साल के आखिर तक और मजबूत होगा अल नीनो, वसंत ऋतु तक असर रहने की 97 फीसदी संभावना
NOAA के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर के अनुसार, अल नीनो इस साल के आखिर तक और मजबूत हो सकता है तथा 2027 की शुरुआत तक इसका असर बना रहने की 97 फीसदी संभावना है. प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह और अंदरूनी तापमान लगातार बढ़ रहा है, जो मजबूत अल नीनो और मौसम में बदलाव का संकेत देता है.
अमेरिका की नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (CPC) ने कहा है कि अल नीनो इस साल के आखिर तक और मजबूत हो सकता है. एजेंसी के मुताबिक, 97 फीसदी संभावना है कि अल नीनो का असर 2027 की शुरुआती वसंत ऋतु (स्प्रिंग) तक बना रहेगा. रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान 81 फीसदी संभावना है कि अल नीनो मजबूत रहेगा. वहीं, करीब 20 फीसदी संभावना है कि यह बहुत मजबूत होने के बजाय कमजोर स्तर का अल नीनो रहे.
NOAA की रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है. भूमध्यरेखीय मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है. साथ ही, वायुमंडलीय परिस्थितियां भी अल नीनो के अनुरूप बनी हुई हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के अधिकांश हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से कम था. लेकिन अप्रैल 2026 के मध्य से पूर्वी और मध्य-पूर्वी प्रशांत महासागर में तापमान लगातार बढ़ रहा है.
पूर्वी प्रशांत महासागर तक समुद्र की सतह का तापमान अधिक
पिछले चार हफ्तों के दौरान डेट लाइन से पूर्वी प्रशांत महासागर तक समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक रहा, जबकि डेट लाइन के पश्चिम में तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया. NOAA का कहना है कि ये सभी संकेत बताते हैं कि अल नीनो की स्थिति अब पूरी तरह स्थापित हो चुकी है. रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी भूमध्यरेखीय अटलांटिक महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से कम रहा. वहीं, पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया.
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समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा
रिपोर्ट में कहा गया है कि डेट लाइन से लेकर पूर्वी प्रशांत महासागर तक समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे अल नीनो और मजबूत हो रहा है. इसके अलावा, भूमध्यरेखा के उत्तर में स्थित पूर्वी प्रशांत महासागर में भी समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है. वहीं, मध्य-पूर्वी और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तापमान में और बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह संकेत है कि अल नीनो का असर लगातार मजबूत होता जा रहा है.
अटलांटिक महासागर में तापमान में गिरावट
NOAA की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार हफ्तों में मध्य-पूर्वी और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान (SST) और बढ़ा है. वहीं, अटलांटिक महासागर और पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में तापमान में गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक समुद्र के अंदर (सबसरफेस) का तापमान सामान्य से कम बना रहा. इसके बाद दिसंबर 2025 के मध्य से तापमान बढ़ना शुरू हुआ और अप्रैल 2026 के आखिर तक लगातार बढ़ता रहा. मई के अंत में इसमें हल्की कमी आई, लेकिन उसके बाद फिर से तापमान बढ़ने लगा.
इंडोनेशिया में बारिश कम हो रही है
पिछले दो महीनों से भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के अधिकांश हिस्सों में समुद्र के अंदर का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है, जो अल नीनो के मजबूत होने का संकेत है. रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 से इंडोनेशिया में बारिश कम हो रही है, जबकि मध्य और मध्य-पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह भी अल नीनो की सक्रिय और मजबूत स्थिति का प्रमुख संकेत है.
पृथ्वी को ठंडा रखने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया
रिपोर्ट में बताया गया है कि ओएलआर (Outgoing Longwave Radiation) वह ऊष्मा (गर्मी) है, जो पृथ्वी की सतह, महासागरों और वायुमंडल से निकलकर अंतरिक्ष में जाती है. यह पृथ्वी को ठंडा रखने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. मौसम वैज्ञानिक ओएलआर के आंकड़ों का इस्तेमाल यह समझने के लिए करते हैं कि किसी क्षेत्र में बादल और बारिश की गतिविधि कितनी हो रही है. इसलिए ओएलआर को मौसम और अल नीनो जैसी जलवायु स्थितियों पर नजर रखने का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है.