अमेरिकी डील से किसानों का हित दांव पर, कांग्रेस ने ज्वार, मक्का, कपास के आंकड़े पेश कर सरकार को घेरा

India US Trade Deal: कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भारत अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर आंकड़े पेश करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को बर्बाद करने का आरोप लगाया. कपास, मक्का और ज्वार समेत फलों के आयात पर सरकार की आलोचना करते हुए सवाल पूछे हैं.

नोएडा | Updated On: 16 Feb, 2026 | 04:58 PM

भारत अमेरिका व्यापार समझौते से खेती और किसानों को होने वाले नुकसान के आंकड़े पेश करते हुए कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने सरकार को घेरा है. उन्होंने ज्वार, मक्का, कपास, जीएम फसलों को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने किसानों को का हित दांव पर लगा दिया है. उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते आर्थिक तरक्की का रास्ता होते हैं. व्यापार समझौते देश की संप्रभुता को त्याग कर, गुलामी का रास्ता कभी नहीं हो सकते. व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने देश और किसानों की बलि दे दी.

सरकार ने प्रॉसेस्ड मक्का, ज्वार, सोयाबीन के रास्ते खोले- सुरजेवाला

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भारत अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर आंकड़े पेश करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को बर्बाद करने का आरोप लगाया. सुरजेवाला ने कहा कि भारत, अमेरिका व दूसरे देशों से जीएम फसलें (GM Crops) आयात करने की अनुमति नहीं देता, क्योंकि इससे भारत में बीज शुद्धता-प्रजातियां नष्ट हो जाती हैं.

मगर सवाल है कि अगर भारत में प्रोसेस्ड मक्का, ज्वार, सोयाबीन, फल व अन्य उत्पाद भी आएंगे, तो क्या उनका सीधा प्रभाव भारत की जैविक विविधता और बीज शुद्धता पर नहीं पड़ेगा? क्या मोदी सरकार ने पिछले दरवाजे से भारत में GM Crops के लिए रास्ते खोल दिए हैं? क्या भारत की जैविक विविधता व बीज शुद्धता पर पड़ने वाले गंभीर असर के बारे में सोचा गया है?

अमेरिका के किसानों को और भारतीय किसानों को सब्सिडी अंतर पर सवाल

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते में ‘नॉन-ट्रेड बैरियर्स’ को हटाने का मतलब किसान की सब्सिडी को हटाना व GM Crops को मंजूरी देकर, बीज शुद्धता व जैविक विविधता पर सवाल पैदा करना होगा. व्यापार समझौते के 5वें बिंदु में साफ लिखा है कि अमेरिका की चिंताओं को देखते हुए भारत अपने नॉन-टैरिफ ट्रेड बैरियर हटाएगा. अमेरिका अपने किसान को सालाना करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी देता है. इसके उलट भारत में प्रति किसान परिवार 6,000 रुपये की सब्सिडी दी जाती है, मगर महंगे डीजल, खाद, बिजली और कीटनाशक दवाईयों के जरिए 25,000 रुपये वापस ले लिए जाते हैं.

इसके बावजूद भी नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से समझौता किया है कि हम किसान की सब्सिडी कम करेंगे और जीएम फसलें (GM Crops) को मंजूरी दे देंगे.

समझौते को कपास किसानों को चौपट करने वाला बताया

रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भारत से बांग्लादेश को सालाना 24,550 करोड़ रुपए का कपास व धागा निर्यात किया जाता है. अगर बांग्लादेश, अमेरिका से कपास व धागा मंगवाने लगे, तो भारत के कपास उत्पादक किसान व कपड़ा बनाने वाले कारखानों का क्या होगा? अमेरिका से आयात किए जाने वाले खाद्य व कृषि उत्पादों में ‘एडिशनल प्रोडक्ट्स’ लिखा गया है। मतलब मोदी सरकार अमेरिका से खाद्य और कृषि उत्पादों के अलावा भी सामान मंगवाएगी. ऐसे में देश जानना चाहता है कि वो ‘एडिशनल प्रोडक्ट्स’ कौन से हैं?

डील के मुताबिक अब सेब, संतरा, चेरी, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी जैसी चीजें अमेरिका से आएंगी. ऐसे में ये फल उगाने वाले भारत के किसानों का बहुत नुकसान होगा.

व्यापार समझौते का बड़ा प्रभाव “कपास” पैदा करने वाले किसानों पर पड़ेगा. अमेरिका ने बांग्लादेश से एक व्यापार समझौता किया, उसमें साफ-साफ लिखा है कि बांग्लादेश, अमेरिकी कपास व धागा आयात कर जो कपड़ा व वस्त्र अमेरिका को निर्यात करेगा, उस पर अमेरिका में 0% शुल्क लगेगा. इसके उलट, हमारे यानी भारत के निर्यात पर 18% शुल्क लगेगा, जबकि भारत कपड़ा व वस्त्र का सबसे बड़ा निर्यातक है. ऐसा हुआ तो इसका असर तिरुपुर, सूरत, पानीपत, लुधियाना समेत पूरे देश के वस्त्र उद्योग पर पड़ेगा. मगर 12 फरवरी, 2026 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सार्वजनिक तौर से देश को बताया कि भारत भी अमेरिका से कपास आयात कर जो कपड़ा वा वस्त्र निर्यात करेगा, उसे भी बांग्लादेश के बराबर राहत मिलेगी. यानी अब अमेरिकी कपास के भारत में निशुल्क आयात का दरवाजा भी मोदी सरकार ने खोल दिया है.

इसके अलावा बांग्लादेश, भारत से करीब 50% कपास आयात करता है. मगर अब कपास का भारत से बांग्लादेश को निर्यात भी बंद हो जाएगा, जो कि हमारे किसान पर दोहरी मार होगी.

कपास आयात पहले से करने का आरोप

पीयूष गोयल भले न बता रहे हों लेकिन मोदी सरकार ने समझौते से पहले ही अमेरिका से भारत में कपास का आयात शुरू कर दिया था. आंकड़ों के मुताबिक भारत ने कपास होते हुए भी साल 2024-25 में अमेरिका से 3,428 करोड़ रुपये का कपास आयात कर लिया है. अगर ये आंकड़ा 3,428 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये हो जाएगा तो हमारे कपास का क्या होगा? इस साल भारत में कपास की MSP 6100 रुपये प्रति क्विंटल थी, लेकिन कपास 5045 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर बिका.

सवाल है कि अगर अमेरिकी कपास का आयात होगा, तो महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के कपास पैदा करने वाले किसानों का क्या होगा?

कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत के हित को दांव पर लगा दिया है. 6 फरवरी, 2026 के पहले फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में ही सहमति जताई गई है कि भारत बिना किसी आयात शुल्क के अमेरिका के खाद्य व कृषि उत्पादों के लिए हमारा बाजार खोल देगा.

ड्राईड डिस्टिलर ग्रेन से मक्का आयात का रास्ता खोला गया

⦁ ये प्रोसेस्ड मक्का है. भारत में 2025-26 के दौरान 4.30 करोड़ मीट्रिक टन मक्के का उत्पादन हुआ
⦁ भारत में मक्का कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, गुजरात में पैदा होता है
⦁ वहीं, अमेरिका 42.50 करोड़ मीट्रिक टन मक्का पैदा करता है, जिसे बेचने के लिए वो भारत जैसा बड़ा बाजार ढूंढ रहा है
⦁ अगर अमेरिका से ड्यूटी-फ्री मक्के के लिए भारत के बाजार खोल दिए गए, तो देश के किसानों का क्या होगा?

अमेरिका से ज्वार आयात को खोलने पर सहमति

⦁ भारत में इस साल 52 लाख मीट्रिक टन ज्वार हुआ
⦁ भारत में ज्वार पैदा करने वाले सबसे बड़े राज्य हैं- महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व गुजरात
⦁ वहीं, अमेरिका 87 लाख मीट्रिक टन सालाना ज्वार उत्पादन करता है, जो दुनिया में सबसे अधिक है
⦁ अगर अमेरिका का ड्यूटी-फ्री ज्वार भारत के बाजार में बिकेगा, तो फिर भारत के किसानों का क्या होगा?

सोयाबीन ऑयल के आयात पर सहमति

⦁ भारत का सालाना सोयाबीन उत्पादन 153 लाख टन ( साल 2024-25) है
⦁ भारत में सोयाबीन की पैदावार ज्यादातर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान व कर्नाटक में होती है
⦁ वहीं, अमेरिका में हर साल करीब 12 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन होता है
⦁ ऐसे में क्या अमेरिका से ड्यूटी-फ्री सोयाबीन का आयात होने से भारत के साधारण किसानों की आजीविका पर असर नहीं पड़ेगा?

सुरजेवाला ने कहा कि व्यापार समझौते आर्थिक तरक्की का रास्ता होते हैं. व्यापार समझौतों का आधार ही दो देशों की बराबरी की शर्तों पर परस्पर लोकहित है. व्यापार समझौते देश की संप्रभुता को त्याग कर, गुलामी का रास्ता कभी नहीं हो सकते. व्यापार समझौतों की आड़ में देशहित और लोकहित दोनों की बलि नहीं दी जा सकती. इन्हीं वजहों के चलते हम अंग्रेजों से भी लड़े थे. अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने देश और किसानों की बलि दे दी. भारत की ऊर्जा सुरक्षा से सरेआम खिलवाड़ किया.

Published: 16 Feb, 2026 | 04:50 PM

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