यूपी बना देश का नंबर-1 दुग्ध उत्पादक, 40 फीसदी बढ़ा उत्पादन… महिलाओं ने संभाली डेयरी की कमान
इस डेयरी क्रांति की सबसे खास बात यह है कि इसमें ग्रामीण महिलाओं की भूमिका बेहद अहम रही है. उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़ी हैं. 31 जिलों में महिला समूह रोजाना करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहे हैं.
Uttar Pradesh milk production: उत्तर प्रदेश ने डेयरी सेक्टर में एक नया इतिहास रच दिया है. कभी पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाला यह राज्य आज देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनकर उभरा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में दूध उत्पादन में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है, जिसने न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, बल्कि ग्रामीण जीवन में भी बड़ा बदलाव लाया है.
यूपी बना देश का नंबर-1 दुग्ध उत्पादक
ताजा आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश अब देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य बन गया है. राज्य का योगदान देश के कुल दूध उत्पादन में करीब 16 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा है.
भारत के पांच प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों का कुल योगदान लगभग 54 प्रतिशत है, जिसमें अकेले यूपी की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत होना इस उपलब्धि की बड़ी मिसाल है.
उत्पादन में 40 फीसदी की बढ़ोतरी
अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर और साफ हो जाती है. साल 2016-17 में जहां उत्तर प्रदेश में 277 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन होता था, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा हो गया है. यानी करीब 111 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी, जो लगभग 40 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाती है. यह वृद्धि अचानक नहीं हुई, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से डेयरी सेक्टर को मजबूत करने का परिणाम है.
मजबूत नीति और बेहतर ढांचा
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, यह सफलता सरकार की योजनाओं और जमीनी स्तर पर किए गए काम का नतीजा है. राज्य में डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया, सप्लाई चेन को बेहतर बनाया गया और किसानों को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए गए. इससे दूध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली.
ग्रामीण महिलाओं ने बदली तस्वीर
इस डेयरी क्रांति की सबसे खास बात यह है कि इसमें ग्रामीण महिलाओं की भूमिका बेहद अहम रही है. उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़ी हैं. 31 जिलों में महिला समूह रोजाना करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहे हैं. इन गतिविधियों के जरिए अब तक करीब 5,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है, जो इस सेक्टर की ताकत को दर्शाता है.
4 लाख महिला किसानों को मिला सहारा
राज्य में पांच प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनियों के माध्यम से करीब 4 लाख महिला किसान जुड़ी हुई हैं. ये कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं और महिलाओं को डेयरी से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं.
फरवरी 2026 तक इन कंपनियों का कुल कारोबार भी करीब 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इससे साफ है कि डेयरी अब सिर्फ एक सहायक काम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है.
डेयरी से बढ़ी महिलाओं की आर्थिक ताकत
डेयरी सेक्टर में बढ़ती भागीदारी ने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल दी है. अब महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही हैं. उनकी आमदनी बढ़ रही है, जिससे परिवार की स्थिति सुधर रही है और गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो रही हैं.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया सहारा
दूध उत्पादन में बढ़ोतरी का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है. इससे पूरे ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है. डेयरी सेक्टर ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं और छोटे किसानों के लिए आय का स्थायी स्रोत बना है.
जमीनी स्तर पर काम
उत्तर प्रदेश की यह सफलता दिखाती है कि अगर सही नीति, मजबूत योजना और जमीनी स्तर पर काम किया जाए, तो कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. आने वाले समय में अगर इसी तरह डेयरी सेक्टर को और मजबूत किया गया, तो यह न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा.