फसल के कचरे में मशरूम उगाकर 16 लाख कमाए, जांजगीर के रोहित से विधि सीखने पहुंच रहे किसान
Paddy Mushroom Farming: किसान रोहित साहू ने बताया कि धान के पुआल (पैरा) के बंडल बनाए जाते हैं या उन्हें काट कर 8 से 10 घंटे तक पानी में भिगोया जाता है. वह पहले 5 ट्रॉली पराली में मशरूम उत्पादन कर रहे थे अब वह 500 ट्रॉली पराली में उत्पादन कर रहे हैं.
मशरूम उत्पादन के लिए अब यूनिट लगाने, मशीनों पर मोटा पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. बल्कि, धान के पुआल में मामूली पैसा लगाकर भी मशरूम का सफल उत्पादन किया जा सकता है और मोटा मुनाफा बनाया जा सकता है. यह सफलता हासिल की है छत्तीसगढ़ के जांजगीर के प्रगतिशील किसान रोहित साहू ने. वह फसल के कचरे पराली में मशरूम उगा रहे हैं और पिछले सीजन में 16 लाख रुपये का मशरूम बेचा है. इस विधि से मशरूम उत्पादन को पैरा मशरूम भी कहा जाता है. अब उनकी मशरूम उत्पादन तकनीक सीखने इलाकाई किसान पहुंच रहे हैं.
छत्तीसगढ़ राज्य के जांजगीर चाम्पा जिला के मुलमुला गांव निवासी किसान रोहित साहू के द्वारा बड़े स्तर पर पैरा मशरूम (Paddy Mushroom) की खेती कर रहे हैं. इससे वह लाखों की आमदनी कमा रहे हैं और गांव के अन्य युवाओं को भी रोजगार दे रहे हैं. किसान रोहित साहू कृषि विज्ञान केंद्र जांजगीर से जुड़कर तकनीक सीखी है. किसान रोहित साहू ने प्रसार भारती को कृषि विज्ञान केंद्र में उन्होंने 8 साल पहले मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग ली थी. तब से वह मशरूम की खेती कर रहे हैं. यह गर्म और नमी वाले मौसम में सबसे अच्छा उगता है और कम खर्च में अधिक मुनाफा देता है.
25 ट्रॉली पुआल से शुरुआत की आज 500 ट्रॉली का इस्तेमाल
रोहित साहू ने बताया कि जब पहली बार पराली में मशरूम उत्पादन किया था तब 25 ट्रैक्टर ट्रॉली पराली का इस्तेमाल किया था. अब वह 500 ट्रैक्टर ट्रॉली पराली इकट्ठा की है और 6 हजार पराली पैडी बनाकर मशरूम उत्पादन कर रहे हैं. रखरखाव के लिए उन्होंने शेड बनाया है और नमी बरकरार रखने के लिए पानी की व्यवस्था की है. उन्होंने कहा कि धान की पराली पर उगाई जाने वाली यह तेज गति से बढ़ने वाली फसल है.
पैरा मशरूम उगाने का तरीका
रोहित साहू ने बताया कि धान के पुआल (पैरा) के बंडल बनाए जाते हैं या उन्हें काट कर 8 से 10 घंटे तक पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद पैरा की परत बिछाकर उस पर मशरूम के बीज और चोकर डाला जाता है. इसे पेड़ों की छांव में या छोटे शेड में आसानी से उगाया जा सकता है क्योंकि इसके लिए अच्छी नमी चाहिए होती है. इसके बाद मात्र 12 से 15 दिनों में मशरूम उत्पादन शुरू हो जाता है.
मशरूम उगाने के लिए पराली के बंडल बनाकर रखे गए.
मशरूम बेचकर 16 लाख कमाए
किसान रोहित साहू ने बताया कि अभी के समय पैरा मशरूम का काफी डिमांड है. उन्होंने बताया कि पिछले साल 16 लाख रुपये का पैरा मशरूम की बिक्री की थी. वह पैरा मशरूम की व्यापक स्तर में खेती कर रहे हैं. साथ ही, दूसरे युवाओं को भो रोजगार दे रहे हैं. रोहित साहू ने जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक एक अलग पहचान बनाई है. उन्होंने कहा कि धान किसान पराली जलाने की बजाय उसे बचाकर रखें और छोटी सी जगह में मशरूम उत्पादन शरू कर सकते हैं.