केंद्रीय कृषि मंत्रालय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के जरिए बीते कई वर्षों से प्रकृति के बदलावों को झेलने में सक्षम फसलों की नई किस्में विकसित करा रहा है. आईसीएआर ने बीते 10 साल में अलग-अलग फसलों की ऐसी 2900 नई किस्में विकसित करने में कामयाबी हासिल की है. इन उन्नत किस्मों में से ज्यादातर की बुवाई भी किसान कर रहे हैं और जलवायु बदलावों के असर के बावजूद अच्छा उत्पादन हासिल कर पा रहे हैं. इन किस्मों पर सूखा और ज्यादा बारिश का भी असर नहीं होता है और ये विपरीत मौसम में भी उगने और उत्पादन देने में सक्षम हैं.
हर मौसम झेलने में सक्षम 2900 नई किस्में
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने के लिए ICAR के नेतृत्व में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के तहत पिछले 10 साल (2014-2024) के दौरान कुल 2900 फसल किस्में जारी की गई हैं. इनमें से 2661 किस्में एक या अधिक जैविक (biotic) और अजैविक (abiotic) दबावों (stresses) को सहन करने में सक्षम हैं. इनमें मक्का, धान, मोटे अनाज और बागवानी फसलों की किस्में शामिल हैं. इन 2900 किस्मों को ऐसे हालातों के हिसाब से तैयार किया गया है कि चाहे सूखा हो या ज्यादा बारिश यह उत्पादन देने में सक्षम हैं.
इस साल 109 नई किस्में पेश की गईं
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) जनवरी 2026 में 25 प्रमुख फसलों की 184 नई उन्नत और जलवायु अनुकूल किस्में पेश कर चुका है. ये किस्में सूखा सहन करने, कीटों से बचाव और उच्च उपज देने के लिए जानी जाती हैं. इनमें धान, मक्का, दाल, तिलहन और नकदी फसलें शामिल हैं. अनाज की 122 किस्मों में धान की 60, मक्का की 50 और ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज की नई किस्में शामिल हैं. तिलहन की 13 नई किस्मों में सरसों, मूंगफली, तिल, अरंडी और कुसुम की फसलें शामिल हैं. दलहन कर 6 किस्में विकसित की गई हैं. इसके साथ ही पशु चारा फसलों की 11 किस्में भी विकसित की गई हैं.
109 नई किस्मों की बुवाई खेतों में शुरू
प्रधानमंत्री मोदी ने 11 अगस्त 2024 को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में फसलों की 109 उच्च उपज देने वाली, जलवायु अनुकूल किस्मों को जारी किया था. 61 फसलों की 109 किस्मों में 34 प्रक्षेत्र फसलें और 27 बागवानी फसलें शामिल हैं. फसलों में मोटे अनाज, चारा फसलें, तिलहन, दलहन, गन्ना, कपास, रेशा और अन्य संभावित फसलों सहित विभिन्न अनाजों के बीज जारी किए गए. बागवानी फसलों में फलों, सब्जियों, रोपण फसलों, कंद फसलों, मसालों, फूलों और औषधीय फसलों की विभिन्न किस्में जारी की गईं.
केवीके से किसानों तक पहुंचीं नई किस्मों के उम्दा नतीजे
सभी फसलों की नई किस्मों को कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों तक पहुंचाई गई हैं. जिनके सफल नतीजे देखने को मिल रहे हैं. ये नई किस्में किसानों की लागत कम करने और आय बढ़ाने में बेहद सहायक हैं. किसान अपने क्षेत्र के लिए सबसे उपयुक्त बीज की किस्म जानने और खरीदने के लिए आप नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क कर सकते हैं या आईसीएआर (ICAR) की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं.
जलवायु अनुकूल विधियों का पालन भी शुरू
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार जलवायु अनुकूल टेक्नोलॉजी और विधियों को भी विकसित किया गया है, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो और कृषि लागत को नीचे बनाए रखा जा सके. इसके तहत धानन सघनीकरण प्रणाली (System of Rice Intensification), एयरोबिक धान, धान की सीधी बुवाई, ज़ीरो टिलेज गेहूं की बुवाई और धान के अवशेषों को खेत में ही मिलाने आदि विधियां विकसित की गई हैं. इन विधियों का प्रदर्शन किसानों के सामने किया गया है और उन्हें लाभ बताए गए हैं और इन विधियों का पालन कराया जा रहा है.