सहकारिता के मेगा विजन में दूध-बीज क्रांति पर फोकस, 50 हजार PACS से रूरल इंडिया बदलने का प्लान

दिल्ली के भारत मंडपम में सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूरे होने पर बड़ा कार्यक्रम हुआ. 232 नए गोदामों के उद्घाटन और कई डिजिटल पहलों से किसानों, पशुपालकों और सहकारी संस्थाओं को लाभ मिलेगा. सरकार का लक्ष्य कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाना, भंडारण सुविधा बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है.

नोएडा | Updated On: 6 Jul, 2026 | 01:23 PM

दिल्ली के भारत मंडपम में सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूरे होने पर एक ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस मौके पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत 232 नए गोदामों का उद्घाटन किया. इस अवसर पर किसानों, पशुपालकों और सहकारी संस्थाओं के लिए कई बड़ी घोषणाएं की गईं. सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाना और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है.

सहकारिता मंत्रालय के 5 साल पर अमित शाह का बयान

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन सहकारिता क्षेत्र के लिए बेहद शुभ है. उन्होंने बताया कि देश के 30 करोड़ लोग और 8.5 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएं इस दिन का वर्षों से इंतजार कर रही थीं. उन्होंने कहा कि पांच वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर ऐतिहासिक कदम उठाया था. अमित शाह ने पशुपालकों, किसानों और सहकारी सदस्यों की ओर से प्रधानमंत्री को धन्यवाद और बधाई दी.

किसानों को मिलेगा अनाज भंडारण का बड़ा लाभ

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना  के तहत 232 नए गोदामों का उद्घाटन किया. इन गोदामों के शुरू होने से किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने की बेहतर सुविधा मिलेगी. अब किसानों को अपनी उपज तुरंत बेचने का दबाव नहीं रहेगा और वे सही समय का इंतजार कर अधिक कीमत प्राप्त कर सकेंगे. सरकार का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी. यह कदम कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है.

डेयरी सेक्टर में बड़ा बदलाव, दूध उत्पादन को नई ताकत

कार्यक्रम में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर खास फोकस किया गया. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड  राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा नया दूध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड लॉन्च किया गया, जिससे दूध उत्पादन और सप्लाई की पूरी निगरानी डिजिटल तरीके से हो सकेगी. इसके अलावा सहकारी दुग्ध उत्पादक संगठनों और गोमय सहकारी समितियों की शुरुआत भी की गई. इस कदम से दूध की गुणवत्ता, संग्रह और वितरण प्रणाली में सुधार होगा. सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को और लाभकारी बनाया जाए और पशुपालकों की आमदनी में लगातार बढ़ोतरी हो.

बीज प्रणाली को मजबूती, किसानों को बेहतर उत्पादन सामग्री

कृषि क्षेत्र में बीज व्यवस्था  को आधुनिक बनाने के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए. टिश्यू कल्चर लैब की आधारशिला बाराबंकी और जलगांव में रखी गई, जिससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे और उन्नत उत्पादन सामग्री मिल सकेगी. साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और बीज उद्योग संस्था BBSSL के बीच समझौता हुआ है. इस सहयोग से देश की बीज प्रणाली को मजबूत किया जाएगा और किसानों को उन्नत किस्मों के बीज आसानी से उपलब्ध होंगे. इससे फसल उत्पादन बढ़ने और खेती की लागत घटने की उम्मीद है.

डिजिटल सहकारिता से तेज और पारदर्शी सिस्टम

कार्यक्रम में 50,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को ई-PACS में बदलने की शुरुआत भी की गई. इसके जरिए सहकारी व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी. किसानों को ऋण, भुगतान और अन्य सेवाएं तेजी और पारदर्शिता के साथ मिलेंगी. इसके साथ ही AI आधारित प्लेटफॉर्म, जियो-टैग मोबाइल ऐप और सहकार CBS जैसे डिजिटल सिस्टम भी लॉन्च किए गए हैं. इनसे सहकारी बैंकों और समितियों का कामकाज और भी आसान और स्मार्ट बनेगा. सरकार का मानना है कि ये बदलाव ग्रामीण भारत में एक नई तकनीकी क्रांति लाएंगे और सहकारिता को आधुनिक अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाएंगे.

Published: 6 Jul, 2026 | 01:22 PM

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