अब उत्तर भारत के किसान भी करेंगे मसाले की खेती, वैज्ञानिकों ने विकसित की 7 नई किस्में.. होगी बंपर कमाई

महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल ने चार साल के शोध के बाद मसालों और सब्जियों की सात नई उन्नत किस्में विकसित की हैं. ये किस्में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली हैं, जिससे हरियाणा में किसानों की आय और बागवानी उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 12 Jan, 2026 | 10:34 AM

Spices New Varieties: महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय (एमएचयू), करनाल ने पिछले चार वर्षों के शोध और फील्ड ट्रायल के बाद मसालों और सब्जियों की सात नई उन्नत किस्में विकसित की हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, ये किस्में ज्यादा उत्पादन देने वाली, बेहतर गुणवत्ता वाली और कीट-रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है. नई किस्मों में चार मसाले शामिल हैं, जो सौंफ (F1), मेथी (M2), धनिया (CR-1) और हल्दी (राजेंद्र सोनिया, PH-2) है. इसके अलावा टमाटर की एक किस्म (पुसा चेरी) और चौलाई यानी अमरंथ (M1) की भी नई किस्म जारी की गई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन फसलों ने अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे ये किसानों के लिए व्यापक स्तर पर अपनाने योग्य हैं.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, एमएचयू के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने कहा कि इन किस्मों की पहचान  चार साल से अधिक समय तक किए गए गहन शोध और परीक्षण के बाद की गई है. इन किस्मों की घोषणा 8 और 9 जनवरी को करनाल में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान की गई, जिसका आयोजन एमएचयू ने बागवानी विभाग और एचएयू हिसार के सहयोग से किया. कार्यशाला का उद्घाटन हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने किया. इसमें राज्यभर से वैज्ञानिकों, बागवानी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और बागवानी में नई तकनीकों व उन्नत उत्पादन पद्धतियों पर चर्चा की गई.

एक अहम मील का पत्थर साबित होगी

डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि यह पहल किसानों को सहयोग देने, फसल विविधता बढ़ाने और पोषणयुक्त व व्यावसायिक बागवानी उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में विश्वविद्यालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि एमएचयू द्वारा विकसित नई किस्मों और वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों को मिली मंजूरी हरियाणा में बागवानी फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने में एक अहम मील का पत्थर साबित होगी.

लीची की उन्नत किस्में विकसित

नई किस्मों के साथ-साथ विश्वविद्यालय ने कार्यशाला के दौरान केला, कमलम, पर्सिमन और लीची के लिए उन्नत उत्पादन प्रणालियां  भी पेश कीं. इन तकनीकों का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और उत्पादकता में बढ़ोतरी करना है. डॉ. मल्होत्रा के अनुसार, इन पहलों का मूल उद्देश्य बागवानी फसलों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने वाली प्रभावी तकनीकों की पहचान करना है, ताकि किसानों के साथ-साथ राज्य की जनता के लिए खाद्य, पोषण और आय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

44 तकनीकों को अपनाने की सिफारिश

डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि यह कार्यशाला चार साल से अधिक के अंतराल के बाद आयोजित की गई थी. दो दिवसीय इस कार्यक्रम के दौरान कुल 48 तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें से 44 तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई. उन्होंने इसे विश्वविद्यालय और हरियाणा के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया.

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Published: 12 Jan, 2026 | 10:34 AM

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