70 करोड़ के डेयरी प्लांट से बदलेगी लद्दाख की तस्वीर, अब यहीं बनेगा दूध-दही और पनीर
लेह में आधुनिक डेयरी प्लांट बनने से लद्दाख में दूध, दही और पनीर उत्पादन को बड़ी मजबूती मिलने वाली है. इस परियोजना से स्थानीय पशुपालकों की आय बढ़ने, युवाओं को रोजगार मिलने और सेना को ताजा डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. सरकार इसे आत्मनिर्भर लद्दाख की दिशा में बड़ा कदम मान रही है.
Leh Dairy Plant: लद्दाख के लेह में करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक डेयरी प्लांट बनाया जा रहा है. इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 50 हजार लीटर दूध प्रोसेस करने की होगी. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मई 2026 में इस परियोजना की घोषणा की. सरकार का कहना है कि इससे लद्दाख में डेयरी क्षेत्र मजबूत होगा, स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और सेना को भी ताजा डेयरी उत्पाद आसानी से मिल सकेंगे. लंबे समय से दूध, दही और पनीर के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहने वाला लद्दाख अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
रोजाना 50 हजार लीटर दूध होगा प्रोसेस
नया डेयरी प्लांट लेह में बड़े स्तर पर दूध प्रोसेस करेगा. इसकी क्षमता रोजाना 50 हजार लीटर दूध की होगी. सरकार का मानना है कि इससे लद्दाख में डेयरी क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा. अब तक यहां सीमित डेयरी सुविधाएं होने के कारण लोगों को कई डेयरी उत्पाद बाहर से मंगवाने पड़ते थे. इससे कीमत भी ज्यादा होती थी और सप्लाई में भी परेशानी आती थी. लेकिन नए प्लांट के शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर ही दूध, दही और पनीर तैयार किया जाएगा. इससे लोगों को ताजे डेयरी उत्पाद मिलेंगे और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी कम होगा.
पनीर और दही उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने बताया कि पहले से चल रहे मिल्क प्लांट में अब आधुनिक तकनीक से पनीर और दही का उत्पादन भी शुरू किया जा रहा है. रोजाना करीब 500 किलो पनीर तैयार करने की योजना है. इसके साथ बड़े स्तर पर दही उत्पादन भी होगा. यह पहली बार होगा जब लद्दाख में इतने बड़े स्तर पर आधुनिक डेयरी उत्पादन शुरू किया जाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्थानीय बाजार मजबूत होगा और छोटे पशुपालकों को भी अपनी डेयरी उत्पाद बेचने का अच्छा मौका मिलेगा.
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सेना और ITBP को यहीं से मिलेगी सप्लाई
लद्दाख देश का सीमावर्ती इलाका है, जहां बड़ी संख्या में सेना और ITBP के जवान तैनात रहते हैं. सरकार के अनुसार इस डेयरी प्लांट से 18 हजार से ज्यादा जवानों के लिए दूध, दही और पनीर की सप्लाई की जाएगी. अब तक इन चीजों को दूसरे राज्यों से लाना पड़ता था, जिससे समय और खर्च दोनों ज्यादा लगता था. लेकिन स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से सप्लाई आसान और तेज हो जाएगी. सरकार का कहना है कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में जरूरी खाद्य आपूर्ति मजबूत होगी और स्थानीय लोगों को भी इसका आर्थिक फायदा मिलेगा.
पशुपालकों की आय बढ़ाने पर फोकस
इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य स्थानीय पशुपालकों और युवाओं को रोजगार देना है. सरकार का दावा है कि इससे डेयरी कारोबार बढ़ेगा और लोगों की आय में सुधार होगा. दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए लेह और कारगिल में करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से विशेष पशु ब्रीडिंग सेंटर भी बनाए जा रहे हैं. इन केंद्रों में बेहतर नस्ल के पशुओं पर काम किया जाएगा, ताकि दूध उत्पादन बढ़ सके. सरकार का मानना है कि इससे लद्दाख के लोग आत्मनिर्भर बनेंगे और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा. साथ ही बाहर पलायन करने की जरूरत भी कम होगी. कुल मिलाकर लेह डेयरी प्लांट को लद्दाख के लिए बड़ी शुरुआत माना जा रहा है. इससे डेयरी क्षेत्र मजबूत होगा, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और सेना के लिए जरूरी डेयरी उत्पादों की सप्लाई भी आसान हो जाएगी.