भारत में चीनी उत्पादन में बढ़त जारी, लेकिन उत्तर प्रदेश में मार्च में 13 प्रतिशत गिरावट ने बढ़ाई चिंता

जहां यूपी में गिरावट देखने को मिली, वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक ने बेहतर प्रदर्शन किया है. महाराष्ट्र में इस सीजन के दौरान 98.95 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 24 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं कर्नाटक में 46.75 लाख टन उत्पादन हुआ, जो 17 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 2 Apr, 2026 | 10:22 AM

Sugar production: भारत में इस साल चीनी उत्पादन का कुल आंकड़ा भले ही बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश से आई ताजा खबरें थोड़ी चिंता बढ़ाने वाली हैं. जहां पूरे देश में उत्पादन में अच्छी बढ़त दर्ज की गई है, वहीं यूपी में मार्च महीने के दौरान उत्पादन में तेज गिरावट देखने को मिली है. यह गिरावट इसलिए भी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में से एक है.

देशभर में 9 प्रतिशत बढ़ा चीनी उत्पादन

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक देश का कुल चीनी उत्पादन 271.20 लाख टन तक पहुंच गया है. पिछले साल इसी समय यह 248.65 लाख टन था. यानी इस बार करीब 9 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. कुछ दिन पहले तक यह बढ़त 10 प्रतिशत के आसपास थी, लेकिन बाद में उत्पादन की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई.

यूपी में मार्च में 13 प्रतिशत तक गिरा उत्पादन

उत्तर प्रदेश में इस सीजन के दौरान शुरुआत अच्छी रही थी और 15 मार्च तक उत्पादन पिछले साल से ज्यादा था. लेकिन इसके बाद स्थिति बदल गई. जनवरी और फरवरी में करीब 3-3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जो मार्च में बढ़कर 13 प्रतिशत तक पहुंच गई.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती गई. किसानों ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि कई इलाकों में गन्ने की पैदावार 30 प्रतिशत तक कम हुई है, जिसका असर अब उत्पादन में साफ दिख रहा है.

कम गन्ना पेराई, लेकिन बेहतर रिकवरी ने संभाला हाल

31 मार्च तक उत्तर प्रदेश में कुल 87.45 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 87.70 लाख टन था. यानी आंकड़े लगभग बराबर हैं, लेकिन उम्मीद से कम माने जा रहे हैं.

इस बार गन्ने की पेराई भी कम हुई है. यूपी में 857.35 लाख टन गन्ने की पेराई हुई, जबकि पिछले साल यह 904.12 लाख टन थी. इसके बावजूद उत्पादन पूरी तरह से नहीं गिरा, क्योंकि रिकवरी रेट बेहतर रहा.

रिकवरी रेट इस बार 10.20 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल 9.70 प्रतिशत था. इसका मतलब है कि कम गन्ने से भी ज्यादा चीनी निकाली जा सकी, जिससे कुल उत्पादन को कुछ हद तक संतुलन मिला.

कई चीनी मिलें बंद, सीजन खत्म होने की ओर

देशभर में अब तक 467 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, जिनमें से 100 मिलें पिछले 15 दिनों में ही बंद हुई हैं. फिलहाल केवल 74 मिलें ही चालू हैं. पिछले साल इसी समय 113 मिलें काम कर रही थीं.

उत्तर प्रदेश में भी 83 मिलें बंद हो चुकी हैं और सिर्फ 38 मिलें अभी चल रही हैं. माना जा रहा है कि 10 अप्रैल तक इनमें से ज्यादातर मिलें भी बंद हो जाएंगी, जिससे सीजन लगभग समाप्त हो जाएगा.

महाराष्ट्र और कर्नाटक ने दिखाया बेहतर प्रदर्शन

जहां यूपी में गिरावट देखने को मिली, वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक ने बेहतर प्रदर्शन किया है. महाराष्ट्र में इस सीजन के दौरान 98.95 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 24 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं कर्नाटक में 46.75 लाख टन उत्पादन हुआ, जो 17 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है. हालांकि इन राज्यों में भी ज्यादातर मिलें बंद हो चुकी हैं. महाराष्ट्र में सिर्फ 8 मिलें और कर्नाटक में एक मिल ही अभी चल रही है.

इन आंकड़ों से साफ है कि देश का कुल उत्पादन फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन उत्तर प्रदेश में गिरावट आने वाले समय के लिए संकेत दे रही है. अगर गन्ने की पैदावार में कमी का यही रुझान जारी रहता है, तो इसका असर अगले सीजन में और ज्यादा देखने को मिल सकता है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

ज्ञान का सम्मान क्विज

आम में सबसे ज्यादा कौन सा विटामिन होता है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
कपास
विजेताओं के नाम
कमल सिंह पडिहार, आगर मालवा, मध्य प्रदेश
गुरबाज सिंह, रोपड़, पंजाब

लेटेस्ट न्यूज़