7 लाख की सरकारी मदद से निशा ने बदली किस्मत, 14 गायों से शुरू किया डेयरी फार्म

Successful Dairy Business: उधमपुर की निशा देवी ने सरकारी योजना की मदद से डेयरी व्यवसाय शुरू कर सफलता की नई कहानी लिखी है. 14 गायों से शुरू हुआ उनका फार्म आज रोजाना 100 लीटर से ज्यादा दूध उत्पादन कर रहा है. वह दूध के साथ देसी घी और जीआई टैग वाली कलाड़ी चीज बनाकर अतिरिक्त कमाई भी कर रही हैं.

नोएडा | Published: 12 Jul, 2026 | 07:28 PM

Success Story: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के कोटली बाला गांव की रहने वाली निशा देवी आज उन महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं, जो अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहती हैं. कभी घर संभालने वाली निशा ने सरकारी योजना का लाभ उठाकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया और आज उनका फार्म रोजाना 100 लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन कर रहा है. इतना ही नहीं, उन्होंने दूध बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उससे बनने वाले उत्पाद तैयार कर अपनी कमाई भी बढ़ाई है.

सरकारी योजना से मिली नई शुरुआत

निशा देवी ने साल 2025-26 में सरकार की IDDS 07 डेयरी यूनिट योजना का लाभ लिया. इस योजना के तहत उन्हें 7 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. इसी आर्थिक सहायता से उन्होंने अपना डेयरी फार्म शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने 14 गायों के साथ कारोबार की नींव रखी. सही योजना, मेहनत और आधुनिक तकनीकों की मदद से उनका यह छोटा प्रयास आज एक सफल डेयरी फार्म में बदल चुका है. निशा ने डेयरी में सिर्फ पारंपरिक तरीके नहीं अपनाए, बल्कि वैज्ञानिक और आधुनिक डेयरी प्रबंधन पर भी ध्यान दिया.

गायों के खान-पान, स्वास्थ्य और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे दूध उत्पादन लगातार बढ़ता गया. आज उनके फार्म में 20 से 25 हाई क्वालिटी वाली साहीवाल नस्ल की गायें हैं. इसी का नतीजा है कि उनका डेयरी फार्म अब हर दिन 100 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन कर रहा है.

सिर्फ दूध नहीं, देसी घी और कलाड़ी से भी कमाई

निशा देवी ने अपनी आय बढ़ाने के लिए सिर्फ कच्चा दूध बेचने पर निर्भर रहने के बजाय वैल्यू एडिशन का रास्ता चुना. वह दूध से शुद्ध देसी घी तैयार करती हैं और उधमपुर की प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त पारंपरिक चीज ‘कलाड़ी’ भी बनाकर बेचती हैं. इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे उन्हें साधारण दूध बेचने की तुलना में ज्यादा मुनाफा मिल रहा है. इससे उनका कारोबार लगातार मजबूत हो रहा है.

निशा देवी की सफलता यह साबित करती है कि गांव की महिलाएं भी बड़ा कारोबार खड़ा कर सकती हैं. उन्होंने दिखाया है कि डेयरी व्यवसाय केवल दूध तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़े कई उत्पाद बनाकर अच्छी कमाई की जा सकती है.

आत्मनिर्भर बनने की मिसाल

आज निशा देवी न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं. उनकी सफलता बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाकर छोटे स्तर से शुरू किया गया कारोबार भी बड़ी पहचान बना सकता है. निशा देवी की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो खेती और पशुपालन के जरिए अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं. उनकी मेहनत और सोच यह दिखाती है कि आधुनिक तकनीक और वैल्यू एडिशन अपनाकर डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाया जा सकता है.

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