गर्मी में पशु छोड़ रहे चारा? ये आसान उपाय बढ़ाएंगे भूख और दूध, डेयरी में नुकसान से बचेंगे पशुपालक

Animal Husbandry: गर्मी और लू के मौसम में पशु अक्सर चारा कम खाने लगते हैं, जिससे दूध उत्पादन घट जाता है. सही समय पर नहलाना, ठंडी जगह रखना, भरपूर पानी पिलाना और ताजा हरा चारा देना उनकी भूख बढ़ाने का आसान तरीका है. इससे पशु स्वस्थ रहेंगे और डेयरी का नुकसान भी कम होगा.

नोएडा | Updated On: 2 Apr, 2026 | 06:56 PM

Summer Animal Care: भीषण गर्मी शुरू होते ही सबसे ज्यादा असर इंसानों के साथ पशुओं पर भी दिखने लगता है. तेज धूप, गर्म हवा और टिन शेड की तपन से गाय-भैंस चारा कम खाने लगते हैं. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है और पशुपालकों की कमाई घटने लगती है. कृषि विज्ञान केंद्र नोएडा के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, अगर इस मौसम में पानी, ठंडक और ताजे चारे का सही इंतजाम कर दिया जाए तो पशु न सिर्फ लू से बचते हैं, बल्कि उनकी भूख और दूध दोनों बेहतर बने रहते हैं. थोड़ी सी सावधानी डेयरी में होने वाले बड़े नुकसान को रोक सकती है.

गर्मी में क्यों छोड़ देते हैं पशु चारा

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, गर्मी और लू के मौसम में पशुओं  का शरीर तेजी से गर्म हो जाता है. जब शेड के नीचे बहुत ज्यादा तपन होती है, तो उनका बॉडी टेंपरेचर बढ़ जाता है. इसी वजह से पशु चारा खाने में रुचि कम दिखाते हैं. आसान भाषा में समझें तो जब शरीर गर्म रहता है, तो पशुओं को बेचैनी होती है और उनका मन खाने-पीने से हट जाता है. खासकर विदेशी नस्ल की गायें जैसे होल्स्टीन फ्रीसियन और जर्सी ज्यादा जल्दी गर्मी की चपेट में आती हैं. इसलिए इन्हें छांव और हवा वाली जगह पर रखना बहुत जरूरी है.

शरीर ठंडा रखना सबसे जरूरी उपाय

पशु चिकित्सक के मुताबिक गर्मी में सबसे जरूरी काम पशुओं का शरीर ठंडा रखना  है. हर दो से तीन दिन में गाय-भैंस को अच्छे से नहलाना चाहिए, ताकि शरीर का तापमान सामान्य रहे. जहां पशु बंधे हों वहां पंखा, कूलर या फॉगर का इंतजाम करना बहुत फायदेमंद रहता है. फॉगर से हल्का पानी छिड़कने पर आसपास का माहौल ठंडा रहता है और पशुओं को राहत मिलती है. अगर टिन शेड है तो उसके नीचे घास-फूस या सफेद कपड़ा डालकर गर्मी कम की जा सकती है. इसके साथ ही शेड में हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए.

40 लीटर पानी और ताजा चारा है जरूरी

गर्मी में पानी की कमी  पशुओं की भूख को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है. इसलिए 24 घंटे में कम से कम 40 लीटर साफ और ठंडा पानी जरूर पिलाना चाहिए. पानी हमेशा छांव में रखें, ताकि वह ज्यादा गर्म न हो. अगर पशु बार-बार थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें तो उनका शरीर ठंडा रहता है और भूख भी बनी रहती है. चारे की बात करें तो ताजा हरा चारा सबसे बेहतर रहता है. बरसीम, ज्वार, बाजरा या हरे चारे को काटकर तुरंत खिलाना चाहिए. सूखा और बासी चारा गर्मी में पशु कम पसंद करते हैं. ताजे चारे में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर में नमी बनी रहती है.

दूध उत्पादन बचाने के लिए रखें खास ध्यान

गर्मी का सबसे बड़ा असर दूध पर पड़ता है. जब पशु कम खाते हैं और पानी कम पीते हैं, तो दूध अपने आप कम हो जाता है. खासकर डेयरी चलाने वाले पशुपालकों के लिए यह बड़ा नुकसान बन सकता है. अगर पशुओं को ठंडी जगह, पर्याप्त पानी और ताजा चारा मिले तो दूध उत्पादन में गिरावट  काफी हद तक रोकी जा सकती है. सुबह और शाम ठंडे समय में चारा खिलाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. विदेशी नस्ल के पशुओं के लिए यह सावधानी और जरूरी हो जाती है, क्योंकि ये गर्मी जल्दी नहीं सह पाते. इसलिए इनके लिए अतिरिक्त कूलिंग का इंतजाम रखना चाहिए.

Published: 2 Apr, 2026 | 09:25 PM

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