टाई-लैपटॉप छोड़ इनोवेटिव किसान बना आईटी इंजीनियर, गांव में खड़ा किया लाखों का देसी ब्रांड

इरादे मजबूत हों तो मिट्टी भी सोना उगल देती है. आईटी छोड़कर खेती अपनाने वाले इस युवा ने गांव में नया सोच और नया मॉडल खड़ा कर दिया. युवा इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर खेती को करियर के रूप में चुना और आज वह स्थानीय स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ग्राहकों को जोड़कर अपने कृषि उत्पादों की सफल बिक्री कर रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 13 Oct, 2025 | 01:34 PM

किसी ने सही कहा है अगर इरादा पक्का हो तो राह खुद बन जाती है. तकनीक की दुनिया छोड़कर जिसने मिट्टी को अपनाया, वही आज गांव का ब्रांड बन चुका है. यह कहानी है एक ऐसे नौजवान की, जिसने टाई और लैपटॉप छोड़कर खेत और खाद को गले लगाया… और न सिर्फ खुद की बल्कि पूरे इलाके की सोच बदल दी. शुरुआत आसान नहीं थी, लोग मजाक उड़ाते थे, लेकिन आज वही लोग उनसे प्रेरणा ले रहे हैं. ये सिर्फ किसान नहीं, बल्कि गांव का ब्रांड और बदलाव का चेहरा बन चुके हैं.

नौकरी छोड़ी, खेत अपनाया और शुरू हुई नई जिंदगी

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के नवरत्न तिवारी ने आईटी इंजीनियर की नौकरी छोड़कर खेती को अपना करियर बना लिया. लेकिन यह खेती वैसी नहीं थी जैसी गांव में होती है. उन्होंने ठान लिया कि अगर खेती करनी है, तो कुछ अलग करना है. लीज पर जमीन ली और शुरुआत की छोटी इलायची, पान पत्ता, सहजन, काजू, लहसुन, मौसमी, नारियल, एस्टर मशरूम जैसी उन फसलों से जो आमतौर पर पहाड़ों या समुद्र किनारे के इलाकों में उगती हैं.

गांव में फ्री सब्जियां बांटी- लोगों का भरोसा ऐसे जीता

शुरू में लोगों को भरोसा नहीं था कि गांव में इतनी अलग-अलग फसलें सच में उग सकती हैं. नवरत्न ने एक अनोखा तरीका अपनाया- अपने खेत की सब्जियां  और फल गांव में फ्री में बांटना शुरू किया. इससे लोगों को भरोसा हुआ कि खेती में सच में कुछ नया हो रहा है.

व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़े ग्राहक और बनाया लोकल ब्रांड

जब लोग फसलों की क्वालिटी से प्रभावित हुए, तो नवरत्न ने एक लोकल व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया. अब कोई मंडी नहीं, कोई बिचौलिया नहीं…सीधे खेत से ग्राहक तक. आज उनके पास 200 से ज्यादा पक्के ग्राहक हैं, जो रोज ताजी सब्जियां  और फल उनके फार्म से मंगवाते हैं.

वैज्ञानिक तरीके से खेती का प्लान तैयार किया

नवरत्न ने सिर्फ मेहनत नहीं की, बल्कि दिमाग भी लगाया. उन्होंने महराजगंज की मिट्टी और मौसम  का साइंटिफिक एनालिसिस कराया और पाया कि यहां पर सेब और काजू भी सफलतापूर्वक उग सकते हैं. नतीजा- आज उनकी फसलें तैयार होने लगी हैं और क्वालिटी किसी भी शहर की ब्रांडेड पैकिंग को टक्कर देती है.

किसान ही नहीं, अब शिक्षक भी बन चुके हैं

नवरत्न तिवारी अब केवल किसान नहीं, बल्कि शिक्षक की भूमिका भी निभा रहे हैं. उनके फार्म पर आसपास के गांवों से किसान सीखने आते हैं और कई तो खुले शब्दों में कह चुके हैं कि वे भी इसी मॉडल पर काम शुरू करना चाहते हैं. नवरत्न खुद तकनीक और खेती को मिलाकर एक पूरा ट्रेनिंग मॉडल तैयार कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस राह पर चल सकें. उनका साफ कहना है- खेती में भीड़ में मत चलो, कुछ अलग करो. सोच बदलो, तकनीक अपनाओ… खेत खुद बोल उठेगा- मैं तैयार हूं. उनके ये शब्द ही आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुके हैं.

नवरत्न मॉडल क्यों है खास?

नवरत्न तिवारी की खेती का मॉडल इसलिए खास है क्योंकि इसमें जमीन से लेकर बाजार तक हर कदम सोच-समझकर उठाया गया है. उन्होंने लीज पर जमीन लेकर बिना बड़ा निवेश किए शुरुआत की. लोगों का भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में फ्री सैंपल बांटे. मार्केटिंग के लिए उन्होंने व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल किया, जिससे बिचौलियों की जरूरत ही नहीं पड़ी और सीधा मुनाफा उन्हें मिला. अनोखी और कम देखी जाने वाली फसलें लगाकर उन्होंने खुद को बाकी किसानों से अलग साबित किया. पूरी खेती साइंटिफिक प्लानिंग के साथ की, जिससे उत्पादन बेहतर हुआ. अब वे दूसरों को भी ट्रेनिंग देकर यही सफलता दिलाने के लिए तैयार हैं.

यह कहानी सिर्फ एक किसान की नहीं…

अगर गांव का एक इंजीनियर अपने खेत को ब्रांड बना सकता है, तो यकीन मानिए- खेती आज भी सबसे बड़ा बिजनेस है, बस तरीके को बदलने की जरूरत है.

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Published: 13 Oct, 2025 | 12:18 PM

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