बाजरा की हाइब्रिड किस्म विकसित, अब सूखे में भी लहलहाएगी फसल.. 28 फीसदी अधिक होगी पैदावार

राजस्थान के वैज्ञानिकों ने RHB 273 नामक दुनिया की पहली थ्री-वे हाइब्रिड बाजरा किस्म विकसित की है. यह कम वर्षा और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जल्दी पकती है, अधिक पैदावार देती है, बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है और पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाला चारा भी प्रदान करती है.

नोएडा | Published: 26 Jan, 2026 | 10:06 AM

 Millet Improved Variety: केंद्र सरकार मोटे अनाज को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए किसानों को सब्सिडी दी जा रही है. कम कीमत पर बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद भी किसान मोटे अनाज की खेती करने से कतरा रहे हैं. लेकिन अब मोटे अनाज की खेती करने की चाहत रखने वाले किसानों के लिए खुशखबरी है. क्योंकि राजस्थान के वैज्ञानिकों ने बाजरे की एक ऐसी किस्म विकसित की है, जो कम सिंचाई में तैयार हो जाती है. खास बात यह है कि इसकी पैदावार भी मौजूदा सामान्य किस्मों के मुकाबले ज्यादा है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने कम बारिश वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखते बाजरे की यह किस्म विकसित  की है. इसे दुनिया का पहला थ्री-वे हाइब्रिड बाजरा किस्म कहा जा रहा है. इसका नाम  RHB 273 रखा गया है. यह नई किस्म सूखे और बीमारियों के प्रति मजबूत होने के साथ-साथ राजस्थान के पश्चिमी और अन्य कम वर्षा वाले इलाकों के लिए अनुकूल है. यह 28 फीसदी तक अधिक उत्पादन देती है.

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती की तस्वीर बदल सकती है

राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI) और अंतरराष्ट्रीय संस्था ICRISAT के सहयोग से विकसित इस किस्म से किसानों को कम पानी में भी बेहतर पैदावार मिलने की उम्मीद है. वैज्ञानिकों का कहना है कि RHB 273 बदलते मौसम और अनिश्चित वर्षा पैटर्न  में भी किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती की तस्वीर बदल सकती है.

48-50 क्विंटल भूसा प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने देशभर में 25 फसलों की 184 उन्नत किस्में जारी की हैं, जिनमें दुर्गापुरा के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित थ्री-वे हाइब्रिड बाजरा RHB 273 भी शामिल है. यह किस्म विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के शुष्क इलाकों में फायदेमंद होगी, जहां सालाना वर्षा 400 मिमी से कम होती है. तीन वर्षों के परीक्षणों में RHB 273 ने प्रति हेक्टेयर 22-25 क्विंटल तक अनाज उत्पादन दिया, जो मौजूदा किस्मों से 13-28 फीसदी अधिक है. यह जल्दी पकने वाली किस्म है और 75-76 दिनों में तैयार हो जाती है. इसके अलावा, यह पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाला चारा भी देती है, जिससे 48-50 क्विंटल भूसा प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है.

उच्च गुणवत्ता वाले बाजरे का लाभ उठा सकते हैं

RHB 273 बाजरे की प्रमुख बीमारियों जैसे डाउनी मिल्ड्यू और ब्लास्ट के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे फसल नुकसान  का जोखिम कम होता है. यह किस्म शुष्क क्षेत्रों में किसानों के लिए बेहतर उत्पादन और कम समय में अधिक लाभ सुनिश्चित करेगी. दुर्गापुरा की बाजरा अनुसंधान परियोजना में विकसित RHB 273 किस्म स्वास्थ्य और पोषण के लिहाज से भी लाभकारी है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह थ्री-वे हाइब्रिड है, यानी उत्पादन, सहनशीलता और गुणवत्ता तीनों में बेहतर है. इससे किसान अधिक पैदावार, मजबूत फसल और उच्च गुणवत्ता वाले बाजरे का लाभ उठा सकते हैं.

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