आकाशीय बिजली गिरने से 500 बकरियों की दर्दनाक मौत, जानिए बारिश में पशुओं को कैसे बचाएं
Thunderstorm animal safety: बरसात और तूफान के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. खुले मैदान, ऊंचे इलाके, अकेले पेड़ और धातु की चीजें बिजली को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. अगर पशु खुले मैदान में हों या पेड़ों के नीचे बंधे हों, तो उन पर बिजली गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
Thunderstorm animal safety: उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां निजमुला घाटी के गौणा-भनाली तोक क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने से भारी नुकसान हुआ है. इस हादसे में करीब 500 बकरियों की मौत हो गई. इस घटना ने कई पशुपालक परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है, क्योंकि जिन जानवरों की मौत हुई, वही उनके जीवनयापन का मुख्य सहारा थे.
बरसात के मौसम में बिजली गिरने की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं. इंसानों के साथ-साथ पशु भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. ऐसे में यह हादसा किसानों और पशुपालकों के लिए एक बड़ी चेतावनी की तरह है कि खराब मौसम के दौरान सावधानी बेहद जरूरी है.
रातोंरात उजड़ गई पशुपालकों की दुनिया
बताया जा रहा है कि देर रात जब भेड़पालक अपने डेरे में आराम कर रहे थे, तभी अचानक तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी. बिजली सीधे उस जगह पर गिरी जहां बड़ी संख्या में बकरियां और भेड़ें बांधी गई थीं. उत्तराखंड के दुर्गम इलाकों में रहने वाले कई परिवार खेती और पशुपालन से अपना जीवन चलाते हैं. खासकर भेड़ और बकरी पालन वहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है.
ऐसे में जब प्राकृतिक आपदा में सैकड़ों जानवर मर जाते हैं, तो केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि पूरे परिवार का भविष्य संकट में पड़ जाता है.
बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
बरसात और तूफान के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. खुले मैदान, ऊंचे इलाके, अकेले पेड़ और धातु की चीजें बिजली को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. अगर पशु खुले मैदान में हों या पेड़ों के नीचे बंधे हों, तो उन पर बिजली गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
इसी को देखते हुए सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने भी पशुओं को वज्रपात से बचाने के लिए कई जरूरी सुझाव जारी किए हैं.
खराब मौसम में पशुओं को सुरक्षित शेड में रखें
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही मौसम खराब होना शुरू हो, पशुओं को तुरंत खुले स्थान से हटाकर सुरक्षित शेड में ले जाना चाहिए. कई बार किसान बारिश से तो खुद बच जाते हैं, लेकिन जानवरों को बाहर छोड़ देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है. शेड ऐसी जगह होना चाहिए जहां बिजली के उपकरण कम हों और आसपास खुले तार या धातु की वस्तुएं न हों.
बिजली वाले उपकरणों से रखें दूरी
बरसात के दौरान इलेक्ट्रिक मोटर, जनरेटर, तार और अन्य बिजली से चलने वाले उपकरण पशुओं के लिए खतरा बन सकते हैं. अगर बिजली गिरती है, तो करंट इन उपकरणों के जरिए फैल सकता है. इसलिए पशुओं को ऐसे सामान से दूर रखना बेहद जरूरी है. साथ ही लोहे के औजार, हल या धातु के डंडे भी पशुओं के आसपास नहीं रखने चाहिए.
पेड़ों और खंभों के नीचे जानवर बांधना पड़ सकता है भारी
गांवों में अक्सर लोग बारिश के दौरान गाय-भैंस या बकरियों को पेड़ के नीचे बांध देते हैं ताकि वे भीगें नहीं. लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है. अकेले और ऊंचे पेड़ बिजली को तेजी से आकर्षित करते हैं. इसी तरह बिजली और टेलीफोन के खंभे भी वज्रपात के समय बेहद खतरनाक हो सकते हैं. खराब मौसम में पशुओं को कभी भी पेड़ या खंभे के नीचे नहीं बांधना चाहिए.
धातु के बर्तनों का इस्तेमाल भी हो सकता है खतरनाक
बरसात के समय धातु के नाद, बाल्टी या पानी की टंकी भी खतरा बढ़ा सकती है. धातु बिजली की अच्छी सुचालक होती है और बिजली गिरने की स्थिति में करंट तेजी से फैल सकता है. इसलिए बारिश के मौसम में प्लास्टिक या मिट्टी से बने बर्तनों का उपयोग ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
तालाब और नदी के किनारे न ले जाएं पशु
बारिश के दौरान तालाब, पोखर, नदी और जलाशयों के आसपास बिजली गिरने का खतरा अधिक रहता है. पानी बिजली को तेजी से फैलाता है, जिससे आसपास मौजूद पशु भी करंट की चपेट में आ सकते हैं. इसीलिए खराब मौसम में जानवरों को पानी वाले क्षेत्रों से दूर रखना चाहिए.
मौसम की जानकारी रखना बेहद जरूरी
आज के समय में मोबाइल ऐप, टीवी और रेडियो के जरिए मौसम की जानकारी आसानी से मिल जाती है. किसान और पशुपालक अगर पहले से मौसम का अपडेट लेते रहें, तो समय रहते तैयारी की जा सकती है. अगर आंधी या तूफान की चेतावनी मिले, तो पशुओं को पहले ही सुरक्षित जगह पर पहुंचा देना चाहिए.