Bihar News: जिले में पराली जलाने पर अब प्रशासन ने ऐसा सख्त एक्शन लिया है कि जिससे किसानों में हड़कंप मच गया है. ताजा कार्रवाई में 101 किसानों की पहचान कर उनके कृषि विभाग के रजिस्ट्रेशन तुरंत लॉक कर दिए गए हैं. इसका सीधा असर यह होगा कि ये किसान अगले तीन साल तक किसी भी सरकारी कृषि योजना का फायदा नहीं उठा पाएंगे. भभुआ और मोहनिया इलाकों में हुई इस बड़ी कार्रवाई के दौरान कई किसानों पर एफआईआर भी दर्ज की गई है, जिससे साफ है कि अब नियम तोड़ने पर कोई राहत नहीं मिलने वाली.
कैसे हुई पहचान?
प्रशासन ने पराली जलाने वालों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया.
- सैटेलाइट निगरानी
- फील्ड स्टाफ की रिपोर्ट
इन दोनों के आधार पर कुल 101 किसानों को चिन्हित किया गया. इनमें सबसे ज्यादा किसान मोहनिया क्षेत्र से सामने आए हैं.
क्यों जरूरी है यह सख्ती?
फसल अवशेष जलाना केवल कानून का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और खेती—दोनों के लिए नुकसानदायक है. मिट्टी को होता है भारी नुकसान वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार पराली जलाने से:
- 100 फीसदी नाइट्रोजन नष्ट हो जाती है
- 25 फीसदी फास्फोरस खत्म हो जाता है
- 20 फीसदी पोटाश का नुकसान होता है
- 60 फीसदी सल्फर भी नष्ट हो जाता है
इससे मिट्टी की उर्वरता घटती है और लंबे समय में उत्पादन पर असर पड़ता है.
पर्यावरण पर भी गंभीर असर
पराली जलाने से वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है. धुआं आसपास के क्षेत्रों में फैलकर लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. इसके साथ ही मिट्टी की संरचना भी खराब हो जाती है, जिससे जल धारण क्षमता कम हो जाती है.
प्रशासन का फोकस: कार्रवाई के साथ जागरूकता
प्रशासन केवल सख्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को जागरूक बनाने पर भी खास ध्यान दे रहा है. इसके तहत जागरूकता रथ के जरिए गांव-गांव अभियान चलाया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक किसानों तक सही जानकारी पहुंच सके. किसानों को फसलों में होने वाले संभावित नुकसान के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है, साथ ही उन्हें इससे बचाव के लिए वैकल्पिक उपायों की भी सलाह दी जा रही है, ताकि वे समय रहते सही कदम उठा सकें.
किसानों के लिए विकल्प भी मौजूद
कृषि विभाग किसानों को पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक मशीनों पर सब्सिडी दे रहा है.
- हैप्पी सीडर
- सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम
- मल्चर जैसे उपकरण
इनकी मदद से बिना जलाए अवशेष का सही उपयोग किया जा सकता है.
पराली जलाना आसान जरूर लगता है, लेकिन इसके नुकसान बहुत बड़े हैं. अब प्रशासन की सख्ती के साथ यह साफ हो गया है कि किसानों को खेती के आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाना ही होगा.