सीएम ने किसानों को जमीन पट्टे के कागजात सौंपे, 6 हजार गांवों की जमीनों का फिर से सर्वे

आंध्र प्रदेश में किसानों की जमीनों के आंकड़ों में गड़बड़ियों को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत 'मी भूमि-मी हक्कू' (Mee Bhoomi-Mee Hakku) कार्यक्रम में किसानों को पट्टादार पासबुक सौंपी गई है.

Kisan India
नोएडा | Published: 8 Jun, 2026 | 11:40 AM

किसानों की जमीनों के गलत डाटा फीडिंग के चलते हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए जमीनों का सर्वे फिर से शुरू किया गया है. 6 हजार से अधिक गांवों के ऐसे किसानों हैं, जिनकी जमीनों के आंकड़े गलत दर्ज हो गए हैं, जिन्हें सुधारने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया है. इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वेस्ट गोदावरी में किसानों को पट्टादार पासबुक सौंपे हैं. उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के उत्पादन और उनकी कमाई को लेकर गंभीर है और कई योजनाओं के जरिए किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू सोमवार को वेस्ट गोदावरी जिले के दौरे पर हैं. वे ‘मी भूमि-मी हक्कू’ (Mee Bhoomi-Mee Hakku) कार्यक्रम के तहत किसानों को पट्टादार पासबुक बांटी और योजना का लाभ उठाने वाले लोगों से बातचीत की. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री अचंथा विधानसभा क्षेत्र के सिद्धांथम गांव के कार्यक्रम में शामिल हुए. सीएम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के उत्पादन और उनकी कमाई को लेकर गंभीर है और कई योजनाओं के जरिए किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है.

जनवरी में शुरू हुआ था जमीन के रिकॉर्ड सुधार अभियान

‘मी भूमि-मी हक्कू’ पहल को जनवरी में शुरू किया गया था और इसका मकसद जमीन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की गलतियों को सुधारना है. अधिकारी दोबारा सर्वे करने और किसानों की जानकारी वेरिफाई करने के बाद जमीन के रिकॉर्ड अपडेट कर रहे हैं और ब्लॉकचेन आधारित नई पासबुक जारी कर रहे हैं. फाइनल पासबुक देने से पहले किसानों को ड्राफ्ट कॉपी दी जाती है और उनसे e-KYC के जरिए जानकारी कन्फर्म करने के लिए कहा जाता है.

6 हजार गांवों का सर्वे पूरा, 10 हजार गांवों का है टारगेट

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अधिकारी किसानों के सामने जमीन की जानकारी पढ़कर सुनाते हैं. पिछले छह महीनों में 6,688 गांवों में दोबारा सर्वे का काम पूरा हो चुका है, जिसमें 6,459 गांवों के 26.46 लाख किसान शामिल हैं. सरकार का लक्ष्य अगले नौ महीनों में 10,357 और गांवों में दोबारा सर्वे का काम पूरा करना और 67.32 लाख पासबुक बांटना है.

किसानों दी गई जमीन के हर टुकड़े की पर्मानेंट आईडी

आंध्र प्रदेश ब्लॉकचेन-आधारित जमीन रिकॉर्ड सिस्टम अपनाने वाला पहला राज्य है, जिसमें छेड़छाड़ रोकने के लिए जमीन के हर टुकड़े को एक परमानेंट ID दी जाती है. सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि नई व्यवस्था से जमीन के रिकॉर्ड की सटीकता और सुरक्षा बेहतर होगी, जिससे किसानों को भरोसा मिलेगा कि उनकी जमीन हमेशा सुरक्षित रहेगी.

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