कुंदरू उगाने वाले किसान रहें सतर्क, ये कीट चुपचाप कर रहे हैं फसल को खोखला

कुंदरू की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला कीट फल मक्खी माना जाता है. यह कीट सीधे फलों पर हमला करता है. मादा फल मक्खी छोटे-छोटे फलों पर अंडे दे देती है और इन अंडों से निकलने वाले लार्वा फल के अंदर घुसकर उसे खोखला करने लगते हैं. बाहर से फल ठीक दिखता है, लेकिन अंदर से सड़ने लगता है.

नई दिल्ली | Published: 7 Feb, 2026 | 08:50 AM

भारत के कई हिस्सों में अब किसान तेजी से सब्जियों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं. खासतौर पर सर्दी के मौसम में सब्जियों की मांग बढ़ जाती है, जिससे बाजार में दाम अच्छे मिलते हैं. इन्हीं सब्जियों में कुंदरू भी शामिल है, जो स्वाद के साथ-साथ पोषण से भरपूर मानी जाती है. कम लागत में अच्छी पैदावार देने वाली यह फसल किसानों के लिए आमदनी का मजबूत साधन बन सकती है. लेकिन हाल के दिनों में कुंदरू की फसल पर कुछ खतरनाक कीटों का प्रकोप तेजी से देखा जा रहा है. अगर समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मेहनत से उगाई गई पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा बन जाता है.

फल मक्खी से सबसे ज्यादा खतरा

कुंदरू की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला कीट फल मक्खी माना जाता है. यह कीट सीधे फलों पर हमला करता है. मादा फल मक्खी छोटे-छोटे फलों पर अंडे दे देती है और इन अंडों से निकलने वाले लार्वा फल के अंदर घुसकर उसे खोखला करने लगते हैं. बाहर से फल ठीक दिखता है, लेकिन अंदर से सड़ने लगता है. ऐसे फल न तो खाने लायक रहते हैं और न ही बाजार में सही कीमत दिला पाते हैं.

फल मक्खी से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि खेत में पके और संक्रमित फलों को समय पर तोड़कर हटा दिया जाए. खेत में गिरे हुए फलों को छोड़ देना इस कीट को और बढ़ावा देता है. इसके अलावा किसान फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे फल मक्खी की संख्या नियंत्रित रहती है. नीम का तेल या नीम आधारित जैविक कीटनाशक का नियमित छिड़काव भी इस कीट को रोकने में मदद करता है.

लाल मकड़ी पौधों को धीरे-धीरे कमजोर करती है

कुंदरू की फसल पर लाल मकड़ी का हमला धीरे-धीरे होता है, लेकिन इसका असर बहुत गंभीर हो सकता है. यह कीट पत्तियों की निचली सतह से रस चूसता है, जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं. कुछ समय बाद पत्तियां सूखकर झड़ जाती हैं और पौधे का विकास रुक जाता है. अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो पूरा खेत कमजोर होकर कम पैदावार देने लगता है.

लाल मकड़ी आमतौर पर सूखे मौसम और कम नमी वाली मिट्टी में तेजी से फैलती है. इसलिए खेत में नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है. नियमित सिंचाई और हल्की फुहार से इस कीट का प्रकोप कम किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर सल्फर आधारित दवाओं का छिड़काव भी कारगर माना जाता है, लेकिन इसका प्रयोग संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए.

फल छेदक कीट से बिगड़ जाती है फलों की गुणवत्ता

फल छेदक कीट कुंदरू के फलों में छेद करके अंदर से उन्हें खाना शुरू कर देता है. इस कीट के कारण फल टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं और उनका आकार बिगड़ जाता है. ऐसे फल बाजार में बिकने लायक नहीं रहते और किसानों को सीधा नुकसान झेलना पड़ता है.

इस कीट से बचाव के लिए सबसे पहले संक्रमित फलों को पहचानकर खेत से बाहर निकालना जरूरी है. जैविक तरीके अपनाने वाले किसान ट्राइकोग्रामा कार्ड का उपयोग कर सकते हैं, जो फल छेदक कीट के अंडों को नष्ट करने में मदद करता है. अगर संक्रमण बहुत ज्यादा हो जाए, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयुक्त कीटनाशक का सीमित छिड़काव किया जा सकता है.

समय पर देखभाल ही है फसल की सुरक्षा

कुंदरू की खेती में सफलता पाने के लिए नियमित निगरानी और समय पर सही उपाय अपनाना सबसे जरूरी है. कीटों की शुरुआती पहचान कर ली जाए, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है. साफ-सफाई, जैविक उपाय और संतुलित दवाओं के इस्तेमाल से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. थोड़ी-सी सावधानी और जागरूकता कुंदरू की फसल को चौपट होने से बचा सकती है और किसानों को अच्छी पैदावार के साथ बेहतर मुनाफा दिला सकती है.

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