बाजार में इनके मटन की अच्छी मांग रहती है, क्योंकि इसका स्वाद बेहतर और चिकनाई संतुलित होती है. वजन के आधार पर बिक्री होने के कारण किसानों को सीधा फायदा मिलता है.
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इसके अलावा, इस नस्ल से हर साल लगभग एक किलो से अधिक अच्छी गुणवत्ता की ऊन भी प्राप्त होती है, जिसका उपयोग कालीन और कंबल बनाने में किया जाता है.
गद्दी नस्ल: ऊन, मांस और दूध का संगम
मुजफ्फरनगरी के साथ-साथ गद्दी नस्ल भी बलिया में तेजी से पहचान बना रही है. यह नस्ल बहुउद्देशीय मानी जाती है, क्योंकि इससे ऊन, मांस और दूध तीनों का लाभ मिलता है. गद्दी भेड़ें सफेद, काले या भूरे रंग में पाई जाती हैं और इनकी ऊन से महंगे शॉल और ऊनी कपड़े तैयार किए जाते हैं.
इस नस्ल की खासियत इसका दूध है. मात्रा भले ही कम हो, लेकिन इसे पौष्टिक और हेल्दी माना जाता है. इसका घी भी बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है. इस कारण गद्दी नस्ल को ‘मुनाफे की मशीन’ कहा जाने लगा है.
कम खर्च, कम बीमारी
इन दोनों नस्लों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये गर्म और नमी वाली जलवायु में आसानी से ढल जाती हैं. इन्हें ज्यादा विशेष देखभाल की जरूरत नहीं होती. सामान्य टीकाकरण और समय-समय पर कीड़े की दवा देने से ही ये स्वस्थ रहती हैं.
बीमारियां कम होने से इलाज का खर्च घटता है और किसानों की बचत बढ़ती है. यही कारण है कि कम निवेश में व्यवसाय शुरू करने वाले किसानों के लिए यह एक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प बन गया है.
क्यों बढ़ रही है भेड़ पालन की लोकप्रियता?
खेती की बढ़ती लागत और अनिश्चित मौसम के बीच भेड़ पालन किसानों के लिए आय का स्थिर साधन बन रहा है. कम जमीन, कम लागत और तेजी से मिलने वाला लाभ इसे आकर्षक बनाता है. सही प्रबंधन और नस्ल के चुनाव से किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं.