बिना जमीन के भी शुरू करें मछली पालन! सरकार दे रही झींगा-कैटफिश योजना पर सब्सिडी

बिहार के समस्तीपुर में अब बिना खुद की जमीन या तालाब के भी किसान मछली पालन शुरू कर सकते हैं. सरकार की योजना के तहत लीज पर तालाब लेकर झींगा, कैटफिश, देसी मछली और मोती पालन पर अनुदान मिलेगा. ऑनलाइन आवेदन कर किसान अतिरिक्त आय का साधन बना सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 31 Jul, 2026 | 06:55 PM

Fish Farming Bihar: बिहार में किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार अब खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दे रही है. समस्तीपुर जिले के किसानों और मत्स्य पालकों के लिए अच्छी खबर है कि अब अपनी जमीन या तालाब नहीं होने पर भी लोग मछली पालन का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. बिहार सरकार का कृषि विभाग और मत्स्य विभाग की योजनाओं के तहत किसान लीज पर जमीन या तालाब लेकर भी सरकारी अनुदान का लाभ उठा सकते हैं. मत्स्य विभाग ने ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें किसान 1000 रुपये के स्टांप पेपर पर जमीन या तालाब लीज पर लेकर मछली पालन योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं. सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन से जोड़ना और उनकी आमदनी के नए रास्ते खोलना है.

लीज पर तालाब लेकर भी मिलेगा योजना का लाभ

अक्सर किसानों के सामने मछली पालन  शुरू करने में सबसे बड़ी समस्या जमीन या तालाब की होती है. इसी समस्या को देखते हुए बिहार सरकार ने किसानों को बड़ी सुविधा दी है. अब जिन किसानों के पास खुद की जमीन नहीं है, वे किराये पर तालाब या जमीन लेकर भी मछली पालन कर सकते हैं. इसके लिए किसान को 1000 रुपये के स्टांप पेपर पर लीज से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने होंगे. इसके बाद वह मत्स्य विभाग की योजनाओं के लिए आवेदन कर सकता है. योजना के तहत पात्र किसानों को सरकारी अनुदान दिया जाएगा और राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी.

झींगा, कैटफिश और देसी मछली पालन पर मिलेगा प्रोत्साहन

बिहार के समस्तीपुर जिले में सरकार ने कई तरह के मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया है. इसमें माइनर कार्प (देसी मछली), कैटफिश, झींगा पालन और मोती पालन जैसी योजनाएं शामिल हैं. विभाग के अनुसार, माइनर कार्प मछली पालन के लिए 0.5 एकड़ यूनिट की परियोजना लागत करीब 94 हजार रुपये तय की गई है. वहीं कैटफिश पालन के लिए आधे एकड़ यूनिट पर लगभग 1.30 लाख रुपये, झींगा पालन  के लिए करीब 1.10 लाख रुपये और मोती पालन के लिए लगभग 2.24 लाख रुपये की परियोजना लागत निर्धारित की गई है. हर योजना के तहत फिलहाल जिले को 7-7 यूनिट का लक्ष्य दिया गया है. एक किसान को एक यूनिट तक योजना का लाभ दिया जाएगा.

स्थानीय मछलियों के संरक्षण पर सरकार का जोर

जिला मत्स्य पदाधिकारी अपर्णा कुमारी ने मीडिया को बताया कि सरकार स्थानीय और विलुप्त होने की कगार  पर पहुंच रही मछलियों की प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन पर भी ध्यान दे रही है. इसके साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीक से मछली पालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. मत्स्य पालन से किसान कम जमीन में भी अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं. विभाग की ओर से समय-समय पर किसानों को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे उत्पादन बेहतर हो सके.

ऐसे करें आवेदन और पाएं सरकारी अनुदान

मछली पालन योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसान बिहार सरकार के मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट  पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करते समय किसान को जमीन या तालाब की लीज से जुड़े दस्तावेज, पहचान पत्र, बैंक खाता सहित जरूरी जानकारी देनी होगी. आवेदन के बाद विभाग द्वारा पात्रता की जांच की जाएगी. पात्र पाए जाने वाले किसानों को योजना के नियमों के अनुसार अनुदान दिया जाएगा. किसान अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के मत्स्य कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं. सरकार की इस पहल से अब बिना जमीन वाले किसान भी मछली पालन को रोजगार का साधन बना सकेंगे और अपनी आय में बढ़ोतरी कर पाएंगे.

Published: 31 Jul, 2026 | 06:55 PM

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