MIDH योजना से मिली मदद ने बदल दी जिंदगी, अब मसाला कारोबार से चमक रहा है पूरा इलाका!

Women Empowerment: अविलाशा सलारिया जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले की रहने वाली एक महिला उद्यमी हैं, जिन्होंने मसाला बनाने का अपना छोटा व्यवसाय शुरू किया. उन्हें सरकार की MIDH योजना से मदद मिली, जिससे उन्होंने अपनी यूनिट स्थापित की. आज उनके इस काम से 8 से 10 लोगों को रोजगार मिला है.

नोएडा | Updated On: 14 Jun, 2026 | 07:18 PM

MIDH Scheme Success Story: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले की अविलाशा सलारिया आज उन महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपने दम पर एक सफल पहचान बनाई है. उन्होंने मसाला निर्माण का छोटा-सा कारोबार शुरू करके न सिर्फ खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया, बल्कि कई अन्य लोगों के लिए रोजगार के रास्ते भी खोले. यह कदम ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी सरकारी पहल को भी मजबूती देता है, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों और उद्यमों को बढ़ावा देना है.

मिशन योजना से मिला कारोबार को आधार

अविलाशा सलारिया ने उधमपुर के बट्टल बलियां इंडस्ट्रियल एस्टेट में अपना मसाला निर्माण यूनिट स्थापित किया. उन्हें यह यूनिट शुरू करने में सरकार की ‘मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH)’ योजना के तहत सहायता मिली. इस योजना के जरिए उन्हें आर्थिक सहयोग और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए गए, जिससे उनका सपना हकीकत में बदल सका. आज उनका यह छोटा उद्योग स्थानीय बाजार में अपनी पहचान बना चुका है और लगातार आगे बढ़ रहा है.

8 से 10 लोगों को मिला रोजगार

इस मसाला यूनिट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि रोजगार का साधन भी बन चुका है. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, यहां करीब 8 से 10 लोगों को काम मिला है, जिनमें कई स्थानीय महिलाएं भी शामिल हैं. यूनिट में आधुनिक मशीनों और साफ-सुथरे माहौल में मसालों का उत्पादन किया जाता है. इससे न सिर्फ गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि लोगों को सुरक्षित कार्य वातावरण भी मिलता है.

स्थानीय स्वाद और उत्पादों को नई पहचान

अविलाशा के मसाला उत्पादों में लहसुन पाउडर और पारंपरिक टिक्की मसाला जैसे स्थानीय स्वाद शामिल हैं. इन उत्पादों की खासियत यह है कि ये पूरी तरह स्वच्छता और क्वालिटी मानकों का पालन करते हुए बनाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि, सरकारी सहायता और आसान लोन सुविधा ने उनके व्यवसाय को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. आज उनके उत्पाद स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं. अपनी सफलता के बाद अविलाशा अब अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं. उनका कहना है कि, महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका पूरा लाभ उठाना चाहिए और अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश करनी चाहिए.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की कहानी

अविलाशा सलारिया की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि अगर सही मार्गदर्शन और सरकारी सहायता मिले, तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं. उन्होंने न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है. उनकी कहानी आज जम्मू-कश्मीर की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है और यह दिखाती है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं.

Published: 15 Jun, 2026 | 06:00 AM

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