मिथिला के मखाने की ग्लोबल उड़ान, ऑस्ट्रेलिया पहुंची पहली खेप.. किसानों को बंपर मुनाफा

मिथिला के मखाने ने अब सात समंदर पार अपनी पहचान बना ली है. दरभंगा के किसानों से खरीदा गया 18 मीट्रिक टन मखाना पहली बार समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया पहुंचा. खास बात ये है कि किसानों को बाजार भाव से करीब 18 फीसदी ज्यादा कीमत मिली.

नोएडा | Published: 8 Aug, 2026 | 01:20 PM

Makhana Export: जिस मखाने की खुशबू अब तक मिथिला की धरती और देश के बाजारों तक सीमित थी, उसकी महक अब सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच गई है. बिहार के दरभंगा से निकला जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना अब विदेशी बाजार में दस्तक दे चुका है. पहली बार समुद्री रास्ते से 18 मीट्रिक टन मखाना ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है. खास बात यह है कि इस खेप के लिए मखाना सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदा गया और उन्हें सामान्य बाजार भाव से करीब 18 फीसदी ज्यादा कीमत मिली. यानी इस बार सिर्फ मखाना ही नहीं, बल्कि मिथिला के किसानों की मेहनत भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंची है.

ऑस्ट्रेलिया पहुंचा मिथिला का स्वाद

बिहार के कृषि उत्पादों  के लिए यह निर्यात एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की 18 मीट्रिक टन की खेप पहली बार समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसे भारतीय कृषि निर्यात के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. इस निर्यात को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA के सहयोग से पूरा किया गया. करीब 9,500 किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची यह खेप सिर्फ मखाने के निर्यात की कहानी नहीं है, बल्कि बिहार के पारंपरिक कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार में बढ़ते कदम का संकेत भी है.

दरभंगा के किसानों को बाजार से 18 फीसदी ज्यादा मिला दाम

इस पूरी कहानी की सबसे खास कड़ी बिहार के किसान हैं. ऑस्ट्रेलिया भेजे गए मखाने की खरीद  सीधे दरभंगा के किसानों से की गई. इससे किसानों को सामान्य बाजार मूल्य की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक आर्थिक लाभ मिला. सीधे किसानों से खरीद होने से उन्हें बेहतर कीमत मिलने के साथ वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर भी मिला है. कृषि क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, यदि ऐसी व्यवस्था लगातार मजबूत होती है तो किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है और उन्हें अपने उत्पाद की बेहतर कीमत मिल सकती है.

सात कंटेनरों में पैक होकर निकला 18 टन मखाना

बिहार कृषि विभाग  के मुताबिक, करीब 18 मीट्रिक टन मखाने को सात कंटेनरों में पैक कर ऑस्ट्रेलिया रवाना किया गया. पटना के बिहटा स्थित इंटीग्रेटेड यूनिट ऑफ इर्रेडिएशन कम पैकहाउस में मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की गई. बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. मखाने को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने में आधुनिक इर्रेडिएशन, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं ने अहम भूमिका निभाई. इन सुविधाओं की वजह से बिहार के कृषि उत्पादों को विदेशी बाजार के मानकों के अनुरूप तैयार करना आसान हुआ है.

मखाने के बाद दूसरे कृषि उत्पादों की भी खुलेगी राह

मिथिला मखाना की ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच बिहार के कृषि निर्यात  के लिए नई उम्मीद लेकर आई है. अधिकारियों का मानना है कि अगर गुणवत्ता, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स का ढांचा इसी तरह मजबूत होता रहा, तो आने वाले समय में बिहार के दूसरे कृषि उत्पादों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के दरवाजे खुल सकते हैं. फल, सब्जियां, अनाज और कई पारंपरिक कृषि उत्पाद विदेशी बाजार तक पहुंच सकते हैं. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया पहुंचा मिथिला का मखाना सिर्फ 18 टन की खेप नहीं, बल्कि बिहार के किसानों की मेहनत को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की एक नई शुरुआत है.

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