पशुपालन क्षेत्र को बड़ी ताकत, त्रिपुरा के 3 प्लांट सालाना 45 हजार लीटर नाइट्रोजन बनाएंगे

पशुधन विकास को मजबूत बनाने के लिए त्रिपुरा में नई लिक्विड नाइट्रोजन उत्पादन सुविधा शुरू की गई है. सरकार का दावा है कि इससे कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा, पशुधन की गुणवत्ता सुधरेगी और पशुपालकों को लाभ होगा. ये कदम राज्य को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नोएडा | Published: 12 Jun, 2026 | 07:02 PM

Tripura Livestock Development: पशुधन विकास और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में त्रिपुरा सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. राज्य के अगरतला स्थित आर.के. नगर में अत्याधुनिक लिक्विड नाइट्रोजन प्लांट शुरू किया गया है. सरकार का कहना है कि इस परियोजना से कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को मजबूती मिलेगी, पशुधन की गुणवत्ता में सुधार होगा और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.इसके साथ ही राज्य की बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता भी कम होगी.

कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को मिलेगी मजबूती

त्रिपुरा सरकार के अनुसार लिक्विड नाइट्रोजन कृत्रिम गर्भाधान  कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका उपयोग पशुओं के लिए तैयार की जाने वाली वीर्य खुराक (सीमन डोज) को सुरक्षित रखने में किया जाता है. राज्य में लंबे समय से इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था. सरकार का मानना है कि नए प्लांट के शुरू होने से लिक्विड नाइट्रोजन की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी. इससे कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों को गति मिलेगी और पशुधन नस्ल सुधार योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा.

तीन संयंत्रों से होगा 45 हजार लीटर उत्पादन

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तीन लिक्विड नाइट्रोजन उत्पादन इकाइयां संचालित हो रही हैं. ये संयंत्र अगरतला के आर.के. नगर, उदयपुर और कुमारघाट में स्थापित किए गए हैं. इन तीनों इकाइयों की संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 45 हजार लीटर है. प्रत्येक संयंत्र लगभग 15 हजार लीटर लिक्विड नाइट्रोजन का उत्पादन  करने में सक्षम है. सरकार का कहना है कि इससे राज्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ी मदद मिलेगी और आपूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत होगी.

उत्पादन क्षमता बढ़ाने की भी है योजना

त्रिपुरा सरकार के अनुसार वर्तमान में राज्य में लिक्विड नाइट्रोजन की वार्षिक मांग लगभग 50 हजार लीटर से लेकर 1 लाख लीटर तक है. इस मांग को देखते हुए भविष्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार की जा रही है. सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में कुल उत्पादन क्षमता  को बढ़ाकर लगभग 1.4 लाख लीटर तक पहुंचाना है. इससे न केवल राज्य की जरूरतें पूरी हो सकेंगी, बल्कि अतिरिक्त उत्पादन भी उपलब्ध हो सकेगा. इससे पशुपालन क्षेत्र के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और मजबूत होगी.

पशुपालकों और डेयरी क्षेत्र को होगा फायदा

सरकार का कहना है कि इस परियोजना से पशुधन की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे दूध और मांस उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. बेहतर नस्ल सुधार कार्यक्रमों का सीधा लाभ पशुपालकों को मिलेगा और उनकी आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी. इसके अलावा यह परियोजना डेयरी क्षेत्र के विकास, ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने और कृषि से जुड़े क्षेत्रों के आधुनिकीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. सरकार के अनुसार यह पहल राज्य को पशुधन विकास  के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. आने वाले वर्षों में इससे हजारों पशुपालकों को लाभ मिलने और राज्य के पशुपालन क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

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