एमओपी और एनपीके खाद 33 फीसदी महंगी हुई? 1425 वाली बोरी 1750 रुपये में बिकने का दावा 

NPK fertilizers price : अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा कि एनपीके और एमओपी खाद की कीमतों में 22 से 33 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. कहा गया है कि बड़े व्यापारी और निजी डीलर जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं, जिससे किसानों को खाद ऊंची कीमतों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 23 May, 2026 | 05:03 PM

खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही खाद की कीमतों में उछाल की आशंका जताई जा रही है. किसानों के संगठन अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा कि एनपीके और एमओपी खाद की कीमतों में 22 से 33 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. किसान संगठन का दावा है कि NPK खाद की कीमत पिछले सीजन 1425 रुपये प्रति बोरी थी, जो इस सीजन बढ़कर 1750 रुपये से लेकर 1900 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई है. हालांकि, सरकार का दावा है कि उर्वरकों की एमआरपी में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

एमओपी और एनपीके के दाम में 33 फीसदी बढ़ोत्तरी

किसानों के संगठन अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने जारी बयान में कहा कि म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) खाद की खुदरा कीमत पिछले सीजन के 1500 रुपये प्रति बोरी से बढ़कर 1800-2000 रुपये प्रति बोरी हो गई है. केरल के कुट्टनाड, कोट्टायम और पलक्कड़ जैसे कृषि क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी 20 से 33 फीसदी तक दर्ज की गई है. इसी तरह फैक्टमफॉस (NPK) की कीमत भी पिछले सीजन के 1425 रुपये प्रति बोरी से बढ़कर 1750-1900 रुपये प्रति बोरी हो गई है, जो 22 से 33 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाती है.

AIKS ने खाद के दाम में बढ़ोत्तरी की कई वजहें बताईं

AIKS के अध्यक्ष अशोक धावले और महासचिव वीजू कृष्णन की ओर से बीते दिन जारी बयान में कहा गया है कि कीमतों में बढ़ोतरी का कारण पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के चलते शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में आई रुकावट है. संगठन ने कहा कि इन रुकावटों की वजह से खाद बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल के आयात पर असर पड़ा है. संगठन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उत्पादन लागत में बढ़ोतरी, खासकर आयात की गई अमोनिया और कच्चे सल्फर की कीमतों में इजाफे का बोझ डीलरों और किसानों पर डाल दिया गया है.

यूपी, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों में खाद संकट

संगठन ने आगे आरोप लगाया कि बड़े व्यापारी और निजी डीलर जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं, जिससे किसानों को खाद ऊंची कीमतों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. AIKS के अनुसार आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसानों को खाद की कमी, कीमतों में बढ़ोतरी और अवैध रूप से ज्यादा पैसे वसूले जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

कागजों में दाम नहीं बढ़े पर खुदरा कीमतों में उछाल

किसान संगठन ने दावा किया कि कागजों पर तो खाद की कीमतें में बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन खुदरा स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों की खबरें हर जगह से आ रही हैं. इसने केंद्र और राज्य सरकारों पर जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया, और इसके बजाय कॉर्पोरेट व्यापारियों और बिचौलियों द्वारा मुनाफाखोरी को बढ़ावा देने की बात कही.

सरकार ने कहा- उर्वरकों के एमआरपी में कोई बदलाव नहीं किया गया

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग ने 11 मई को जारी आंकड़ों में कहा कि खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों का रिकॉर्ड स्टॉक मौजूदा है और मांग के मुकाबले 51% भंडार सुरक्षित है. इसलिए कीमतें नहीं बढ़ेंगी. देश में उर्वरक संकट खत्म हो गया है और घरेलू उत्पादन और आयात के साथ ही ग्लोबल टेंडर भी जारी किए गए हैं. केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि किसानों को राहत को देते हुए उर्वरकों की MRP में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

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Published: 23 May, 2026 | 04:56 PM