Haryana News: हरियाणा के किसान सरसों खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. मौजूदा वक्त में सरसों का रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. खासकर अंबाला जिले में सरसों का रेट एमएसपी से कुछ ज्यादा ही कम है. ऐसे में अंबाला जिले के सरसों किसान सरकारी खरीद की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं. जिले के किसानों का कहा है कि निजी व्यापारी वर्तमान में MSP से काफी कम दाम दे रहे हैं. ऐसे में उन्हें 700 रुपये प्रति क्विंटल तक नुकसान हो रहा है.
Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक, 12 मार्च को हरियाणा के अंबाला जिले के अंबाला कैंट एपीएमसी मार्केट में स्थानीय काली सरसों (तेलबीन) की कीमतें MSP से काफी कम दर्ज की गईं. इस दिन न्यूनतम कीमत 5,250 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम कीमत 5,900 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य (मॉडल) कीमत 5,400 रुपये प्रति क्विंटल रही. हालांकि, मौजूदा सरसों का एमएसपी 6,200 रुपये क्विंटल है. यानी मंडी में अभी किसानों को प्रति क्विंटल 300 से लेकर करीब 700 रुपये कम मिल रहे हैं.
मंडियों में सरसों का रेट एमएसपी से भी काफी कम है
वहीं, 11 मार्च को अंबाला कैंट एपीएमसी मार्केट में स्थानीय काली सरसों (तेलबीन) की कीमतें 12 मार्च से भी कम रहीं. इस दिन न्यूनतम कीमत 5,200 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम कीमत 5,600 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य (मॉडल) कीमत 5,480 रुपये प्रति क्विंटल रही. यही वजह है कि कई किसान अपनी फसल बाजार में नहीं बेच रहे और उम्मीद कर रहे हैं कि सरकारी एजेंसियां जल्द ही खरीद शुरू करेंगी. मार्केट डेटा के अनुसार, अब तक अंबाला कैंटोनमेंट ग्रेन मार्केट में लगभग 3,500 क्विंटल सरसों बीज आ चुके हैं. काली सरसों का दाम इस समय 5,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सरकारी खरीद 28 मार्च से शुरू होगी. किसान बता रहे हैं कि इस साल फसल की पैदावार कम होने के कारण स्थिति और कठिन हो गई है.
इस साल पैदावार में गिरावट आने की है संभावना
कृषि विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस साल पैदावार कम हुई है, हालांकि इसके कारण स्पष्ट नहीं हैं. अंबाला के उप निदेशक कृषि, डॉ. जसविंदर सैनी ने द ट्रिब्यून से कहा कि इस साल पैदावार में गिरावट देखी गई है, लेकिन कोई विशेष कारण सामने नहीं आया है. वहीं, BKU (Charuni) के प्रवक्ता राकेश बैन्स ने कहा कि सरकारी एजेंसी बाजार में आने से पहले ही अधिकतर फसल निजी व्यापारी खरीद लेते हैं. इससे धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि सस्ती कीमत पर खरीदी गई सरसों बाद में MSP पर सरकार को बेची जा सकती है. ऐसे में सरकार को तुरंत खरीद का आदेश देना चाहिए.
हरियाणा के इन जिलों में होती है सरसों की खेती
हरियाणा में सरसों एक प्रमुख रबी तिलहन फसल है, जो मुख्य रूप से महेंद्रगढ़, भिवानी, रेवाड़ी, हिसार और सिरसा में उगाई जाती है. इसे सितंबर के अंत से अक्टूबर तक 1.25-1.50 किलो प्रति एकड़ बीज दर से 45 सेंटीमीटर की दूरी पर कतारों में बोया जाता है. उन्नत किस्में जैसे RH-761 और संतुलित उर्वरकों (SSP और यूरिया) का इस्तेमाल करने से लगभग 20-21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की अच्छी पैदावार मिलती है.
लगभग 13.17 लाख मीट्रिक टन सरसों उत्पादन होने का अनुमान
हरियाणा में 2025-26 के रबी सीजन में सरसों का उत्पादन लगभग 13.17 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है. यह राज्य की एक प्रमुख तिलहन फसल है. सरसों का उत्पादन व्यापक क्षेत्र में होता है, जिसमें महेंद्रगढ़, भिवानी, रेवाड़ी, हिसार, सिरसा, झज्जर और मेवात प्रमुख जिले हैं. खासकर महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी सरसों की खेती के मुख्य केंद्र माने जाते हैं. रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. सरकार को उम्मीद है कि अधिक MSP से सरसों किसानों की कमाई बढ़ेगी. इससे किसानों को ज्यादा मुनाफा होगा.