केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 30 फीसदी तक इथेनॉल (E30) मिलाने की तैयारियां तेज कर दी हैं. इसको लेकर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E30 तक चार नए मानकों को जारी किया है. अभी तक पेट्रोल में केवल 20 फीसदी तक ही इथेनॉल मिलाया जाता था. बीते सप्ताह केंद्र की ओर से जारी ड्राफ्ट में E85 और E100 तक के लिए ड्राफ्ट पेश किया गया था. बता दें कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चलते भारत ईंधन जरूरतों को लेकर काफी चिंतित है और हालिया दामों में बढ़ोत्तरी ने लोगों को परेशान किया है. ऐसे में सरकार सरकार पेट्रोल-डीजल जैसे विदेशी ईंधन पर निर्भरता को कम करने की ओर तेजी बढ़ रही है.
गन्ना और मक्का किसानों को लाभ होगा
पेट्रोलियम पदार्थों के लिए भारत पूरी तरह से दूसरे देशों पर निर्भर है. ऐसे में सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण अधिक करने की तैयारी शुरू कर दी है. पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होगी, क्योंकि गन्ना और मक्का समेत अन्य मोटे अनाज से इथेनॉल बनाया जाता है. सरकार के इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से गन्ना और मक्का का इस्तेमाल भी बढ़ेगा, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलना पक्का होगा.
इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के लिए BIS ने चार नए मानकों जारी किए
अब केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 30 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने (E30) की तैयारियां तेज कर दी हैं. इसको लेकर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चार नए मानकों को मंजूरी दी है. इनमें E22, E25, E27 और E30 ईंधन के नए क्वालिटी मानक जारी किए हैं. बता दें कि इससे पहले पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने (E20) की मंजूरी थी. इसके साथ ही चरणबद्ध तरीके से इथेनॉल की मात्रा पेट्रोल में बढ़ाया जाएगा.
पेट्रोल में अधिक इथेनॉल मिलने से वाहनों पर क्या असर होगा
इथेनॉल से का इस्तेमाल पेट्रोल में बढ़ने से वाहनों के प्रदर्शन और गति में क्या असर पड़ेगा, इसको लेकर सरकार काफी गंभीर है. इसीलिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) को निर्देश दिया है कि वह E25 तक के ईंधन का मौजूदा वाहनों के इंजन पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन करे और रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपे.
कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करेगा सरकार का फैसला
अखिल भारतीय डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने सरकार के फैसले पर कहा कि E22 से E30 ईंधन के लिए BIS मानकों का प्रकाशन भारत के इथेनॉल मिश्रण रोडमैप को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और समय पर उठाया गया कदम है. यह केवल एक तकनीकी अधिसूचना नहीं है, बल्कि एक प्रगतिशील और दूरदर्शी कदम है जो अधिक इथेनॉल अपनाने, कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और एक क्लीन मोबिलिटी इकोसिस्टम की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है.
पेट्रोल में 85 और 100 फीसदी इथेनॉल की ओर बढ़ना होगा
AIDA के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि इस घटनाक्रम का स्वागत करते हैं, विशेष रूप से E25 ईंधन मानकों की शुरुआत का. क्योंकि यह इंडस्ट्री को वर्तमान अतिरिक्त चीनी और इथेनॉल उत्पादन क्षमताओं को खपाने में मदद करके राहत देगा. उन्होंने कहा कि अब निर्णायक रूप से E85 और E100 जैसे अधिक इथेनॉल मिश्रण की ओर बढ़ना चाहिए. पूरे क्षेत्र में बनाई जा रही नई क्षमताओं को देखते हुए भारत के इथेनॉल कार्यक्रम का भविष्य तेजी से फ्लेक्स फ्यूल मोबिलिटी के विकास और अधिक इथेनॉल इस्तेमाल के लिए एक सहायक इकोसिस्टम पर निर्भर करेगा.
फ्लेक्स फ्यूल वाहन में खूब इस्तेमाल हो सकेगा इथेनॉल
विजेंद्र सिंह ने कहा कि FFV (फ्लेक्स फ्यूल वाहन) अधिक इथेनॉल खपत को सक्षम करने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, उत्सर्जन को कम करने के साथ ही घरेलू जैव ईंधन के लिए एक स्थायी और लंबे समय तक बाजार बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत पहले ही उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है. अब E22 और E30 की शुरुआत इथेनॉल आधारित समाधानों की अगली पीढ़ी के लिए मंच तैयार करती है.