हरी की बजाय रेड-येलो शिमला मिर्च उगाई, पहले ही सीजन में किसान ने कमाए 3 लाख रुपये
Success Story: हरी शिमला मिर्च में कम मुनाफा मिलने के बाद मंडी के किसान लोकपाल ठाकुर ने दोस्त की सलाह पर रेड और येलो शिमला मिर्च की खेती शुरू की. पहले ही सीजन में 3 लाख रुपये का लाभ मिला. अब पूरे परिवार के साथ पॉलीहाउस खेती से शानदार कमाई कर रहे हैं.
Success Story: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के किसान लोकपाल ठाकुर ने पॉलीहाउस में हरी शिमला मिर्च की खेती से शुरुआत की थी. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार, शुरुआत में उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उम्मीद के मुताबिक मुनाफा भी नहीं मिला. इसी दौरान उनके मित्र राजेश शर्मा, जो बीना के रहने वाले हैं और खुद भी पॉलीहाउस में खेती करते हैं, ने उन्हें नई दिशा दिखाई. राजेश शर्मा ने लोकपाल ठाकुर को हरी शिमला मिर्च की जगह रेड और येलो बेल पेपर (रंगीन शिमला मिर्च) लगाने की सलाह दी. उन्होंने पूरी तकनीक समझाई और खेती शुरू कराने में हर संभव मदद की. लोकपाल ठाकुर ने इस सलाह पर भरोसा किया और उसी सीजन में उन्हें करीब 3 लाख रुपये का मुनाफा हुआ. इस कमाई में से उन्होंने डेढ़ लाख रुपये अपने मित्र को वापस किए और बाकी राशि अपने पास रखी.
ग्राफ्टेड शिमला मिर्च से बढ़ा मुनाफा, मेहनत रही बराबर
लोकपाल ठाकुर का कहना है कि हरी और रंगीन शिमला मिर्च की खेती में मेहनत लगभग समान होती है, लेकिन ग्राफ्टेड रेड और येलो शिमला मिर्च से आमदनी कहीं अधिक होती है. यही वजह है कि अब उनका आत्मविश्वास पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है. उनका मानना है कि पॉलीहाउस में सामान्य खेती करने की बजाय नई तकनीक और बेहतर किस्मों को अपनाने से किसानों की आय बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में थोड़ा खर्च जरूर आता है, लेकिन सही योजना और वैज्ञानिक सलाह के साथ अच्छा लाभ मिल सकता है.
परिवार का पूरा सहयोग, खेती छोड़ने का नहीं है इरादा
लोकपाल ठाकुर बताते हैं कि उनकी सफलता के पीछे उनके पूरे परिवार का बड़ा योगदान है. उनकी पत्नी पॉलीहाउस में सबसे ज्यादा मेहनत करती हैं. उन्होंने अकेले ही 500 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में पौधों के लिए धागे बांधने का पूरा काम किया. इसके अलावा नीचे का अधिकांश काम भी उन्होंने खुद संभाला. लोकपाल के माता-पिता भी उम्र अधिक होने के बावजूद खेती में सहयोग करते हैं. लोकपाल कहते हैं कि परिवार और दोस्तों के सहयोग से उनका काम लगातार आगे बढ़ रहा है. उनका कहना है कि वह जरूरत पड़ने पर नौकरी छोड़ सकते हैं, लेकिन खेती कभी नहीं छोड़ेंगे, क्योंकि उन्हें इस काम से खुशी और सम्मान दोनों मिलते हैं.
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आईसीएआर के अनुसार वैज्ञानिकों की मदद से अपनाएं आधुनिक खेती
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख सब्जियों में शिमला मिर्च का महत्वपूर्ण स्थान है और शहरी बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. वैज्ञानिकों ने इसके लिए कई उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनसे किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है. कृषि विज्ञान केंद्र, सुंदरनगर (जिला मंडी, हिमाचल प्रदेश) के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में मंडी जिले के कई किसान पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की सफल खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. आईसीएआर का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, ग्राफ्टेड पौधों और वैज्ञानिक सलाह के साथ खेती करें तो कम क्षेत्र में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त की जा सकती है. आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए इच्छुक किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती शुरू कर सकते हैं.