कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का लक्ष्य बढ़ाकर 2 लाख करोड़, किसानों को मिलेगा सस्ता कर्ज
कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड योजना की शुरुआत साल 2020 में की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य गांवों और कृषि क्षेत्रों में जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास करना है. इस योजना के तहत किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों को बैंक से ऋण लेने की सुविधा मिलती है.
देश में खेती को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के तहत कर्ज का लक्ष्य बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दे दी है. इस योजना के जरिए किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों और कृषि उद्यमियों को खेती से जुड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सस्ती दर पर ऋण दिया जाता है.
बिजनेसलाइन की खबर के मुताबिक इस फैसले को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है और उम्मीद है कि अप्रैल के मध्य तक इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा. सरकार योजना की गाइडलाइनों में कुछ बदलाव करने पर भी विचार कर रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़े.
2020 में शुरू हुई थी योजना
कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड योजना की शुरुआत साल 2020 में की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य गांवों और कृषि क्षेत्रों में जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास करना है. इस योजना के तहत किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों को बैंक से ऋण लेने की सुविधा मिलती है.
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें सरकार ब्याज पर सब्सिडी देती है. आमतौर पर बैंक से मिलने वाले ऋण पर करीब 9 प्रतिशत तक ब्याज लग सकता है, लेकिन AIF योजना के तहत केंद्र सरकार 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देती है. इससे लाभार्थियों को लगभग 6 प्रतिशत की दर से ऋण मिल जाता है.
इसके अलावा इस ऋण की अवधि भी लचीली रखी गई है. अधिकतम सात साल तक की अवधि मिलती है और शुरुआती दो साल तक मोराटोरियम की सुविधा भी दी जा सकती है. इससे किसानों और उद्यमियों को अपनी परियोजना को शुरू करने और उसे स्थापित करने का समय मिल जाता है.
अब तक कितनी परियोजनाओं को मिला लाभ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से अब तक इस योजना के तहत 1,67,452 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. इन परियोजनाओं के लिए कुल 84,034 करोड़ रुपये का कर्ज स्वीकृत किया गया है.
इन परियोजनाओं में कुल निवेश का अनुमान 1.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा लगाया गया है. हालांकि अभी तक बैंकों द्वारा करीब 61,823 करोड़ रुपये का ही वास्तविक वितरण किया गया है. इसका मतलब है कि करीब 19,653 परियोजनाएं ऐसी हैं जिन्हें मंजूरी तो मिल चुकी है, लेकिन उन्हें अभी पूरा ऋण नहीं मिल पाया है.
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा निवेश
AIF योजना के तहत सबसे ज्यादा निवेश कृषि भंडारण और प्रसंस्करण से जुड़े क्षेत्रों में हुआ है. गोदाम (वेयरहाउस), कोल्ड स्टोरेज और प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र इस योजना के तीन प्रमुख क्षेत्र बनकर सामने आए हैं.
इन तीनों क्षेत्रों में बैंकों और सहकारी संस्थाओं ने बड़ी संख्या में परियोजनाओं को मंजूरी दी है. वेयरहाउस के लिए लगभग 21,327 करोड़ रुपये, कोल्ड स्टोरेज के लिए करीब 16,365 करोड़ रुपये और प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्रों के लिए लगभग 10,001 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है. इन सुविधाओं के बनने से किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने में मदद मिलती है और उन्हें बेहतर कीमत मिलने का इंतजार करने का अवसर मिलता है.
कस्टम हायरिंग सेंटर भी बन रहे हैं
इस योजना के तहत बड़ी संख्या में कस्टम हायरिंग सेंटर भी बनाए जा रहे हैं. इन केंद्रों में ट्रैक्टर, रोटावेटर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि मशीनें किराए पर उपलब्ध कराई जाती हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 46,067 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की मंजूरी दी जा चुकी है. इन परियोजनाओं के लिए करीब 6,768 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ है. प्रति परियोजना औसतन लगभग 15 लाख रुपये का ऋण लिया गया है.
इन केंद्रों की वजह से छोटे और सीमांत किसान बिना महंगे उपकरण खरीदे भी आधुनिक कृषि मशीनों का उपयोग कर पा रहे हैं, जिससे खेती में लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ता है.
नई योजनाओं के साथ जोड़ा जाएगा
सरकार अब इस योजना को अन्य कृषि योजनाओं के साथ भी जोड़ने की तैयारी कर रही है. उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के तहत देश के 100 जिलों में कृषि ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन जिलों में AIF परियोजनाओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाए, जैसे ज्यादा ब्याज सब्सिडी या मार्जिन मनी में छूट, तो कृषि ढांचे का विकास और तेज हो सकता है.
लक्ष्य हासिल करना चुनौती भी
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कर्ज लक्ष्य को दोगुना करना जितना आसान लगता है, उसे समय पर हासिल करना उतना ही कठिन हो सकता है. पिछले छह वर्षों में भी सरकार अभी तक 1 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाई है.