असम में बाढ़ का कहर.. 6 जिलों में 221 गांव जलमग्न, फसलें डूबीं और 46 हजार लोगों पर गंभीर संकट

Assam Flood 221 Villages Submerged: राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा है कि 6 जिलों के 221 गांव पानी में डूब गए हैं. दर्जनों घर ढह गए हैं. धेमाजी जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां 45,841 लोग बाढ़ से पीड़ित हैं.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 1 Jul, 2026 | 02:02 PM

असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बन गई है. 6 जिलों में सैकड़ों गांवों में पानी घुस गया है तो कई दर्जन मकान ढह गए हैं. 3 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं. 46,000 से अधिक ग्रामीण और आम जन प्रभावित हुए हैं. आधिकारिक अपडेट में बताया गया है कि ब्रह्मपुत्र सहित दो प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे विभिन्न हिस्सों में बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पीड़ितों को मुआवजा देने और सर्वे कर फसलों के नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं.

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने अपनी बाढ़ बुलेटिन में बताया कि धेमाजी जिले के सिसिबोरगांव में बाढ़ के पानी में डूबने से एक महिला की मृत्यु हो गई, जो इस वर्ष राज्य में आई बाढ़ से होने वाली पहली मृत्यु है. अपडेट में कुछ मवेशियों के बाढ़ में बहने और डूबकर मरने की जानकारी भी दी गई है.

10 मंडलों के 221 गांवों पानी में जलमग्न हुए

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और विश्वनाथ सहित छह जिलों के 10 राजस्व मंडलों और 221 गांवों के 46,938 लोग बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं. धेमाजी जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां 45,841 लोग बाढ़ से पीड़ित हैं. सोमवार को पांच जिलों में प्रभावित लोगों की संख्या 45,500 थी. बताया गया है कि नेआमतीघाट पर ब्रह्मपुत्र और नांगलामुराघाट पर दिसांग नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

3809 हेक्टेयर कृषि भूमि भी बाढ़ के पानी में डूबी

राज्य में 3809 हेक्टेयर कृषि भूमि भी बाढ़ के पानी में डूबी हुई है. इस बाढ़ से 50,000 बड़े पशुओं सहित 88,000 से अधिक मवेशी प्रभावित हुए हैं. जबकि, बड़ी संख्या में मवेशियों के मरने के मामले भी सामने आ रहे हैं. प्राधिकरण की बुलेटिन के अनुसार, बाढ़ की इस वर्तमान लहर में कई सड़कों सहित बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. चार राहत शिविरों में 450 से अधिक विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि छह अन्य राहत सामग्री वितरण केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं.

ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर खतरे से ऊपर, SDRF हाई अलर्ट पर

आंतरिक जल परिवहन (IWT) कर्मचारी गोकुला दास ने एएनआई के बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी के बीच बसा माजुली इलाके में बहुत ज्यादा पानी बह रहा है. जब पानी का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो फेरी ठीक से आगे नहीं बढ़ पातीं और नाव सेवा बंद कर दी जाती है. ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण माजुली को जोड़ने वाले अफलामुख और निमती घाटों के बीच फेरी सेवाएं रोक दी गई हैं. SDRF के जवानों को हाई अलर्ट पर तैनात किया गया है.

केंद्र ने नुकसान और मुआवजा वितरण रिपोर्ट मांगी

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने प्रभावित क्षेत्रों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है, और मंत्री बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा कर रहे हैं. हम बाढ़ नियंत्रण के अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. जहां मैं स्थिति की निरंतर गहन निगरानी कर रहा हूं, वहीं मेरे मंत्रिपरिषद के सहयोगी राहत कार्यों और सुरक्षा उपायों की देखरेख करने तथा समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए मौके पर मौजूद हैं. वहीं, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्यामण मंत्रालय ने राज्य से सर्वे आकलन और मुआवजा वितरण संबंधी रिपोर्ट मांगी है.

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Published: 1 Jul, 2026 | 01:57 PM

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