बासमती निर्यातकों ने जताई चिंता, कहा- कीटनाशकों की कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ा खेती का खर्च

बासमती चावल उद्योग ने बढ़ती खेती लागत और महंगे कीटनाशकों को लेकर चिंता जताई है. इससे किसानों की आय और निर्यात प्रभावित हो रहा है. लागत बढ़ने से किसान बासमती खेती छोड़ सकते हैं, जिससे निर्यात पर असर पड़ेगा. उद्योग ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप और राहत उपाय लागू करने की मांग की है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 7 Apr, 2026 | 11:34 PM

Basmati Farming: अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ ने बासमती चावल की खेती में बढ़ती लागत पर चिंता जताई है. उसके अनुसार, बासमती चावल निर्यात से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि बढ़ते इनपुट लागत और महंगे कीटनाशकों के चलते किसानों के लिए बासमती की खेती करना महंगा सौदा हो गया है. इससे किसानों की आमदनी और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहे हैं. उद्योग ने कहा है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो किसान बासमती की खेती छोड़ सकते हैं, जिससे देश के निर्यात और वैश्विक बाजार में उसकी स्थिति पर असर पड़ सकता है. इससे भारत का बासमती व्यापार में नेतृत्व प्रभावित होगा.

उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, कीटनाशकों की कीमतों में यह वृद्धि मुख्य रूप से तकनीकी रसायनों पर आयात निर्भरता  और वैश्विक आपूर्ति संकट के कारण हुई है. आगामी खरीफ सीजन से पहले यह किसानों पर वित्तीय दबाव डाल रहा है और निर्यात प्रणाली को कमजोर कर सकता है. बासमती चावल उद्योग ने बताया कि कीटनाशक की कीमतों में वृद्धि सिर्फ आयात और वैश्विक आपूर्ति संकट की वजह से ही नहीं, बल्कि कस्टम ड्यूटी और जीएसटी, मुद्रा अवमूल्यन, लॉजिस्टिक और पैकेजिंग खर्च में बढ़ोतरी के कारण भी किसानों और निर्यातकों पर दबाव बढ़ा रही है.

18 फीसदी GST से बढ़ा खेती का खर्च

उद्योग के अनुसार, कस्टम ड्यूटी, सोशल वेलफेयर सरचार्ज और 18 फीसदी GST मिलाकर उत्पाद की लागत में 30 फीसदी से अधिक की वृद्धि हो रही है. साथ ही अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से आयात महंगा हुआ है. वहीं रेड सी में मार्ग अवरोध और जहाजों के रूट बदलने के कारण फ्रेट और लॉजिस्टिक लागत भी तेजी से बढ़ी है. इसके अलावा पैकेजिंग और अन्य इनपुट सामग्री की कीमतें बढ़ने से किसानों और निर्यातकों पर वित्तीय दबाव और बढ़ गया है.

किसानों और कृषि पर असर

निर्यात से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि कीटनाशकों की बढ़ती कीमतें सीधे खेती की लागत बढ़ा रही हैं. इसके कारण किसान कीटनाशक का इस्तेमाल कम कर सकते हैं या सस्ते विकल्प अपनाने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उपज पर असर पड़ सकता है. इससे बासमती की खेती कम होने का खतरा है, जो किसानों की आय और निर्यात क्षमता दोनों को प्रभावित करेगा.

निर्यात से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों की माने तो भारत सरकार ने पहले ही निर्यातकों के लिए राहत उपायों की घोषणा की है और पेट्रोलियम उत्पादों पर ड्यूटी को समायोजित कर मुद्रास्फीति  को नियंत्रित किया है. इसी तरह, अब कृषि इनपुट की बढ़ती लागत को भी तुरंत संभालना जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसे में उद्योग ने सरकार से कई कदम उठाने का आग्रह किया है.

किसानों के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग

  • कीटनाशकों पर कस्टम ड्यूटी और GST की समीक्षा-  ताकि रोपाई और बुआई के महत्वपूर्ण मौसम में किसानों पर लागत का बोझ कम हो.
  • कीटनाशक निर्माताओं के साथ संवाद- ताकि कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके और किसानों पर असमान रूप से भार न पड़े.
  • सप्लाई चेन और उपलब्धता पर निगरानी- ताकि उच्च मांग के समय जरूरी कृषि रसायनों की कमी न हो.

निर्यात से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार को  तुरंत ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इसमें देरी होने से आगामी खरीफ सीजन और भारत की कृषि व निर्यात अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस मामले को प्राथमिकता के साथ संभाला जाए.

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Published: 7 Apr, 2026 | 11:23 PM
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