Bihar News: बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच राज्य सरकार ने खाद की उपलब्धता को लेकर सख्त कदम उठाए हैं. पटना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने स्पष्ट किया कि किसी भी हाल में किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करने दिया जाएगा. सरकार का फोकस है कि किसानों को समय पर और सही दाम पर उर्वरक मिल सके.
खाद उपलब्धता पर सरकार की सख्त नजर
राजधानी पटना में हुई इस समीक्षा बैठक में सभी जिलों के कृषि अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा गया. बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में खाद के स्टॉक की स्थिति का आकलन करना था. मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वितरण प्रणाली में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सरकार का मानना है कि खेती के इस महत्वपूर्ण समय में खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना ही किसानों की आय को सुरक्षित रखने का सबसे अहम कदम है.
कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
सरकार ने खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त रुख अपनाया है. राम कृपाल यादव ने साफ कहा कि जो भी व्यापारी या बिचौलिया निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलेगा या खाद का स्टॉक छिपाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
राज्य स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक निगरानी बढ़ा दी गई है. विशेष उड़नदस्ता टीमें बनाई गई हैं, जो अचानक छापेमारी कर सकती हैं. इससे बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
बिहार में खाद का भरपूर स्टॉक
किसानों के बीच फैली कमी की आशंका को दूर करते हुए सरकार ने आंकड़े भी जारी किए हैं. राज्य के गोदामों में इस समय पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है. यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों का भंडार इतना है कि फिलहाल किसी भी जिले में कमी की स्थिति नहीं है. सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही खाद खरीदें.
मौजूदा समय में स्टॉक इस प्रकार है:
- यूरिया: 2.63 लाख मीट्रिक टन
- डीएपी (DAP): 1.43 लाख मीट्रिक टन
- एनपीके (NPK): 2.07 लाख मीट्रिक टन
- एमओपी (MOP): 0.39 लाख मीट्रिक टन
- एसएसपी (SSP): 1.02 लाख मीट्रिक टन
अनियमितता पर सख्त कार्रवाई जारी
राज्य सरकार ने सिर्फ चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि कार्रवाई भी तेज कर दी है. वर्ष 2025-26 के दौरान सैकड़ों उर्वरक दुकानों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं और कई मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हर हफ्ते दुकानों के स्टॉक का मिलान किया जाए, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके.
तस्करी रोकने के लिए सीमाओं पर सख्ती
बिहार के सीमावर्ती इलाकों में खाद की तस्करी रोकने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं. सशस्त्र सीमा बल (SSB) के साथ मिलकर निगरानी बढ़ाई गई है. सरकार का साफ संदेश है कि राज्य के किसानों के लिए आवंटित खाद किसी भी कीमत पर बाहर नहीं जाने दी जाएगी.
डिजिटल सुविधा और जागरूकता पर जोर
किसानों की सुविधा के लिए डिजिटल व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है. अब किसान मोबाइल ऐप के जरिए अपने नजदीकी दुकानों पर उपलब्ध खाद की जानकारी घर बैठे ले सकते हैं. इसके साथ ही ‘धरती माता बचाओ’ जैसी पहल के जरिए किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है.
बिहार सरकार की सख्ती और सक्रियता से साफ है कि किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. पर्याप्त स्टॉक, सख्त निगरानी और डिजिटल सुविधाओं के जरिए राज्य में खाद संकट की संभावना को काफी हद तक खत्म कर दिया गया है.