कम बारिश के बीच किसानों के लिए बड़ी सलाह, धान छोड़ अपनाएं ये 3 फसलें

El Nino Alert: अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर कौन-सी फसल लगाई जाए, जिससे नुकसान कम और मुनाफा ज्यादा हो. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां धान की बजाय बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं. ये फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं. ऐसे में बदलते मौसम के बीच सही फसल का चुनाव किसानों की कमाई बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 17 Jul, 2026 | 06:00 AM
1 / 6अगर आपके पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो धान की जगह बाजरा, ज्वार और रागी जैसी मिलेट्स फसलें बेहतर विकल्प हो सकती हैं. ये कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं.

अगर आपके पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो धान की जगह बाजरा, ज्वार और रागी जैसी मिलेट्स फसलें बेहतर विकल्प हो सकती हैं. ये कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं.

2 / 6बाजरा और ज्वार जैसी फसलें सूखा सहने की क्षमता रखती हैं. इन्हें बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे बदलते मौसम में भी फसल खराब होने का खतरा कम रहता है.

बाजरा और ज्वार जैसी फसलें सूखा सहने की क्षमता रखती हैं. इन्हें बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे बदलते मौसम में भी फसल खराब होने का खतरा कम रहता है.

3 / 6मोटे अनाजों की खेती में खाद, कीटनाशक, महंगे बीज और सिंचाई पर खर्च अपेक्षाकृत कम आता है. इससे किसानों का कुल निवेश घटता है और शुद्ध मुनाफा बढ़ने की संभावना रहती है.

मोटे अनाजों की खेती में खाद, कीटनाशक, महंगे बीज और सिंचाई पर खर्च अपेक्षाकृत कम आता है. इससे किसानों का कुल निवेश घटता है और शुद्ध मुनाफा बढ़ने की संभावना रहती है.

4 / 6स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण बाजरा, रागी और ज्वार की मांग लगातार बढ़ रही है. शहरी बाजारों में इनकी अच्छी कीमत मिल रही है और सरकार भी MSP व अन्य योजनाओं के जरिए इन फसलों को बढ़ावा दे रही है.

स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण बाजरा, रागी और ज्वार की मांग लगातार बढ़ रही है. शहरी बाजारों में इनकी अच्छी कीमत मिल रही है और सरकार भी MSP व अन्य योजनाओं के जरिए इन फसलों को बढ़ावा दे रही है.

5 / 6लगातार धान की खेती से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है, जबकि मिलेट्स मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करते हैं. इनके अवशेष पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

लगातार धान की खेती से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है, जबकि मिलेट्स मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करते हैं. इनके अवशेष पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

6 / 6भूजल स्तर में गिरावट और अनिश्चित मॉनसून को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ किसानों को धान के बजाय मिलेट्स की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं. कम जोखिम, कम पानी और बेहतर कमाई के कारण ये फसलें भविष्य की टिकाऊ खेती का मजबूत विकल्प बन रही हैं.

भूजल स्तर में गिरावट और अनिश्चित मॉनसून को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ किसानों को धान के बजाय मिलेट्स की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं. कम जोखिम, कम पानी और बेहतर कमाई के कारण ये फसलें भविष्य की टिकाऊ खेती का मजबूत विकल्प बन रही हैं.

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Published: 17 Jul, 2026 | 06:00 AM

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